
कोतवाली के बहुचर्चित कृष्णपाल हत्याकांड में ऐतिहासिक फैसला, सभी 8 दोषियों को उम्रकैद
आगर मालवा, 24 जुलाई। करीब दो वर्ष पहले हुए बहुचर्चित कृष्णपाल हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाते हुए सभी आठ आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश मधुसूदन जंघेल ने प्रत्येक दोषी पर 4-4 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। न्यायालय ने पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी को आधार मानते हुए सभी आरोपियों को दोषी ठहराया।
अभियोजन के अनुसार, थाना कोतवाली के अपराध क्रमांक 165/2024 में भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 365, 506 एवं 34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। घटना 5 मई 2024 की है। फरियादी फरमान खां निवासी अर्जुन नगर ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने साथियों के साथ जयश्री अस्पताल के पीछे मैदान में बैठा था। इसी दौरान दो कारों में सवार आरोपी पुरानी रंजिश के चलते कृष्णपाल सौंधिया के साथ हॉकी और डंडों से मारपीट करने लगे।
बीच-बचाव करने पर फरियादी को भी जान से मारने की धमकी दी गई। इसके बाद आरोपी कृष्णपाल का जबरन अपहरण कर उसे विभिन्न स्थानों पर ले गए और लगातार मारपीट करते रहे। बाद में मालीखेड़ी रोड स्थित नाग मंदिर के पास कृष्णपाल गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिला। उसे उपचार के लिए उज्जैन ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक अनिल मालवीय ने मामले की वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक विवेचना की। पुलिस ने मौखिक, दस्तावेजी और परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्रित कर सभी आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने धारासिंह, बनेसिंह, दिनेश, राहुल, मेहरबानसिंह, दरबारसिंह, दशरथ सिंह और भारत को दोषी मानते हुए प्रत्येक को आजीवन कारावास एवं 4-4 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक अशोक गवली ने प्रभावी पैरवी की। न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान कोर्ट मोहर्रिर आरक्षक महेश परमार, वारंट मुंशी आरक्षक लखन राठौर, कोर्ट मुंशी जितेंद्र राजपूत, विवेचना अधिकारी निरीक्षक अनिल मालवीय तथा गवाहों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित कराने में प्रधान आरक्षक सुनील पटेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जिला पुलिस ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि गंभीर अपराधों में त्वरित विवेचना, मजबूत साक्ष्य संकलन और प्रभावी न्यायालयीन समन्वय के माध्यम से अपराधियों को कानून के अनुसार कठोर सजा दिलाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आमजन की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए पुलिस निरंतर प्रतिबद्ध है।