
बिलासपुर शहर का नाम कैसे पड़ा? | SA News Chhattisgarh
08-07-2026: छत्तीसगढ़ का न्यायधानी कहे जाने वाले प्रमुख शहर बिलासपुर अपने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व के लिए जाना जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस शहर का नाम "बिलासपुर" कैसे पड़ा।
इसके नामकरण से जुड़ी सबसे प्रचलित और ऐतिहासिक रूप से स्वीकार्य मान्यता एक साहसी महिला बिलासा केंवटिन से जुड़ी हुई है।
लोककथाओं और क्षेत्रीय इतिहास के अनुसार, बिलासा केंवटिन अरपा नदी के तट पर रहने वाले केंवट समुदाय की एक वीर, परिश्रमी और सम्मानित महिला थीं। कहा जाता है कि वे मछली पकड़ने और नौका चलाने में निपुण थीं। अपने साहस, पराक्रम और समाज सेवा के कारण उनका नाम दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो गया। उस समय अरपा नदी के किनारे बसने वाली बस्ती को लोग बिलासा के नाम से पहचानने लगे। समय के साथ इस बस्ती का विस्तार हुआ और इसे "बिलासा का पुर" अर्थात "बिलासपुर" कहा जाने लगा। आगे चलकर यही नाम स्थायी रूप से पूरे नगर की पहचान बन गया।
इतिहासकारों का मानना है कि बिलासपुर का संगठित विकास विशेष रूप से ब्रिटिश शासनकाल में हुआ। रेलवे के आगमन के बाद यह व्यापार, शिक्षा और प्रशासन का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया। आज बिलासपुर को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्यालय, न्यायिक संस्थानों, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है।
बिलासा केंवटिन की स्मृति को सम्मान देने के लिए आज भी छत्तीसगढ़ में अनेक संस्थानों और योजनाओं का नाम उनके नाम पर रखा गया है। उनकी वीरता और योगदान की याद में प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं तथा लोकगीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उनका उल्लेख गर्व के साथ किया जाता है।
हालांकि इतिहास में बिलासपुर के नामकरण को लेकर कुछ अन्य मत भी मिलते हैं, लेकिन बिलासा केंवटिन से जुड़ी मान्यता सबसे अधिक लोकप्रिय और व्यापक रूप से स्वीकार की जाती है। यह कथा केवल एक शहर के नाम की कहानी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, नारी शक्ति और क्षेत्रीय गौरव का भी प्रतीक है। इसी कारण बिलासपुर का नाम आज भी अपने इतिहास और विरासत की अमिट पहचान बनाए हुए है।
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