यह तस्वीर और भाजपा को वाय वाय अनगिनत सवाल खड़े करती हो लेकिन यह सवाल जरूर मंथन योग्य है कि क्या आर एस एस की सोच से तराशा गया व्यक्तित्व आखिर आर एस एस की धुरबिरोधी सोच का हिस्सा बनने जा रहा है, यह आर एस एस की पद्धति और भाजपा की सोच पर कहीं आघात तो नहीं, या फिर आज की अबसर वादी राजनीति के आगे सिद्धांत की बैल्यू शून्य हो चुकी है, मेरे हिसाब से सोचना RSS और बीजेपी को भी चाहिए कि उनकी बैचारिक क्षमता इतनी कमजोर क्यों हो रही,
Budaun, Budaun | Oct 21, 2026