वाह मेरे शेरों…! जिस जगह खाते हो, उसी में छेद करते हो; जिस घर के साये में रहते हो, उसी को डसने से भी नहीं चूकते।
आस्तीन के साँपों, क्या आपका ज़मीर आपको इन हरकतों की इजाजत देता है? अगर हाँ, तो फिर समाज आपको क्या कहे—यह सोचने की जरूरत है।
घटना सिकंदरा की है। ऐसे लोगों से सावधान रहना बेहद जरूरी है, जो अपने ही घर और अपने ही लोगों के खिलाफ खड़े हो जाते हैं।
आस्तीन के साँपों से बचकर रहिए, क्योंकि इनका डंक सबसे ज्यादा अपनों को ही घायल करता है।