
आज लगभग 10 वर्षों बाद अपनी पत्नी और बच्चों के साथ ससुराल पहुंचने का अवसर मिला। सच कहूं तो वहां बिताए गए उन अनमोल पलों को शब्दों में समेट पाना मेरे लिए बेहद कठिन है। बड़ी अम्मा, बड़े पापा, भाइयों और विशेष रूप से मेरे अतिप्रिय साले चंदन सिंह के साथ बिताया गया हर एक क्षण मेरे हृदय में हमेशा के लिए बस गया है। वह अपनापन, वह स्नेह और वह आत्मीयता मेरे लिए अत्यंत सुखद, भावुक और अविस्मरणीय रही।
मेरे साले की तीनों प्यारी बेटियां दिनभर मेरे साथ रहीं। उनका मासूम स्नेह और अपनापन मेरे दिल को छू गया। समय के अभाव के कारण मैं उन्हें उतना प्यार और समय नहीं दे पाया, जितना मैं वास्तव में देना चाहता था। इसका मलाल मेरे मन में हमेशा रहेगा।
मन को सबसे अधिक पीड़ा इस बात की हुई कि मेरे साले को एक पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई थी, घर में खुशियों का उजाला था, सब कुछ सामान्य और आनंदमय था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था और भगवान ने उस नन्ही जान को हमसे छीन लिया। यह दुख शब्दों से परे है। ऐसे कठिन और असहनीय समय में मैं अपने साले और पूरे परिवार को बस यही कहना चाहता हूं कि ईश्वर पर विश्वास बनाए रखें। समय चाहे कितना भी कठोर क्यों न हो, ईश्वर की कृपा, आशीर्वाद और धैर्य से हर घाव भरता है और जीवन फिर से संभल जाता है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि वह इस पूरे परिवार को इस गहरे दुख को सहने की शक्ति, अटूट धैर्य और आने वाले समय में अपार खुशियां प्रदान करें।