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तमिलनाडु में धान पर बोनस की घोषणा हो गई है, लेकिन सवाल सिर्फ बोनस का नहीं है। असली सवाल यह है कि किसान की पूरी उपज कितनी मात्रा में सरकारी MSP पर खरीदी जा रही है? तमिलनाडु सरकार ने धान की उन्नत किस्म पर 286 रुपये और हाइब्रिड धान पर 159 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा की है। इसके बाद उन्नत किस्म के लिए कुल खरीद मूल्य लगभग 2,750 रुपये और हाइब्रिड के लिए लगभग 2,600 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित होने की बात सामने आई है। बोनस की घोषणा सुनकर निश्चित रूप से किसानों को राहत की उम्मीद होती है। लेकिन अगर किसान की पूरी उपज MSP और बोनस पर खरीदी ही न जाए, तो सिर्फ कागज पर घोषित ज्यादा कीमत का वास्तविक फायदा किसान तक कितना पहुंचेगा, यह बड़ा सवाल है। इसे हरियाणा और तमिलनाडु के उदाहरण से समझिए। हरियाणा में लगभग 100 प्रतिशत धान की खरीद MSP पर होने का दावा किया गया है। यहां किसान की उपज सरकारी खरीद व्यवस्था में पहुंचती है, भले ही कुछ मामलों में किसान को प्रति क्विंटल 100 से 400 रुपये तक कट का सामना करना पड़े। दूसरी तरफ तमिलनाडु में औसतन 55 से 60 प्रतिशत धान की ही MSP पर खरीद होने की बात कही गई है। यानी किसान के सामने सिर्फ MSP की दर महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उसकी कुल उपज में से कितनी मात्रा सरकार खरीद रही है। अब एक उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए तमिलनाडु के एक किसान को एक एकड़ में 30 क्विंटल धान की पैदावार हुई। अगर इसमें से 18 क्विंटल धान सरकारी खरीद में चला गया और बाकी 12 क्विंटल किसान को खुले बाजार में बेचना पड़ा, तो सरकारी खरीद से मिलने वाली रकम और खुले बाजार की कीमत के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। दिए गए उदाहरण के अनुसार 18 क्विंटल सरकारी खरीद से लगभग 45,000 रुपये और 12 क्विंटल खुले बाजार से लगभग 18,000 रुपये मिले। यानी कुल आमदनी करीब 63,000 रुपये प्रति एकड़ बैठती है। यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी। पिछले वर्ष सरकारी खरीद में लगभग 2,500 रुपये की दर बताई गई थी, जबकि खुले बाजार में हाइब्रिड धान का भाव लगभग 1,500 से 1,600 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया। इसका मतलब है कि जिस धान को किसान MSP पर नहीं बेच पाता, उसे खुले बाजार में काफी कम कीमत मिल सकती है। अब इसी उत्पादन को हरियाणा के उदाहरण से समझिए। मान लीजिए हरियाणा के किसान को भी 30 क्विंटल धान की पैदावार हुई। अगर पूरी 30 क्विंटल सरकारी खरीद में चली गई और MSP 2,389 रुपये प्रति क्विंटल रहा, तो 30 क्विंटल की कुल कीमत 71,670 रुपये बनती है। यदि इसमें 200 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती का उदाहरण लिया जाए, तो किसान को लगभग 65,670 रुपये प्रति एकड़ मिलने की बात कही गई है। लेकिन यहां भी एक सवाल है। क्या 30 क्विंटल प्रति एकड़ वास्तव में हर किसान की औसत पैदावार है या यह अधिकतम/उच्च पैदावार का उदाहरण है? क्योंकि किसान की वास्तविक आय का हिसाब लगाते समय औसत उत्पादन, लागत, कटौती और वास्तविक बिक्री मात्रा को साथ में देखना जरूरी है। दूसरी तरफ यह भी दावा किया गया है कि हरियाणा में कुल पैदावार की तुलना में 20 से 25 प्रतिशत ज्यादा धान सरकारी खरीद में दर्ज हो जाता है। अगर इस अतिरिक्त खरीद को अलग कर दिया