
डॉक्टर हितिक्षा व्यास। "हौसलों के दम पर ही आसमान को नापा जाता है…"
आज मेरी आंखें नम हैं, लेकिन यह खुशी के आंसू हैं।
कहते हैं कि डॉक्टर बनने के लिए केवल बच्चे ही नहीं, बल्कि माता-पिता भी वर्षों तक समय की भट्टी में तपते हैं। अनगिनत त्याग, अनगिनत प्रार्थनाएँ, अनगिनत जागी हुई रातें… और फिर एक दिन वह क्षण आता है, जब सपने हकीकत बन जाते हैं।
18 मई 2002 को जब मेरी बिटिया हितीक्षा व्यास ने जन्म लिया था, तब मन में एक सपना था कि वह डॉक्टर बने। आज उसकी अथक मेहनत, लगन और समर्पण ने उस सपने को साकार कर दिया। अब वह आज से डॉक्टर हितिक्षा व्यास कहलाएंगी।
आज उसका बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसन राजस्थान में स्थायी पंजीकरण हो गया। अब उसे केवल "डॉक्टर" कहलाने का अधिकार ही नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता की सेवा करने, रोगियों का उपचार करने और उन्हें नया जीवन देने का पवित्र दायित्व भी मिला है।
एक पिता के लिए इससे बड़ा गर्व और सौभाग्य शायद ही कोई हो सकता है।
हे बाबा महाकाल, मेरी बेटी के हाथों में ऐसी कृपा देना कि उसके स्पर्श से मरीजों को विश्वास मिले, उसकी विद्या से रोग दूर हों और उसकी सेवा से मानवता का कल्याण हो। उसे सदैव विनम्र, संवेदनशील और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित बनाए रखना।
बिटिया, आज तुमने केवल अपना सपना पूरा नहीं किया, बल्कि अपने माता-पिता का जीवन भी सार्थक कर दिया।
ईश्वर तुम्हें दीर्घायु, यश, सेवा का भाव और सदैव सफलता प्रदान करें।
गर्व है तुम पर, मेरी बेटी…!
तुम्हारे मम्मी और पापा।
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