केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया — चित्रा सरवारा
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत का प्रतीक है। यह उन विद्यार्थियों, युवाओं और नागरिकों की शांतिपूर्ण, संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक लड़ाई की सफलता है, जिन्होंने अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज़ बुलंद की और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखा।
यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि जब जनता संगठित होकर संविधान के दायरे में रहकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करती है, तो सबसे सशक्त सत्ता को भी जनभावनाओं का सम्मान करना पड़ता है। यह केवल एक व्यक्ति के पद छोड़ने का विषय नहीं, बल्कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ की ताकत का प्रमाण है।
मैं उन सभी छात्रों, युवाओं और नागरिकों को बधाई देती हूँ जिन्होंने संयम, धैर्य और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए इस संघर्ष को आगे बढ़ाया। लोकतंत्र की असली शक्ति जनता की जागरूकता, एकजुटता और संवैधानिक तरीकों से किए गए संघर्ष में ही निहित है।
Ambala, Ambala | Jul 25, 2026