'शादी से पहले शारीरिक संबंध खराब चरित्र का सबूत नहीं' - सुप्रीम कोर्ट की दो टूक!
सुप्रीम कोर्ट ने युवाओं की निजता और अधिकारों को लेकर एक बेहद अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि दो बालिगों के बीच आपसी सहमति से बने शारीरिक संबंध किसी के "खराब आचरण" या "चरित्रहीन" होने का पैमाना नहीं हो सकते।
📌 क्या है पूरा मामला?
तेलंगाना पुलिस कांस्टेबल भर्ती के दौरान एक उम्मीदवार को इसी वजह (शादी से पहले संबंध) से नौकरी के लिए अयोग्य ठहरा कर भर्ती से बाहर कर दिया गया था।
📌 सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
अदालत ने विभाग के फैसले को सख्त लहजे में गलत ठहराते हुए कहा:
* आज के आधुनिक समाज में ऐसे रिश्ते असामान्य नहीं हैं।
* किसी की निजी जिंदगी और सहमति से बने संबंधों के आधार पर किसी युवा को रोजगार के अवसर से वंचित नहीं किया जा सकता।
यह फैसला उन पुरानी सोच वाले पैमानों पर एक बड़ा प्रहार है जो किसी के निजी जीवन को उसके करियर और भविष्य से जोड़कर देखते हैं।
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