
दुर्घटना पर संवेदना भी ज़रूरी है और न्याय भी, लेकिन किसी की छवि को निशाना बनाना उचित नहीं।
बीते दिनों सड़क दुर्घटना में दो बच्चों की मौत के बाद इस पूरी घटना के बीच एक सवाल लगातार मन में उठता है। क्या किसी भी सड़क दुर्घटना को केवल राजनीतिक पहचान के आधार पर पेश करना उचित है? पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया और कई मंचों पर "भाजपा नेत्री नूतन गुप्ता" नाम को इस तरह उछाला गया, जैसे पूरी घटना का केंद्र केवल उनकी पहचान हो। ऐसा माहौल बनाया गया मानो फैसला अदालत नहीं, सोशल मीडिया ने पहले ही सुना दिया हो।
हम सभी जानते हैं कि सड़क दुर्घटनाएँ दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं। हर वर्ष हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवाते हैं। कोई भी व्यक्ति जानबूझकर यह नहीं चाहता कि उसकी गाड़ी से किसी की जान जाए। यदि चालक की गलती है, यदि कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उसके लिए कानून मौजूद है। लेकिन बिना जांच पूरी हुए किसी व्यक्ति की छवि को स्थायी रूप से अपराधी की तरह प्रस्तुत करना न्याय की भावना के विपरीत है।
एक समय गांवों में अंधविश्वास फैला हुआ था। लोग बच्चों से कहते थे कि नए पुल या नए मकान के पास मत जाना, वहां बलि चढ़ा दी जाएगी। डर इतना गहरा बैठ जाता था कि सच और अफवाह में फर्क करना मुश्किल हो जाता था। आज के दौर में सोशल मीडिया पर कई बार वही स्थिति दिखाई देती है। लगातार एक ही तरह का प्रचार किसी व्यक्ति के प्रति ऐसी धारणा बना देता है कि लोग तथ्य जानने से पहले ही निर्णय सुना देते हैं।
यह बात किसी एक राजनीतिक दल या एक व्यक्ति की नहीं है। कल यदि यही घटना किसी और नेता, अधिकारी या सामान्य नागरिक के साथ होती, तब भी हमारी राय यही होती कि पीड़ितों को न्याय मिले और किसी भी व्यक्ति के बारे में निष्कर्ष केवल निष्पक्ष जांच के बाद निकाला जाए।
हम पीड़ित परिवार के न्याय की मांग के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। लेकिन साथ ही यह भी मानते हैं कि न्याय का अर्थ केवल भावनाओं के आधार पर फैसला देना नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच, सच्चाई और कानून के आधार पर निर्णय लेना है।
आइए, हम संवेदना भी रखें, न्याय की मांग भी करें, लेकिन अफवाह, राजनीतिक पूर्वाग्रह और सोशल मीडिया ट्रायल से बचें। यही एक जिम्मेदार समाज की पहचान है।
Purnea East, Purnia | Jul 13, 2026