नई दिल्ली,सुप्रीम कोर्ट ने उस फैसले पर पुनर्विचार की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है, जिसमें कहा गया था कि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति अगर हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा कोई अन्य धर्म अपनाता है, तो धर्म परिवर्तन के समय से ही उसका एससी का दर्जा खत्म हो जाएगा।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और मनमोहन की पीठ ने कहा कि 24 मार्च, 2026 को दिए गए फैसले में कोई ऐसी स्पष्ट गलती नहीं है, जिसके आधार पर उसे बदला जाए।
इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट का मार्च 2026 का निर्णय अंतिम रूप से प्रभावी रहेगा। इसका अर्थ है कि अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति यदि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म छोड़कर अन्य धर्म अपनाता है, तो धर्म परिवर्तन की तिथि से उसका एससी दर्जा समाप्त माना जाएगा और वह एससी आरक्षण से मिलने वाले संवैधानिक लाभों का पात्र नहीं रहेगा।
Namkum, Ranchi | Jul 28, 2026