कटिहार सदर अस्पताल में प्रसव के बाद एक प्रसूता महिला की हालत गंभीर हो गई। महिला को खून की जरूरत थी, लेकिन उनके पति के अलावा मदद के लिए कोई नहीं था। कई जगह प्रयास के बावजूद ब्लड नहीं मिल पाया। इसी दौरान एक आशा स्वास्थ्य कर्मी से जानकारी मिली। मैं तुरंत ब्लड बैंक पहुंचा, जहां ब्लड तो उपलब्ध था, लेकिन डोनर की जरूरत थी। जब कोई आगे नहीं आया, तो मैंने खुद रक्तदान कर महिला की जान बचाने में अपना योगदान दिया। मेरा संदेश है कि रक्तदान करने से शरीर कमजोर नहीं होता, यह केवल एक भ्रांति है। आइए, इस भ्रांति को दूर करें और जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं। आपका कुछ मिनट का समय और आपका रक्त किसी परिवार की खुशियां बचा सकता है। याद रखिए, आपका रक्त किसी के लिए जीवनदान बन सकता है। रक्तदान करें, जीवन बचाएं।