बिहार के बक्सर जिले के कुकुढ़ा गांव में दशहरे के बाद भी रावण जिंदा रहता है। यहां करीब 250 साल पुरानी परंपरा के अनुसार, रावण वध विजयादशमी पर नहीं, बल्कि शरद पूर्णिमा के बाद किया जाता है। गांव में 15 से 17 दिनों तक रामलीला का मंचन होता है। इसमें भगवान राम के वनवास, सीता हरण, हनुमान की लंका यात्रा और राम-रावण युद्ध जैसे प्रसंग दिखाए जाते हैं। खास बात यह है कि रामलीला गांव के चार अलग-अलग स्थानों पर आयोजित होती है। इस परंपरा की शुरुआत कब और क्यों हुई, इसकी सटीक जानकारी आज भी उपलब्ध नहीं है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव की मिसाल भी पेश करता है।