
हिंदू-मुस्लिम मिलकर मना रहे मुहर्रम
खेसर में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: मंदिर के बगल में सजा इमामबाड़ा,
✨शशिभूषण भारती की रिपोर्ट
पंचायत सूत्र खेसर बांका
बांका के खेसर और इसके आस-पास के क्षेत्रों में इस बार भी मुहर्रम का त्योहार हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहतरीन मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ की सबसे अनूठी और खूबसूरत बात यह है कि मंदिर के ठीक बगल में ही इमामबाड़ा स्थित है, जहाँ मुहर्रम का ताजिया पूरी अकीदत के साथ रखा गया है
एक तरफ माँ दुर्गा का मंदिर है और ठीक दूसरी तरफ रोशनी से जगमगाता हुआ ताजिया और इमामबाड़ा है। यह नजारा सांप्रदायिक सौहार्द की एक अटूट कहानी बयां करता है।
साझा भागीदारी और अटूट भाईचारा
इस मौके पर दोनों समुदायों के लोग आपस में मिल-जुलकर ताजिया का जुलूस निकालते हैं और अमन-चैन व शांति का संदेश देते हैं। ताजिया के जुलूस में मुस्लिम भाइयों के साथ-साथ हिंदू समुदाय के लोग भी कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं।
जुलूस के दौरान युवाओं द्वारा लाठी-डंडे और तलवारबाजी जैसे पारंपरिक करतब दिखाए जाते हैं, जिसमें दोनों धर्मों के युवा बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इसके साथ ही, जुलूस के मार्गों पर हिंदू परिवारों द्वारा मुस्लिम भाइयों के लिए शरबत, मलीदा और अन्य प्रसाद की विशेष व्यवस्था की जाती है, जो यहाँ के आपसी प्रेम को और गहरा करती है।
कमेटी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता
इस पूरे आयोजन को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराने के लिए मुहर्रम कमेटी मुस्तैदी से जुटी हुई है। कमेटी के मुख्य पदाधिकारी और सक्रिय सदस्य
अध्यक्ष: मोहम्मद नौशाद
उपाध्यक्ष: मोहम्मद सिडू
कोषाध्यक्ष: मोहम्मद हिमायूं
वरिष्ठ कार्यकर्ता: मोहम्मद पप्पू
सक्रिय कार्यकर्ता: महबूब, लीना, जुगनू, अख्तर, तनवीर आदि।
खेसर का यह इमामबाड़ा और मंदिर का यह अद्भुत मेल समाज को यह संदेश देता है कि त्योहार चाहे कोई भी हो, आपसी मोहब्बत और भाईचारा ही सबसे बड़ा धर्म है। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के सहयोग से पूरा क्षेत्र अमन और भाईचारे के माहौल में डूबा हुआ है।