जाए, तो किसान पर लगने वाली कथित 200 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती का सवाल भी अलग तरीके से देखा जा सकता है। अब तमिलनाडु के आंकड़े पर आइए। तमिलनाडु में लगभग 74 से 80 लाख टन धान उत्पादन होने की बात कही गई है, जबकि पिछले पांच वर्षों में औसतन लगभग 42.5 लाख टन की सरकारी खरीद का आंकड़ा बताया गया है। अगर उत्पादन और सरकारी खरीद के इन आंकड़ों को एक साथ देखें, तो साफ है कि किसान की पूरी उपज सरकारी खरीद व्यवस्था में नहीं पहुंचती। इसलिए सिर्फ यह कहना कि सरकार ने MSP के ऊपर 159 या 286 रुपये बोनस दे दिया, किसान की वास्तविक आय की पूरी तस्वीर नहीं बताता। किसान के लिए असली सवाल यह होना चाहिए कि उसे अपनी कुल उपज का कितना हिस्सा MSP या बोनस सहित सरकारी निर्धारित कीमत पर बेचने का अवसर मिलता है। मान लीजिए सरकार ने कीमत 2,750 रुपये प्रति क्विंटल तय कर दी, लेकिन किसान की 30 क्विंटल उपज में से केवल 18 क्विंटल ही सरकारी खरीद में गई और बाकी 12 क्विंटल उसे खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ी, तो कागज पर दिखाई देने वाली 2,750 रुपये की कीमत पूरी 30 क्विंटल उपज पर लागू नहीं होगी। यही वजह है कि किसान नीति की चर्चा सिर्फ MSP की घोषणा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। MSP कितनी है? बोनस कितना है? सरकारी खरीद कितनी है? कुल उत्पादन कितना है? खुले बाजार में किसान को कितनी कीमत मिल रही है? और सबसे महत्वपूर्ण, किसान की पूरी उपज खरीदने की व्यवस्था कितनी मजबूत है? इन सभी सवालों को एक साथ देखने की जरूरत है। किसान के लिए 100 रुपये अधिक MSP की घोषणा से ज्यादा महत्वपूर्ण कई बार यह होता है कि उसकी पूरी उपज निर्धारित कीमत पर खरीदी जाए। अगर सरकारी खरीद सीमित है और बाकी उपज खुले बाजार में औने-पौने दाम पर बिकती है, तो घोषित MSP या बोनस का वास्तविक लाभ सीमित रह सकता है। इसलिए तमिलनाडु में बोनस की घोषणा का स्वागत करते हुए भी यह सवाल उठना जरूरी है कि क्या सरकार खरीद का दायरा भी बढ़ाएगी? अगर किसान को वास्तव में राहत देनी है तो सिर्फ बोनस घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा। खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ानी होगी, समय पर खरीद करनी होगी, भुगतान समय पर करना होगा और किसानों को खुले बाजार में मजबूरी में कम कीमत पर धान बेचने से बचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनानी होगी। क्योंकि किसान की कमाई सिर्फ उत्पादन से तय नहीं होती। किसान की कमाई इस बात से तय होती है कि वह अपनी पूरी उपज किस कीमत पर बेच पाता है। इसलिए बहस यह नहीं होनी चाहिए कि तमिलनाडु ने कितना बोनस दिया और हरियाणा में MSP कितनी है। असली बहस यह होनी चाहिए कि दोनों राज्यों में किसान की कुल उपज में से कितनी मात्रा सरकारी खरीद में जाती है और किसान को वास्तविक रूप से प्रति क्विंटल कितना मिलता है। अन्नदाता को सिर्फ घोषणा नहीं चाहिए। उसे अपनी पूरी उपज के लिए भरोसेमंद बाजार, पारदर्शी खरीद, उचित मूल्य और समय पर भुगतान चाहिए। आपके हिसाब से किसान के लिए क्या ज्यादा जरूरी है-MSP पर बड़ा बोनस या पूरी उपज की MSP पर खरीद? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए और इस पोस्ट को उन किसानों तक पहुंचाइए, जिनके लिए धान की कीमत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि पूरे साल की मेहनत और परिवार की आय है। #धान #MSP #किसान #तमिलनाडु #हरियाणा

