
हुनर से उड़ान: आईटीआई से ट्रेनिंग ऑफिसर बनने वाली बेटियों की सफलता की कहानी
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"हुनरमंद नारी ही सशक्त भारत का आधार है।" आज की नारी केवल सिलाई-कढ़ाई या पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास ने महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से अलग-अलग ट्रेड में प्रशिक्षण लेकर आकांक्षा, सविता, नाज़िश, कीर्ति, पूनम, सोनम, और श्वेता ने न
केवल अपने सपनों को साकार किया, बल्कि सरकारी क्षेत्र में ट्रेनिंग ऑफिसर का पद हासिल कर महिला सशक्तिकरण की एक मिसाल कायम की है। विभिन्न ट्रेडों में अपनी धाक जमाने वाली वीरांगनाएँ इन पाँचों महिलाओं ने यह साबित कर दिया कि कोई भी तकनीकी ट्रेड केवल पुरुषों के लिए नहीं होता। अपनी लगन और कड़ी मेहनत के बल पर इन्होंने अपनी-अपनी फील्ड में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
आकांक्षा : टर्नर ट्रेड को पारंपरिक रूप से भारी मशीनों, लेथ मशीन और लेबर-इंटेन्सिव काम से जोड़कर देखा जाता है। आकांक्षा ने इस चुनौती को स्वीकार किया और लेथ मशीन पर सटीक कटिंग, शेपिंग और मेटल कटिंग की कला में महारत हासिल की। अपनी इसी निपुणता के दम पर वे आज आईटीआई में टर्नर ट्रेड की ट्रेनिंग ऑफिसर बनकर नए छात्रों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
सविता : कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट ट्रेड से शुरुआत करने वाली कीर्ति ने डिजिटल युग की ज़रूरतों को समझा। उन्होंने कोडिंग और आईटी स्किल्स में महारत हासिल की और आज वे भावी पीढ़ी को डिजिटल रूप से सक्षम बना रही हैं।
नाज़िश और कीर्ति : वायर डायग्राम, बिजली के सर्किट, मोटर्स और भारी इलेक्ट्रिकल पैनलों के बीच काम करते हुए नाज़िश ने इलेक्ट्रिशियन ट्रेड में अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्होंने अपनी तकनीकी दक्षता के बल पर ट्रेनिंग ऑफिसर का पद हासिल किया और आज वे भावी इलेक्ट्रिशियन्स को बिजली की बारीकियां और सुरक्षा नियम सिखा रही हैं।
पूनम, सोनम, और श्वेता : ट्रेड को अक्सर कठिन माना जाता है, लेकिन इन महिलाओं ने इस धारणा को तोड़ दिया। टूल्स, मेजरमेंट और असेंबलिंग के हर क्षेत्र में उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की और ट्रेनिंग ऑफिसर का पद हासिल संघर्ष से सफलता तक: ट्रेनिंग ऑफिसर बनने का सफर आईटीआई पूरी करने के बाद इनका सफर आसान नहीं था। प्रतियोगिता परीक्षा, व्यावहारिक कौशल परीक्षा और साक्षात्कारों को पास करते हुए इन्होंने आईटीआई में ट्रेनिंग ऑफिसर की प्रतिष्ठित नौकरी प्राप्त की।
ट्रेनिंग ऑफिसर का महत्व:
एक ट्रेनिंग ऑफिसर न केवल विद्यार्थियों को थ्योरी और प्रैक्टिकल का ज्ञान देता है, बल्कि उन्हें उद्योग की ज़रूरतों के अनुसार तैयार भी करता है। महिला सशक्तिकरण का नया दौर आकांक्षा, कीर्ति, नाज़िश, पूनम और सोनम की यह सफलता दर्शाती है कि आर्थिक स्वावलंबन: तकनीकी शिक्षा महिलाओं को बहुत कम समय और कम खर्च में आत्म-निर्भर बनाती है।
प्रेरणा का स्रोत: आज जब ये पाँचों अधिकारी क्लासरूम में छात्रों को पढ़ाती हैं, तो उन्हें देखकर सैकड़ों अन्य लड़कियों को भी कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिलती है। #vidisha #JansamparkMP