
मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कानून की उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए एक अनोखा फैसला लिया है। उन्होंने भोपाल स्थित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (एनएलआईयू) से नियमित एलएलएम (LLM) की पढ़ाई के दौरान विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ता नहीं लेने का निर्णय लिया है।
इस संबंध में विधायक डोडियार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को आवेदन सौंपने के साथ ही संसदीय कार्य मंत्री, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, जनजातीय कार्य मंत्री, मुख्य सचिव और विधानसभा के प्रमुख सचिव को भी पत्र लिखकर अपने वेतन-भत्तों का भुगतान अस्थायी रूप से स्थगित करने का अनुरोध किया है।
कमलेश्वर डोडियार ने पत्र में बताया है कि वे 20 जुलाई 2026 से 15 मई 2027 तक एनएलआईयू में एक वर्षीय एलएलएम पाठ्यक्रम की नियमित पढ़ाई करेंगे। कक्षाओं और परीक्षाओं में व्यस्त रहने के कारण उन्होंने स्वेच्छा से वेतन और भत्ता नहीं लेने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि वे जनता के टैक्स के पैसे से मिलने वाला वेतन उस अवधि में नहीं लेना चाहते, जब वे नियमित रूप से उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे होंगे।
विधायक ने स्पष्ट किया है कि पढ़ाई के बावजूद वे अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते रहेंगे। बार काउंसिल ऑफ इंडिया और विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करते हुए वे विधानसभा सत्रों में प्राथमिकता से शामिल होंगे। साथ ही अपने निजी खर्च पर सैलाना विधानसभा क्षेत्र का दौरा करेंगे, जनसुनवाई करेंगे और शासकीय कार्यक्रमों में भी भाग लेंगे।
कमलेश्वर डोडियार का राजनीतिक सफर संघर्षों से भरा रहा है। वे एक साधारण आदिवासी परिवार से आते हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रतलाम जिले की सैलाना सीट से भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को हराया था। वर्तमान में वे मध्य प्रदेश विधानसभा में बीएपी के एकमात्र विधायक हैं।
विधायक बनने से पहले डोडियार कच्चे मकान में रहते थे और मजदूरी करते हुए एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। अब विधायक रहते हुए एलएलएम की पढ़ाई के लिए वेतन-भत्ता छोड़ने का उनका निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है।
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