
किसान भाइयों, फसल में कीटों का प्रकोप शुरू होते ही सही कीटनाशी का चुनाव करना बहुत जरूरी है, क्योंकि हर कीट के लिए हर दवा प्रभावी नहीं होती। खासकर थ्रिप्स, फल छेदक, तना छेदक, इल्ली, लीफ फोल्डर, पॉड बोरर और दूसरी लेपिडोप्टेरन श्रेणी की सुंडियों के प्रबंधन के लिए किसानों के बीच Delegate Insecticide का इस्तेमाल किया जाता है।
Delegate में Spinetoram 11.7% SC सक्रिय तत्व होता है। यह Spinosyn समूह का कीटनाशी है और इसे IRAC Group 5 में वर्गीकृत किया जाता है। यह कीट के शरीर में संपर्क तथा भोजन के माध्यम से प्रवेश करके उसके तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। इसके प्रभाव से कीट का भोजन करना बहुत जल्दी बंद हो जाता है और इसके बाद धीरे-धीरे उसकी मृत्यु होने लगती है।
इसकी एक खास विशेषता translaminar movement बताई जाती है। यानी छिड़काव के बाद सक्रिय तत्व पत्ती के ऊतकों में प्रवेश कर पत्ती की दूसरी सतह तक पहुंच सकता है। इसलिए पत्तियों के अंदर या नीचे छिपे कुछ कीटों के नियंत्रण में भी यह उपयोगी हो सकता है। हालांकि वास्तविक प्रभाव फसल, कीट की अवस्था, प्रकोप की तीव्रता और छिड़काव की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा।
Delegate का इस्तेमाल कई फसलों में अलग-अलग कीटों के लिए किया जाता है। इसमें कपास, सोयाबीन, मिर्च, टमाटर, भिंडी, बैंगन, चना, अरहर, अंगूर, धान, आम और मक्का जैसी फसलें शामिल हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात यह है कि हर फसल में इसकी मात्रा एक जैसी नहीं होती। इसलिए केवल किसी दूसरे किसान की बताई हुई मात्रा देखकर दवा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
कपास में थ्रिप्स के लिए दिए गए विवरण के अनुसार 168 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा बताई गई है और पानी की मात्रा 200 से 400 लीटर रखी जाती है। स्पॉटेड बोलवर्म के लिए 168 से 188 मिलीलीटर प्रति एकड़, जबकि पिंक बोलवर्म के लिए 180 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा दी गई है। तंबाकू इल्ली के लिए भी 168 से 188 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा बताई गई है। कपास में दिए गए विवरण के अनुसार प्रतीक्षा अवधि यानी PHI 30 दिन है।
सोयाबीन में तंबाकू इल्ली के नियंत्रण के लिए 180 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा दी गई है। इसके लिए 200 से 250 लीटर पानी का उपयोग बताया गया है। सोयाबीन में भी दिए गए विवरण के अनुसार PHI 30 दिन है।
मिर्च में थ्रिप्स, फल छेदक और तंबाकू इल्ली के लिए 188 से 200 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा दी गई है। पानी की मात्रा 160 से 200 लीटर बताई गई है। मिर्च में दिए गए विवरण के अनुसार प्रतीक्षा अवधि 7 दिन है।
भिंडी में फल छेदक और शूट एंड फ्रूट बोरर के लिए 150 से 180 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा दी गई है। पानी की मात्रा 200 से 400 लीटर बताई गई है और PHI 3 दिन दिया गया है।
बैंगन में शूट एंड फ्रूट बोरर के नियंत्रण के लिए भी 150 से 180 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा दी गई है। 200 से 400 लीटर पानी में इसका छिड़काव करने की जानकारी दी गई है। यहां भी दिए गए विवरण के अनुसार PHI 3 दिन है।
चना फसल में पॉड बोरर के लिए 150 से 180 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा बताई गई है और 200 लीटर पानी में छिड़काव करने की जानकारी दी गई है। चना में PHI 20 दिन दिया गया है।
अरहर में पॉड बोरर के लिए 150 से 180 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा बताई गई है। 200 लीटर पानी में इसका छिड़काव करने की जानकारी दी गई है और PHI 23 दिन बताया गया है।
अंगूर में थ्रिप्स के लिए 120 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा दी गई है। पानी की मात्रा 200 से 400 लीटर बताई गई है और PHI 5 दिन दिया गया है।
धान की फसल में Delegate का उपयोग खास तौर पर Yellow Stem Borer यानी पीला तना छेदक और Leaf Folder यानी पत्ती लपेटक के लिए दिए गए विवरण में बताया गया है। Yellow Stem Borer के लिए 140 से 150 मिलीलीटर प्रति एकड़ और 200 लीटर पानी की मात्रा दी गई है। वहीं Leaf Folder के लिए 100 मिलीलीटर प्रति एकड़ और 200 लीटर पानी बताया गया है। धान में दोनों मामलों के लिए दिए गए विवरण के अनुसार PHI 20 दिन है।
