
ACB की बड़ी कार्रवाई।
वर्ष 2016 की दवा खरीद में 61.24 लाख रुपये के कथित घोटाले पर एफआईआर।
पांच नामजद सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और IPC की विभिन्न धाराओं में मुकदमा, सीएमएचओ कार्यालय जोधपुर से जुड़ा मामला।
जोधपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने वर्ष 2016 में जोधपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में दवाइयों एवं चिकित्सा सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज की है। एसीबी जिला जयपुर के सीपीएस थाना में दर्ज एफआईआर संख्या 182/2026 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं 13(1)(d), 13(2) तथा भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467, 468, 471, 477-ए एवं 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एफआईआर के अनुसार यह मामला वर्ष 2016 में हुई खरीद प्रक्रिया से संबंधित है, जबकि शिकायत के आधार पर 6 जुलाई 2026 को प्रकरण दर्ज किया गया।
इन लोगों को बनाया गया आरोपी
एफआईआर में तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय से जुड़े खरीद प्रकरण में पांच लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें गिरधारी सिंह उदावत, सुभोद सक्सेना (मैसर्स हर्ष डिस्ट्रीब्यूटर्स), जय कुमार शर्मा (मैकोन फार्मा), कमलेश बोहरा (सीमा मेडिकल) तथा गौतमकांत लाढा (ललित फार्मा) के नाम शामिल हैं। इसके अलावा अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
एफआईआर में उल्लेख है कि वर्ष 2016 में राज्य सरकार की नि:शुल्क दवा योजना के तहत जोधपुर सीएमएचओ कार्यालय द्वारा विभिन्न दवाइयों एवं चिकित्सा सामग्री की खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। आरोप है कि खरीद प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया तथा निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।
जांच में आरोप लगाया गया है कि निविदा प्रक्रिया में कुछ फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नियमों की अनदेखी की गई। साथ ही खरीद आदेश जारी करने और भुगतान की प्रक्रिया में भी रिकॉर्ड में हेरफेर एवं दस्तावेजों के कथित फर्जी उपयोग की बात सामने आई है।
61.24 लाख रुपये की सरकारी राशि का नुकसान
एफआईआर के अनुसार कथित अनियमितताओं के कारण सरकार को 61,24,671 रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ। इस राशि को सरकारी संपत्ति के रूप में दर्शाते हुए भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितता का मामला दर्ज किया गया है।
विभिन्न फर्मों को जारी किए गए थे खरीद आदेश
एफआईआर में सीमा मेडिकल, मैकोन फार्मा, ललित फार्मा सहित अन्य फर्मों को वर्ष 2016 के दौरान लाखों रुपये के खरीद आदेश जारी किए जाने का उल्लेख है। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही खरीद आदेश जारी किए गए तथा नियमों के विपरीत भुगतान भी किया गया। जांच में खरीद आदेशों, भुगतान रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी।
पूर्व जांच के बाद दर्ज हुई एफआईआर।
प्रकरण में पहले प्रारंभिक जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं, नियमों का उल्लंघन तथा सरकारी धन के दुरुपयोग के प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिलने के बाद एसीबी ने नियमित एफआईआर दर्ज की है। इसके आधार पर अब विस्तृत आपराधिक जांच शुरू कर दी गई है।
एसीबी करेगी दस्तावेजों और भुगतान की गहन जांच।
एफआईआर दर्ज होने के बाद एसीबी अब संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और फर्मों से जुड़े दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड, निविदा प्रक्रिया तथा खरीद आदेशों की गहन जांच करेगी। जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा सकती है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला ?
एसीबी ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(d) एवं 13(2) के साथ भारतीय दंड संहिता की धाराएं 467 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज का उपयोग), 477-ए (लेखा अभिलेखों में हेरफेर) तथा 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
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