
पांचना बांध की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर किसान महापंचायत अनिश्चितकाल के लिए जारी
ग्राम खण्डीप में चल रही किसान महापंचायत के तहत दिनांक 06 जून 2026 को सभा स्थल पर गंगापुर सिटी विधायक रामकेश मीना, टोडाभीम विधायक घनश्याम महर, पूर्व विधायक करौली लाखनसिंह मीना, पांचना कमाण्ड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष बटुआ पटेल एवं समिति के कार्यकारिणी सदस्यों सहित सर्व समाज के पंच-पटेल, युवा साथी, महिलाएं, बच्चे एवं हजारों किसान उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर किसानों के हक के पानी की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को मजबूती प्रदान की तथा संघर्ष को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।
आंदोलन को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए पांचना कमाण्ड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति द्वारा विभिन्न गांवों को क्रमवार जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसी क्रम में दिनांक 06 जून 2026 को प्रातः 10ः00 बजे से 07 जून 2026 को प्रातः 10ः00 बजे तक सभा स्थल पर रुकने एवं व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी ग्राम किशोरपुर को सौंपी गई, जिसका निर्वहन ग्राम किशोरपुर के ग्रामीणों एवं किसानों ने उत्साहपूर्वक और अनुशासित ढंग से किया। ग्राम किशोरपुर के किसान डी.जे. की धुन पर जुलूस के रूप में सभा स्थल तक पहुंचे और अपनी जिम्मेदारी संभाली।
इसके पश्चात दिनांक 07 जून 2026 को प्रातः 10ः00 बजे से 08 जून 2026 को प्रातः 10ः00 बजे तक 24 घंटे के लिए ग्राम खेड़ली-बगलाई के ग्रामीण एवं किसान आंदोलन स्थल की जिम्मेदारी संभालेंगे। कमाण्ड क्षेत्र के किसानों में महापंचायत एवं धरने को लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। क्षेत्र का प्रत्येक गांव अपनी बारी आने पर आंदोलन की जिम्मेदारी संभालने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है।
महापंचायत के दौरान लोक कलाकार झण्डू शेखपुरा, धबले लालारामपुरा, राजू रिछोटी एवं अन्य कलाकारों ने अपनी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से किसानों का उत्साहवर्धन किया। वहीं सभा स्थल पर पेयजल, भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का सफल संचालन ग्राम खण्डीप के पंच-पटेलों एवं युवा साथियों द्वारा किया गया।
विधायक रामकेश मीना ने कहा कि पांचना बांध से कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग किसानों के जीवन, आजीविका और भविष्य से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसानों को उनके हक का पानी मिलने तक यह किसान महापंचायत एवं आंदोलन अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। किसानों के अधिकारों की इस लड़ाई को किसी भी स्थिति में कमजोर नहीं पड़ने दिया जाएगा और जब तक सरकार किसानों की मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।