
जिला अस्पताल के टेंडर में बड़ा 'घोटाला'! L-1 को दरकिनार कर ब्लैकलिस्ट कंपनी को दिया करोड़ों का ठेका?
रीवा जिला अस्पताल में आउटसोर्स मैनपावर और सुरक्षा सेवाओं के टेंडर में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं! नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए सिविल सर्जन ऑफिस की निविदा समिति ने कम रेट वाली एजेंसी को बाहर कर दिया और कथित रूप से ब्लैकलिस्टेड कंपनी को गोपनीय (ऑफलाइन) तरीके से कार्यादेश जारी कर दिया।
मामले के मुख्य बिंदु:
L-1 को छोड़कर L-3 को ठेका: सबसे कम रेट देने वाली एजेंसी को छोड़ सीधे अधिक रेट वाली इंदौर की एजेंसी को काम दिया गया, जिससे शासन को लाखों के नुकसान का आरोप।
ऑनलाइन टेंडर, पर काम हुआ ऑफलाइन: पूरी प्रक्रिया पोर्टल पर सार्वजनिक करने के बजाय गोपनीय तरीके से ऑफलाइन कार्यादेश जारी।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर मेहरबानी: जिस कंपनी पर 2023 में अनियमितता और हाईकोर्ट के आदेश के तहत कार्रवाई हुई थी, उसे फिर से काम दे दिया गया।
झूठा शपथ पत्र: आरोप है कि फर्जी एफिडेविट के बावजूद शिकायतों को दबाकर टेंडर पास किया गया।
कलेक्टर से लेकर शासन स्तर तक शिकायत दर्ज कराई गई है। वहीं सिविल सर्जन डॉ. प्रतिभा मिश्रा का कहना है कि *"प्रक्रिया नियमानुसार हुई है, ब्लैकलिस्ट संबंधी दस्तावेज नहीं मिले हैं, जांच के बाद कार्यवाही होगी।"*
साफ-सुथरे प्रशासन और निष्पक्ष जांच की मांग अब जोर पकड़ रही है!
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