
किशाऊ बांध परियोजना को केंद्र की सैद्धांतिक मंजूरी, हिमाचल को हर साल 600 करोड़ की आय की उम्मीद
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर टौंस नदी पर प्रस्तावित बहुउद्देशीय किशाऊ बांध बिजली परियोजना को केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि परियोजना से हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली बिजली के माध्यम से प्रतिवर्ष करीब 600 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ हो सकता है।
जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में परियोजना से जुड़े विभिन्न मुद्दों और आपत्तियों पर चर्चा की गई। बैठक में Sukhvinder Singh Sukhu ने राज्य के हितों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद केंद्र सरकार ने प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखने पर सहमति जताई।
करीब 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना का निर्माण हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से सटे किशाऊ क्षेत्र में किया जाना प्रस्तावित है। परियोजना से लगभग 422 मेगावाट बिजली उत्पादन होने का अनुमान है। बताया जा रहा है कि पूर्व में हुए समझौते के तहत परियोजना लागत में हिमाचल प्रदेश को भी हिस्सेदारी देनी थी, लेकिन अब राज्य सरकार के अनुसार इस शर्त को हटाकर पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किए जाने का रास्ता साफ हो गया है।
इस बीच मजदूर नेता प्रदीप चौहान ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि किशाऊ बांध परियोजना सिरमौर और आसपास के क्षेत्रों के लिए विकास की नई संभावनाएं लेकर आएगी। उन्होंने कहा कि परियोजना के निर्माण से हजारों युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। प्रदीप चौहान ने उम्मीद जताई कि परियोजना में प्रभावित परिवारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाएगी।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे प्रदेश सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सुक्खू के प्रयासों की चर्चा भी हो रही है। सरकार का दावा है कि इससे भविष्य में प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी और ऊर्जा क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे।
वहीं राज्य सरकार द्वारा जल विद्युत परियोजनाओं पर लगाए गए सेस को भी हिमाचल के राजस्व बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। हालांकि यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।
सरकार का यह भी कहना है कि शिक्षा, सामाजिक कल्याण और अनाथ बच्चों के उत्थान जैसे क्षेत्रों में भी कई सुधारात्मक कदम उठाए गए हैं। आने वाले वर्षों में इन योजनाओं के परिणाम और अधिक स्पष्ट रूप से सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।