
उन्नाव से दौड़ी विकास की रफ्तार: 4700 करोड़ की सौगात, 40 मिनट में लखनऊ से कानपुर... लेकिन टोल ने भी बढ़ाई धड़कन
उन्नाव। वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का सपना साकार हो गया। सोमवार को उन्नाव की धरती से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में देश के पहले बैरियर-लेस लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। उद्घाटन के बाद सभी वीआईपी इसी एक्सप्रेसवे से लखनऊ रवाना हुए और यह हाई-स्पीड कॉरिडोर आम जनता के लिए भी खोल दिया गया।
करीब 63 किलोमीटर लंबा और 4,700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह एक्सप्रेसवे सिर्फ सड़क नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और आर्थिक भविष्य की नई धुरी माना जा रहा है। सबसे अहम बात यह है कि इस परियोजना का बड़ा हिस्सा उन्नाव से होकर गुजरता है, जिससे जिले की पहचान अब सिर्फ लखनऊ और कानपुर के बीच का पड़ाव नहीं, बल्कि विकास के कॉरिडोर के रूप में होगी।
अब नहीं जाम का इंतजार, 40 मिनट में मंजिल
अब तक लखनऊ और कानपुर के बीच सफर अक्सर ट्रैफिक जाम की वजह से ढाई से तीन घंटे तक खिंच जाता था। नए एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद यही दूरी महज 40 मिनट में पूरी की जा सकेगी। अधिकतम 120 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से वाहन दौड़ सकेंगे, जबकि सुरक्षा कारणों से दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी।
देश का पहला बैरियर-लेस एक्सप्रेसवे
यह एक्सप्रेसवे तकनीक के मामले में भी देश के लिए मिसाल है। यहां पारंपरिक टोल प्लाजा नहीं होंगे। ANPR कैमरे और फास्टैग तकनीक के जरिए बिना वाहन रोके टोल अपने आप कट जाएगा। दुर्घटना या आपात स्थिति होने पर AI कैमरे तुरंत एनएचएआई कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेंगे, जिससे राहत कार्य में देरी नहीं होगी।
सफर तेज... लेकिन टोल भी तीन गुना
जहां एक्सप्रेसवे यात्रा को आसान बनाएगा, वहीं टोल शुल्क ने भी चर्चा छेड़ दी है। लखनऊ से कानपुर तक कार से सफर करने पर अब 275 रुपये टोल देना होगा, जबकि पुराने मार्ग पर यह शुल्क करीब 95 रुपये था। यानी समय और ईंधन की बचत होगी, लेकिन जेब पर अतिरिक्त भार भी पड़ेगा।
उन्नाव के लिए क्यों है यह गेम चेंजर?
इस एक्सप्रेसवे से उन्नाव को सबसे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। उद्योगों के लिए बेहतर कनेक्टिविटी, निवेश की नई संभावनाएं, लॉजिस्टिक्स में तेजी, रोजगार के अवसर और रियल एस्टेट को नई रफ्तार मिलने की संभावना है। लखनऊ और कानपुर के बीच स्थित उन्नाव अब सिर्फ भौगोलिक नहीं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।
विकास की रफ्तार शुरू, अब उम्मीदों की परीक्षा
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण आधारभूत परियोजनाओं में से एक है। यह तय है कि इससे सफर आसान होगा, लेकिन अब सबसे बड़ी चुनौती होगी—इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सुरक्षा, सुचारु यातायात और आधुनिक व्यवस्थाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखना। अगर यह व्यवस्था सफल रही, तो उन्नाव आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश के विकास मानचित्र पर और अधिक मजबूती से उभरेगा।
Unnao, Unnao | Jul 13, 2026