Mariahu, Jaunpur | Aug 11, 2026

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Delegate डालने से पहले ये जानकारी जरूर जान लें #Delegate #DelegateInsecticide #Spinetoram #Spinetoram117SC

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Mariahu, Jaunpur | Aug 11, 2026

🌳 खेत की मेड़ खाली क्यों छोड़ें? इसे भविष्य की अतिरिक्त आय का साधन बनाइए! 💰
अगर आपके पास 2–3 एकड़ जमीन है और आप हर साल गेहूं, धान या सब्जियां उगाते हैं, तो खेत की मेड़ यानी Boundary को आपने कितनी बार income source की तरह देखा है?
अधिकतर किसान मेड़ को खाली छोड़ देते हैं। लेकिन सही planning के साथ इसी जगह पर African Mahogany और Malabar Neem जैसे commercial timber trees लगाए जा सकते हैं।
🌱 Boundary Agroforestry के फायदे:
✅ मुख्य फसल का क्षेत्र बचाते हुए अतिरिक्त पेड़
✅ लंबे समय के लिए Timber Asset तैयार
✅ खेत की खाली मेड़ का बेहतर उपयोग
✅ भविष्य में लकड़ी से अतिरिक्त आय की संभावना
✅ सही pruning और spacing से crop पर अनावश्यक छाया को कम किया जा सकता है
लेकिन ध्यान रखें—पेड़ लगाना सिर्फ पौधा लगाने का काम नहीं है। सही species, spacing, direction, pruning, irrigation और स्थानीय बाजार की जानकारी बेहद जरूरी है।
और सबसे महत्वपूर्ण बात: सोशल मीडिया पर महोगनी से करोड़ों की कमाई के जो दावे किए जाते हैं, उन्हें गारंटी न समझें। वास्तविक कमाई पेड़ की उम्र, तने के आकार, लकड़ी की गुणवत्ता, स्थानीय बाजार भाव, कटाई और परिवहन लागत पर निर्भर करती है।
⚠️ पेड़ लगाने से पहले अपने राज्य में कटाई, परिवहन और बिक्री से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लें और पौधे विश्वसनीय नर्सरी से ही खरीदें।
🌾 आप अपने खेत की मेड़ पर कौन-सा पेड़ लगाना पसंद करेंगे—महोगनी या मालाबार नीम?
कमेंट में जरूर बताइए। 👇
#MahoganyFarming #MalabarNeem #Agroforestry #BoundaryPlantation #TimberFarming #महोगनी #मालाबारनीम #एग्रोफॉरेस्ट्री #खेती #किसान #IndianFarming #Agriculture #TreeFarming

🌳 खेत की मेड़ खाली क्यों छोड़ें? इसे भविष्य की अतिरिक्त आय का साधन बनाइए! 💰 अगर आपके पास 2–3 एकड़ जमीन है और आप हर साल गेहूं, धान या सब्जियां उगाते हैं, तो खेत की मेड़ यानी Boundary को आपने कितनी बार income source की तरह देखा है? अधिकतर किसान मेड़ को खाली छोड़ देते हैं। लेकिन सही planning के साथ इसी जगह पर African Mahogany और Malabar Neem जैसे commercial timber trees लगाए जा सकते हैं। 🌱 Boundary Agroforestry के फायदे: ✅ मुख्य फसल का क्षेत्र बचाते हुए अतिरिक्त पेड़ ✅ लंबे समय के लिए Timber Asset तैयार ✅ खेत की खाली मेड़ का बेहतर उपयोग ✅ भविष्य में लकड़ी से अतिरिक्त आय की संभावना ✅ सही pruning और spacing से crop पर अनावश्यक छाया को कम किया जा सकता है लेकिन ध्यान रखें—पेड़ लगाना सिर्फ पौधा लगाने का काम नहीं है। सही species, spacing, direction, pruning, irrigation और स्थानीय बाजार की जानकारी बेहद जरूरी है। और सबसे महत्वपूर्ण बात: सोशल मीडिया पर महोगनी से करोड़ों की कमाई के जो दावे किए जाते हैं, उन्हें गारंटी न समझें। वास्तविक कमाई पेड़ की उम्र, तने के आकार, लकड़ी की गुणवत्ता, स्थानीय बाजार भाव, कटाई और परिवहन लागत पर निर्भर करती है। ⚠️ पेड़ लगाने से पहले अपने राज्य में कटाई, परिवहन और बिक्री से जुड़े नियमों की जानकारी जरूर लें और पौधे विश्वसनीय नर्सरी से ही खरीदें। 🌾 आप अपने खेत की मेड़ पर कौन-सा पेड़ लगाना पसंद करेंगे—महोगनी या मालाबार नीम? कमेंट में जरूर बताइए। 👇 #MahoganyFarming #MalabarNeem #Agroforestry #BoundaryPlantation #TimberFarming #महोगनी #मालाबारनीम #एग्रोफॉरेस्ट्री #खेती #किसान #IndianFarming #Agriculture #TreeFarming

Mariahu, Jaunpur | Aug 11, 2026

आम के पेड़ में खाद कब और कितनी डालें? तुड़ाई के बाद पूरी देखभाल #आमकीखेती #आमकीफसल #आमकाबाग #आमकीतुड़ाई #MangoFarming

आम के पेड़ में खाद कब और कितनी डालें? तुड़ाई के बाद पूरी देखभाल #आमकीखेती #आमकीफसल #आमकाबाग #आमकीतुड़ाई #MangoFarming

Mariahu, Jaunpur | Aug 10, 2026