
सफलता की कहानी
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वन स्टॉप सेंटर की प्रभावी काउंसलिंग से बसा टूटता परिवार, खुशहाल दांपत्य जीवन की लौ फिर जली
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संवाद, समझाइश और संवेदनशील परामर्श से बदली फरीदा (परिवर्तित नाम) की जिंदगी
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महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत संचालित वन स्टॉप सेंटर, विदिशा केवल संकटग्रस्त महिलाओं को कानूनी, मनोवैज्ञानिक एवं सामाजिक सहायता ही नहीं प्रदान कर रहा, बल्कि संवेदनशील काउंसलिंग और समन्वित प्रयासों के माध्यम से कई परिवारों के जीवन में नई उम्मीद भी जगा रहा है। ऐसी ही एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी है फरीदा (परिवर्तित नाम) की, जिनके वैवाहिक जीवन में आई दूरियों को वन स्टॉप सेंटर की प्रभावी काउंसलिंग ने समाप्त कर दिया।
फरीदा अपनी माता के साथ वन स्टॉप सेंटर पहुंचीं। वह मानसिक रूप से काफी व्यथित और चिंतित थीं। सेंटर के परामर्शदाताओं ने पहले उन्हें सहज महसूस कराया और धैर्यपूर्वक उनकी पूरी बात सुनी। फरीदा ने बताया कि उनकी शादी को दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन उनके पति अकरम उनसे बातचीत नहीं करते, उन्हें समय नहीं देते और किसी अन्य महिला से निकटता के कारण दोनों के बीच रिश्ते में काफी दूरी आ गई है। उन्होंने बताया कि वह अपने पति के साथ सामान्य और खुशहाल जीवन जीना चाहती हैं, लेकिन परिस्थितियां इसके विपरीत हैं।
वन स्टॉप सेंटर की टीम ने फरीदा को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या का समाधान संवाद और समझाइश के माध्यम से निकालने का पूरा प्रयास किया जाएगा। इसके बाद अकरम को सेंटर बुलाकर दोनों पक्षों की बात अलग-अलग और फिर संयुक्त रूप से सुनी गई। काउंसलिंग के दौरान अकरम ने बताया कि वैवाहिक जीवन में तनाव का एक बड़ा कारण ससुराल पक्ष का अत्यधिक हस्तक्षेप रहा है, जिससे पति-पत्नी के बीच लगातार विवाद होते रहे। दूसरी महिला से संबंध के विषय में पूछे जाने पर उन्होंने स्वीकार किया कि पहले उनकी दोस्ती थी, लेकिन अब वह पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
वन स्टॉप सेंटर के परामर्शदाताओं ने दोनों को धैर्यपूर्वक समझाया कि किसी भी वैवाहिक संबंध की मजबूती आपसी विश्वास, सम्मान और संवाद पर निर्भर करती है। दोनों पक्षों को परिवार में सामंजस्य बनाए रखने, एक-दूसरे की भावनाओं को समझने तथा अनावश्यक हस्तक्षेप से बचने की सलाह दी गई। काउंसलिंग का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला। अकरम ने आश्वासन दिया कि वह भविष्य में अपनी पत्नी को शिकायत का कोई अवसर नहीं देंगे तथा उनका पूरा सम्मान और सहयोग करेंगे। इसके बाद दोनों को आपसी सहमति और विश्वास के साथ वन स्टॉप सेंटर से विदा किया गया।
कुछ समय बाद वन स्टॉप सेंटर द्वारा दोनों से पुनः संपर्क कर उनकी स्थिति की जानकारी ली गई। फरीदा ने बताया कि अब उनके वैवाहिक जीवन में पहले जैसी परेशानियां नहीं हैं। उनके पति अकरम उनका पूरा सहयोग करते हैं। वर्तमान में वह गर्भवती हैं और अकरम उनकी देखभाल पूरी जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अन्य महिला से बातचीत पूरी तरह बंद हो चुकी है तथा माता-पिता के कारण होने वाले विवाद भी समाप्त हो गए हैं। आज फरीदा और अकरम आपसी विश्वास, प्रेम और सम्मान के साथ सुखद दांपत्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि समय पर सही परामर्श, संवेदनशील सुनवाई और सकारात्मक संवाद से कई पारिवारिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। वन स्टॉप सेंटर, विदिशा का यह प्रयास एक परिवार को टूटने से बचाने और उसे फिर से खुशहाल बनाने में सफल रहा, जो अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। #vidisha #JansamparkMP