
सतपुड़ा की नदियों को बचाने पचमढ़ी में लगाया गया तैरता कचरा अवरोधक
प्लास्टिक प्रदूषण रोकने की दिशा में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में नई पहल
#पचमढ़ी। #सतपुड़ा_टाइगर_रिजर्व क्षेत्र में बहने वाली नदियों को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। पचमढ़ी में पहली बार तैरता हुआ कचरा अवरोधक (फ्लोटिंग ट्रैश बैरियर) स्थापित किया गया है। यह पहल सतपुड़ा टाइगर रिजर्व प्रबंधन, पचमढ़ी छावनी बोर्ड और वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से बीएनपी परिबास के सहयोग से की गई है।
पचमढ़ी क्षेत्र से निकलने वाली पहाड़ी धाराएं आगे चलकर भराना, बाणगंगा, मीठीझीरी, देनवा, नागद्वारी और बोरी जैसी नदियों में मिलती हैं, जो अंततः तवा जलाशय तक पहुंचती हैं। मानसून के दौरान पचमढ़ी से बहकर आने वाला प्लास्टिक कचरा इन जलधाराओं में प्रवेश कर जाता है, जिससे जल गुणवत्ता और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होता है।
अधिकारियों के अनुसार यह तैरता हुआ अवरोधक जल प्रवाह को प्रभावित किए बिना प्लास्टिक कचरे को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। यह संरचना बदलते जल स्तर के अनुसार समायोजित हो जाती है और मछलियों व अन्य जलीय जीवों के आवागमन में बाधा नहीं बनती।
पचमढ़ी एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के कारण यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं। इसके चलते प्लास्टिक कचरे का दबाव बढ़ता है, जो वर्षा के दौरान नालों और धाराओं के माध्यम से जंगल की नदियों में पहुंच जाता है।
इस समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय विद्यालय के पास एक प्रमुख जल निकासी चैनल पर इस अवरोधक को स्थापित किया गया है, जिसे सर्वेक्षण के दौरान कचरे के प्रवेश का मुख्य मार्ग पाया गया था।
प्रशासन द्वारा अवरोधक के माध्यम से एकत्रित कचरे के संग्रहण, छंटाई और निपटान की जिम्मेदारी पचमढ़ी छावनी बोर्ड को सौंपी गई है। साथ ही इसकी प्रभावशीलता की निगरानी कैमरा ट्रैप और नियमित निरीक्षणों के माध्यम से की जाएगी।
बरसात के मौसम में आयोजित होने वाले नागद्वारी मेले के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही होती है, जिससे कचरे की मात्रा बढ़ती है। ऐसे में यह परियोजना भविष्य में अन्य प्रभावित क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी मॉडल साबित हो सकती है।
आगामी मानसून में इस अवरोधक के माध्यम से बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरे को नदियों में जाने से रोके जाने की उम्मीद जताई गई है, जिससे सतपुड़ा क्षेत्र की नदियों और वन्यजीवों के संरक्षण में सहायता मिलेगी।
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