क्या आप CJI सूर्यकांत जी की इस टिप्पणी से सहमत हैं?
जंतर-मंतर पर छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए CJI सूर्यकांत जी की पीठ ने वकील से कहा— "हमारा समय बर्बाद मत कीजिए, और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।"
जब वकील ने पुलिस की कथित ज्यादती का वीडियो देखने का आग्रह किया, तो उन्होंने कहा— "हमें वीडियो में कोई दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है।"
इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या अदालत का यह रुख न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है, या ऐसे मामलों में तथ्यों की गहराई से जांच होनी चाहिए थी?
आपकी राय क्या है?
✅ क्या आप CJI के इस फैसले और टिप्पणी से सहमत हैं?
❌ या आपको लगता है कि अदालत को मामले की सुनवाई कर तथ्यों की जांच करनी चाहिए थी?
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