
उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ जननेता हीरा सिंह बिष्ट का निधन, हृदयाघात से ली अंतिम सांस
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति के वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व कैबिनेट मंत्री और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के अग्रणी सेनानी हीरा सिंह बिष्ट का हृदयाघात से निधन हो गया। उनके निधन से प्रदेश की राजनीति और सामाजिक जीवन में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को उत्तराखंड की राजनीति में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनका अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर 1 बजे नालापानी चौक स्थित श्मशान घाट पर किया जाएगा।
हीरा सिंह बिष्ट ने अपना पूरा जीवन जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों, श्रमिकों, युवाओं और उत्तराखंड के विकास के लिए समर्पित किया। छात्र जीवन से ही वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष रहने के बाद उन्होंने अधिवक्ता के रूप में भी अपनी पहचान बनाई और बाद में सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
वे उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे और पृथक राज्य की मांग को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1985 में पहली बार देहरादून विधानसभा से विधायक चुने गए। इसके बाद 2002 में राजपुर और 2014 में डोईवाला विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए। वे तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में परिवहन, श्रम एवं तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री भी रहे।
अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने तकनीकी शिक्षा, पॉलिटेक्निक संस्थानों के विस्तार, श्रमिक कल्याण, परिवहन व्यवस्था, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय, देहरादून आईएसबीटी, वॉल्वो बस सेवा और खेलों के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया। वे इंटक उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष तथा क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे।
अपनी सादगी, स्पष्टवादिता, ईमानदारी और जनसरोकारों के कारण हीरा सिंह बिष्ट सभी राजनीतिक दलों में समान रूप से सम्मानित थे। उल्लेखनीय है कि शनिवार शाम 4 बजे उन्हें इंटक की बैठक की अध्यक्षता करनी थी, लेकिन उससे पहले ही शुक्रवार रात हृदयाघात से उनका निधन हो गया।
उनके निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और श्रमिक संगठनों सहित विभिन्न वर्गों के लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया।