
आर.टी.आई. के तहत मांगी गई जानकारी में 3 साल की देरी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी पर 25 हजार का जुर्माना
सीतामढ़ी: बिहार सूचना आयोग ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में अत्यधिक विलंब करने पर सीतामढ़ी के असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (सिविल सर्जन) पर 25,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है।
क्या है पूरा मामला
सीतामढ़ी के यदुवंश पंजियार ने स्वास्थ्य विभाग से जिले में पंजीकृत व गैर-पंजीकृत नर्सिंग होम, क्लीनिक और जांच घरों की सूची, प्राइवेट डॉक्टरों का विवरण और गैर-पंजीकृत संस्थानों पर होने वाली कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मांगी थी। आवेदक ने इस संबंध में मई 2023 में द्वितीय अपील दायर की थी, क्योंकि उन्हें समय पर वांछित सूचना नहीं मिली थी।
आयोग की सख्त टिप्पणी
राज्य सूचना आयुक्त प्रकाश कुमार ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि लोक सूचना पदाधिकारी ने लगभग 3 साल की लंबी देरी के बाद 1 अप्रैल 2026 को सूचना उपलब्ध कराई। आयोग ने इस विलंब को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन से स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन उनकी ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
इसे अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही मानते हुए, सूचना आयुक्त ने आर.टी.आई. अधिनियम की धारा-20(1) के तहत 25,000 रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया। आयोग ने जिला पदाधिकारी सीतामढ़ी, कोषागार पदाधिकारी सीतामढ़ी और महालेखाकार, बिहार को इस आदेश के अनुपालन हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।