
पाटलिपुत्र, वैशाली और मगध साम्राज्य की धरती... पब्लिक सब देख रही है..राजद नेता नवनीत कुमार झा
राष्ट्रीय जनता दल की वरिष्ठ नेता व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता व पूर्व विधानसभा प्रत्याशी नवनीत कुमार झा ने बताया है कि कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिन्हें अनदेखा भी नहीं किया जा सकता है। उन्होंने बताया है कि दो घटनाएं पिछले दो दिनों से लगातार जेहन में घूम रही हैं। एक वैशाली के पत्रकार मनीष कुमार सिंह से जुड़ी और दूसरी बक्सर - आरा वासी भरत तिवारी से संबंधित।
राजद नेता श्री झा ने कहा है कि भरत तिवारी के मामले पर अंतिम निर्णय जनता और न्यायिक प्रक्रिया पर छोड़ा जाना चाहिए क्योंकि इस विषय पर कुछ भी लिखते ही बहस मुद्दे से भटककर जातीय आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच जाएगी । इसलिए फिलहाल तिवारी का मामला छोड़ते हुए हाजीपुर के मनीष कुमार सिंह के मामले पर आता हूं। लेकिन कुछ सवाल हैं, जिन्हें अनदेखा भी नहीं किया जा सकता।
पत्रकार मनीष कुमार सिंह के मामले जिस तरह पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसके मुंह में रात्रि नौ बजे ब्रेथ एनालाइजर घुसेर कर बहादुरी दिखायी वो वर्णन करने लायक है। ऐसी घटना ने पत्रकारिता जगत को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बिहार में वर्ष 2016 से शराबबंदी लागू है। दस वर्षों के दौरान पहली बार ऐसा दृश्य देखने को मिला कि पुलिस रात में एक पत्रकार के घर पहुंची, घर के भीतर पूछताछ हुई और कैमरे के सामने ब्रेथ एनालाइजर से जांच की गई।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पत्रकार से उसका नाम, पिता का नाम और घर के मालिक का नाम पूछा जा रहा है। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत रूप से मनीष कुमार सिंह को नहीं जानता, न ही उनके मामले के तथ्यों पर कोई टिप्पणी कर रहा हूं। यदि किसी ने कानून तोड़ा है तो कानून अपना काम करे। लेकिन सवाल प्रक्रिया, गरिमा और समानता का होना चाहिए।
उन्होंने बताया कि क्या यही तरीका हर व्यक्ति के लिए अपनाया जाता है? क्या प्रभावशाली लोगों, बड़े नेताओं और सत्ता से जुड़े लोगों के मामलों में भी ऐसी ही तत्परता और सार्वजनिक कार्रवाई देखने को मिलती है? जिन मामलों में गंभीर आरोप वर्षों से चर्चा में रहते हैं, वहां अक्सर जांच और कार्रवाई की गति इतनी तेज क्यों नहीं दिखती?
उन्होंने कहा कि पत्रकार कोई विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग नहीं हैं। यदि वे दोषी हैं तो कानून उनके खिलाफ भी कार्रवाई करे। लेकिन पत्रकार भी नागरिक हैं और उन्हें भी वही संवैधानिक सम्मान मिलना चाहिए जो किसी अन्य नागरिक को मिलता है।
भरत तिवारी मामले में भी एक सवाल उठता है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में जो दृश्य दिखाई दे रहे हैं, उनमें यह दावा किया जा रहा है कि उसने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण की कोशिश की थी। यदि ऐसा था, तो फिर गोली चलाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस प्रश्न का उत्तर जांच और तथ्यों से ही सामने आएगा।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कानून का राज दिखाई भी दे और महसूस भी हो। कार्रवाई हो, लेकिन निष्पक्ष हो। कानून का भय हो, लेकिन न्याय पर भरोसा उससे भी बड़ा हो। जनता सब देख रही है और अंततः वही तय करती है कि व्यवस्था में न्याय अधिक दिख रहा है या शक्ति का प्रदर्शन।