किसानों को यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी चाहिए कि धान में तना छेदक और लीफ फोल्डर दिखाई देने मात्र से तुरंत दवा का छिड़काव करना जरूरी नहीं है। कीट की संख्या, फसल की अवस्था और आर्थिक नुकसान की स्थिति को देखकर निर्णय लेना ज्यादा उचित है। जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ या स्थानीय कृषि विभाग की सलाह भी ली जा सकती है।
टमाटर में फल छेदक, तंबाकू इल्ली, लीफ माइनर और Tomato Pinworm के लिए 150 से 180 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा दी गई है। 200 लीटर पानी में छिड़काव की जानकारी है और PHI 3 दिन बताया गया है।
मक्का में Fall Armyworm यानी फॉल आर्मीवर्म के लिए दिए गए विवरण में 100 मिलीलीटर प्रति एकड़ और 200 लीटर पानी की मात्रा बताई गई है। यहां PHI 32 दिन दिया गया है।
आम में थ्रिप्स के लिए 0.4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की मात्रा दी गई है और दिए गए विवरण के अनुसार PHI 21 दिन है।
Delegate को कीट दिखाई देने के शुरुआती चरण में इस्तेमाल करने की जानकारी दी गई है। इसका मतलब यह नहीं कि किसान फसल में बिना कीट देखे बार-बार छिड़काव करते रहें। कीट की पहचान, प्रकोप की स्थिति और फसल की अवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है।
इस दवा का एक और महत्वपूर्ण पहलू है resistance management। एक ही रासायनिक समूह की कीटनाशी दवाओं का लगातार इस्तेमाल करने से समय के साथ कीटों में प्रतिरोध विकसित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए कीट प्रबंधन में अलग-अलग IRAC समूहों की प्रभावी दवाओं को उचित रणनीति के साथ बदल-बदलकर इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है। Delegate को बार-बार लगातार इस्तेमाल करने के बजाय समेकित कीट प्रबंधन यानी IPM का हिस्सा बनाना ज्यादा उचित है।
छिड़काव करते समय केवल दवा की मात्रा ही नहीं, बल्कि पानी की मात्रा और स्प्रे की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। पत्तियों पर समान रूप से छिड़काव होना चाहिए। बहुत तेज हवा में छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे दवा बहकर दूसरी जगह जा सकती है और छिड़काव करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आने का खतरा भी बढ़ सकता है।
कीटनाशी का इस्तेमाल करते समय दस्ताने, मास्क, पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े और आंखों की सुरक्षा के लिए गॉगल्स का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। दवा को संभालते समय खाना, पीना या धूम्रपान नहीं करना चाहिए। छिड़काव के बाद हाथ, चेहरा और खुले हुए शरीर के हिस्सों को अच्छी तरह धोना चाहिए।
दवा को बच्चों, पशुओं और खाद्य सामग्री से दूर रखना चाहिए। इसे मूल पैक में, ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर तथा सीधी धूप से दूर रखना चाहिए। किसी दूसरी दवा के साथ टैंक मिक्स करने से पहले उसकी compatibility की पुष्टि करना जरूरी है। दिए गए विवरण में भी tank mix करने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेने की बात कही गई है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऊपर दी गई मात्रा उत्पाद के उपलब्ध विवरण पर आधारित है। अलग-अलग फसल, कीट, उत्पाद लेबल या पंजीकृत उपयोग के अनुसार सिफारिश बदल सकती है। इसलिए खेत में वास्तविक छिड़काव करने से पहले अपने पास मौजूद Delegate के पैक पर दिए गए आधिकारिक लेबल और लीफलेट को जरूर देखें और उसी के अनुसार मात्रा, पानी की मात्रा, PHI तथा अन्य निर्देशों का पालन करें।
किसान भाइयों, कीटनाशी का मतलब यह नहीं है कि जितनी ज्यादा दवा डालेंगे, उतना अच्छा परिणाम मिलेगा। सही कीट की पहचान, सही समय, सही मात्रा, पर्याप्त पानी, उचित कवरेज और सही अंतराल-ये सभी मिलकर कीट नियंत्रण को प्रभावी बनाते हैं।
अगर फसल में कीट का प्रकोप है तो पहले यह पहचानिए कि कीट कौन-सा है। इसके बाद देखें कि उस फसल और उस कीट के लिए Delegate की सिफारिश है या नहीं। फिर फसल के अनुसार निर्धारित डोज में ही छिड़काव करें। बिना जानकारी के डोज बढ़ाना या बार-बार छिड़काव करना किसानों की लागत बढ़ा सकता है और कीटों में resistance की समस्या भी पैदा कर सकता है।
किसान भाइयों, आपके खेत में इस समय कौन-सी फसल है और उसमें कौन-सा कीट सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है? धान में Leaf Folder, Yellow Stem Borer, मिर्च में Thrips, टमाटर में Fruit Borer, चने में Pod Borer या मक्का में Fall Armyworm?
कमेंट में अपनी फसल, फसल की उम्र और कीट का नाम जरूर बताइए। जानकारी सही होगी तो कीट प्रबंधन पर चर्चा भी सही दिशा में होगी।
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