
#Chandaulinews ⭕दो मुकदमे, हथियारों का प्रदर्शन और सत्ता के बड़े चेहरों के साथ तस्वीरें… आखिर क्या है अंकित सिंह की कहानी?*
एक तरफ रेप और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ी FIR में नाम...
दूसरी तरफ आयुध अधिनियम से जुड़ा मुकदमा और हथियारों के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो...
और अब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य तथा भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें!
चंदौली में अंकित सिंह का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है।
*लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा सवाल*
आखिर इन तस्वीरों के प्रचार के पीछे उद्देश्य क्या है?
क्या यह केवल राजनीतिक पहुंच दिखाने की कोशिश है?
या सोशल मीडिया पर अपनी प्रभावशाली छवि बनाने की कवायद?
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन से जुड़ा एक वीडियो वायरल हुआ। दावा किया गया कि वीडियो में दिखाई देने वाला व्यक्ति अंकित सिंह है।
इस मामले से जुड़े मुकदमे और वीडियो को लेकर चर्चा अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुई थी कि अंकित सिंह से जुड़ा एक और मामला सामने आया।
दूसरी FIR के अनुसार, एक महिला की शिकायत पर दर्ज मुकदमे में अंकित सिंह का नाम आरोपियों में शामिल है। शिकायत में रेप और जान से मारने की धमकी समेत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
हालांकि FIR में नाम दर्ज होना अपने आप में दोषसिद्धि नहीं है। आरोपों की सत्यता पुलिस की जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती!
अब अंकित सिंह की उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं। इन तस्वीरों के प्रचार के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल और गर्म हो गया है।
अब सवाल तस्वीर खिंचवाने पर नहीं है।
क्योंकि किसी भी सार्वजनिक या राजनीतिक कार्यक्रम में कोई व्यक्ति किसी बड़े नेता के साथ तस्वीर खिंचवा सकता है। केवल तस्वीर के आधार पर किसी नेता पर संरक्षण देने का आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल तब खड़े होते हैं, जब गंभीर आरोपों से जुड़े मुकदमों में नामित व्यक्ति की बड़े नेताओं के साथ तस्वीरों को सोशल मीडिया पर लगातार प्रमुखता से प्रचारित किया जाता है। और सबसे महत्वपूर्ण सवाल—हथियारों के प्रदर्शन से जुड़े वायरल वीडियो के मामले में पुलिस की कार्रवाई कहां तक पहुंची?
वीडियो में दिखाई दे रहे हथियारों की जांच हुई या नहीं?
आयुध अधिनियम से जुड़े मामले की वर्तमान स्थिति क्या है?
और गंभीर आरोपों वाली दूसरी FIR में पुलिस जांच कहां तक पहुंची?
लेकिन पत्रकारिता का धर्म है—दस्तावेज सामने हों, वीडियो चर्चा में हो और सवाल जनता के बीच हों, तो उन सवालों को जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाया जाए।
अब देखना होगा कि इन मामलों में पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष क्या सामने आता है।
VC KHABAR इस पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष जानने का प्रयास करेगा। संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आने पर उसे भी पूरी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
क्योंकि सवाल तस्वीरों का नहीं... सवाल कानून के इकबाल का है।
सवाल यह है कि आरोप चाहे किसी पर भी हों, जांच और कार्रवाई का पैमाना सबके लिए एक समान है या नहीं?
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