
पुण्य तिथि पर नमन 🌷🙏
देश के सबसे लोकप्रिय और जनता के राष्ट्रपति डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम अपने कठिन संघर्ष के दम पर बचपन में अखबार बेचने से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का सफर पूरा किया. इसके बावजूद वे हमेशा सादगी और सहजता की प्रतिमूर्ति बने रहे..यही वजह है कि आज भी लाखों-करोड़ों लोग उन्हें अपना प्रेरणा स्त्रोत मानते हैं।
सादगी ऐसी की सादगी को भी खुद पर फख्र हो
एक बार डॉ. कलाम साहब का पूरा परिवार उनसे मिलने दिल्ली आया.वे कुल 52 लोग थे, जिनमें उनके 90 साल के बड़े भाई से लेकर उनकी डेढ़ साल की परपोती भी शामिल थी..स्टेशन से सभी को राष्ट्रपति भवन लाया गया.यहां वे 8 दिन तक रुके.अजमेर गये दिल्ली घूमे उनके आने-जाने से लेकर खाने-पीने तक, यहां तक की चाय तक का खर्च भी कलाम ने अपनी जेब से दिया..रिश्तेदारों के खाने-पीने के सारे खर्च का ब्यौरा अलग से रखा गया.. और जब वह सभी वापस गए तब कलाम ने अपने निजी खाते से 3,52,000 रुपये का चेक काट कर राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा..राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों को सख्त निर्देश था कि किसी भी सरकारी चीज का उपयोग नहीं किया जाये।
आईआईटी (बीएचयू ) बनारस में एक दीक्षांत समारोह में कलाम साहब मुख्य अतिथि थे और मंच पर पांच कुर्सियां रखी थीं जिनमें से बीच वाली कुर्सी राष्ट्रपति के लिए निर्धारित थी.बाकी चार कुर्सियां विवि के शीर्ष अधिकारियों के लिए थीं। यह देखकर की उनकी कुर्सी बाकी चार कुर्सियों से आकार में बड़ी है,कलाम ने उस पर बैठने से इंकार कर दिया और उस कुर्सी पर कुलपति को बैठने के लिए कहा.जाहिर सी बात है कि कुलपति उस कुर्सी पर नहीं बैठे और उसके बाद तुरंत जनता के राष्ट्रपति के लिए एक अन्य कुर्सी का प्रबंध किया गया.ऐसे महापुरुषों ने देश को हमेशा गौरवान्वित किया है...एक बार कलाम साहब ने एक इमारत की दीवार की रक्षा के लिए उस पर टूटा कांच लगाने के सुझाव को यह कहते हुए नकार दिया था कि ऐसा करना पक्षियों के लिए नुकसानदेह साबित होगा।
महज़ दो सूटकेस लेकर पहुंचे राष्ट्रपति भवन
जब डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति चुना गया था तो उनके स्वागत के लिए जोरो-शोरो से तैयारियां की गईं,राष्ट्रपति भवन को खूबसूरती से सजाया गया. वहीं ये तमाम तैयारी इसलिए की गई थीं कि देश के नए राष्ट्रपति का सामान ठीक से भवन में रखा जा सके..लेकिन इस बात को काफी कम लोग जानते हैं कि जब अब्दुल कलाम वहां पहुंचे तो वो सिर्फ 2 सूटकेस लेकर पहुंचे थे.. एक सूटकेस में उनके कपड़े तथा दूसरी में उनकी प्रिय किताबें थी।
एक बार राष्ट्रपति भवन में कलाम साहब बच्चों के बीच में घिरे हुए थे..उसी वक्त वहां उनका इंटरव्यू लेने आए एक विदेशी पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आपकी कोई अपनी संतान नहीं है फिर भी आप बच्चों से इतना प्यार करते हैं? पत्रकार की बातें सुनकर कलाम साहब मुस्कुराए और बड़ी शालीनता के साथ बोले कि नहीं आप गलत हैं मेरे तीन बच्चे हैं.. कलाम साहब का यह जवाब सुनकर सब हैरान रह गए, लेकिन जब उन्होंने अपनी पूरी बात कही तो हर किसी की आंखें खुशी और गर्व से छलछला उठीं, क्योंकि कलाम ने कहा कि आपको पता नहीं मेरे तीन बेटे हैं, जिनके नाम हैं पृथ्वी, अग्नी और ब्रह्मोस...
कृत्रिम सुख के बजाये ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहिये- डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम
पुण्य तिथि पर शत-शत नमन।
#APJAbdulKalam #newsfeed Bolta Kishanganj News