
*शिक्षा व्यवस्था बदलाव.....प्रदेश में स्कूलों की होगी मैपिंग : 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में बने स्कूलों का नक्शा भी बनाया जाएगा*
*सेवानिवृत्त शिक्षकों की तर्ज पर युवा भी स्कूलों में पढ़ा सकेंगे*
*सूबे में स्कूलों का मैपिंग तैयार किया जाएगा। इससे पता चल सकेगा कि जहां सरकारी स्कूल हैं तो, उनके बीच 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में कोई गुणवत्तापरक स्कूल है या नहीं। यदि किसी क्षेत्र में ऐसे स्कूल नहीं हैं तो वहां स्कूल खोले जाएंगे।*
*इसमें पीएम श्री, सीएम श्री और राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय शामिल किए जाएंगे।*
*वहीं नई ऐसी क्षेत्रों में विद्यार्थियों के लिए परिवहन व्यवस्था की समीक्षा होगी। सुरक्षा, सुविधा व लागत के आधार पर नई व्यवस्था लागू होगी। छठी, नौवीं व 11वीं कक्षा के पास विद्यार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के बजाय साइकिल उपलब्ध कराने का प्रस्ताव बनाया जाएगा।*
*शिक्षा के क्षेत्र में सफल मॉडल को स्वास्थ्य में भी लागू किया जाएगा। इसके लिए अलग पोर्टल बनाया जाएगा। वहां इक्कठे शिक्षित युवाओं और सेवानिवृत्त शिक्षकों के लिए अलग पोर्टल बनाया जाएगा। वहीं अलग-अलग प्रभावित विद्यार्थियों की समस्याओं का समाधान ऑफलाइन के आधार पर कराया जाएगा। क्योंकि 10वीं के बाद स्कूलों व आस-पास अल्ट्राबस की दिक्कत होती है। ऐसे विद्यार्थियों की तुरंत पहचान होगी और विद्यार्थियों के सामने आने वाली समस्याओं का निदान किया जाएगा।*
#### *30 सितंबर तक कंडम स्कूल भवनों को हटाया जाएगा*
*सरकार ने आदेश दिए कि कंडम स्कूल भवनों को 30 सितंबर तक हटा दिया जाए। जिन स्कूलों में नए भवनों का निर्माण करना है, उसे जल्द शुरू कराया जाएगा। स्कूलों में आईटी लैब बनेंगे, कुछ जगह अपग्रेड होगा। प्रदेश में 719 में से 148 विद्यालयों में आईटी लैब बनेंगे या अपग्रेड किए जाएंगे। उक्त विद्यालयों में टू-वे कम्युनिकेशन सिस्टम स्थापित करने के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये की सीएसआर सहायता जुटाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।*
*रिक्त पद भी भरे जाएंगे*
*प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जो रिक्त पद हैं, उनको भी भरा जाएगा। 5282 टीजीटी आर्ट पद स्वीकृत है, रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज करने तथा 1,401 आर्ट एंड क्राफ्ट शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया है।*
*डिजिटल सुविधाएं और असुरक्षित परिवहन पर जोर दिया जाएगा*
*सरकार के निर्देशों का फोकस केवल नए भवन बनाने तक सीमित नहीं है। विद्यार्थियों की पढ़ाई, डिजिटल सुविधाएं, सुरक्षित परिवहन, सामाजिक सहभागिता और शिक्षक उपलब्धता सहित अन्य पहलुओं को एक साथ सुधारने का प्रयास किया गया है। यदि तय समय सीमा में इन फैसलों का क्रियान्वयन होता है तो सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।*
Hisar, Hissar | Aug 9, 2026