
#नशा मुक्ति कार्यक्रमों में #मुख्य अतिथि बनने से पहले स्वयं लें नशामुक्ति की शपथ: #सुशील बहुगुणा
#जो स्वयं नशा नहीं करेगा, वही समाज को नशामुक्ति का सही संदेश दे सकेगा"
#नई टिहरी। #शराब नहीं संस्कार" मुहिम के तहत #प्रदेश संयोजक, एनजीओ प्रकोष्ठ, भाजपा उत्तराखंड #सुशील बहुगुणा ने कहा कि नशा मुक्ति अभियान की सफलता केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने से नहीं, बल्कि समाज के सामने आदर्श प्रस्तुत करने से मिलेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में आयोजित होने वाले प्रत्येक नशा मुक्ति कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनने वाले व्यक्ति को सबसे पहले सार्वजनिक रूप से यह शपथ लेनी चाहिए कि वह स्वयं शराब, तंबाकू एवं किसी भी प्रकार के नशे का सेवन नहीं करता है और न ही भविष्य में करेगा। इसके बाद ही वह मंच से दूसरों को नशा छोड़ने का संदेश दे।
उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक अभियान की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विश्वसनीयता होती है। जब मंच पर उपस्थित व्यक्ति स्वयं अपने जीवन में उन मूल्यों का पालन करता है, जिनकी वह समाज से अपेक्षा करता है, तब उसका संदेश अधिक प्रभावी बनता है। यदि नशामुक्ति का संदेश देने वाला व्यक्ति स्वयं नशे से दूर रहेगा, तो युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और लोग उसके संदेश को गंभीरता से स्वीकार करेंगे।
सुशील बहुगुणा ने कहा कि "शराब नहीं संस्कार" मुहिम का मूल उद्देश्य केवल शराब और अन्य नशों के दुष्प्रभावों की जानकारी देना नहीं है, बल्कि समाज में एक ऐसी सकारात्मक संस्कृति विकसित करना है जिसमें नशामुक्त जीवन को सम्मान और संस्कारित जीवनशैली को पहचान मिले। उन्होंने कहा कि नशे के कारण अनेक परिवार आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकटों का सामना करते हैं। घरेलू कलह, सड़क दुर्घटनाएँ, अपराध, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ और युवाओं का भविष्य प्रभावित होना जैसी अनेक समस्याएँ नशे से जुड़ी हुई हैं। इसलिए इस दिशा में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों, महाविद्यालयों, ग्राम सभाओं, नगर निकायों, सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सरकारी विभागों द्वारा आयोजित नशा मुक्ति कार्यक्रमों में ऐसे व्यक्तियों को प्रमुखता दी जानी चाहिए जो अपने जीवन से नशामुक्ति का उदाहरण प्रस्तुत करते हों। यदि ऐसे लोगों का सम्मान होगा और उन्हें मंच मिलेगा, तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाएगा तथा युवाओं को सही दिशा मिलेगी।
सुशील बहुगुणा ने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक नशा मुक्ति कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि, आयोजकों तथा उपस्थित सभी लोगों द्वारा सामूहिक नशामुक्ति शपथ के साथ होनी चाहिए। इससे कार्यक्रम केवल औपचारिक न रहकर एक जनसंकल्प का रूप लेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक नागरिक स्वयं से शुरुआत करे और अपने परिवार तथा समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प ले, तो उत्तराखंड को नशामुक्त राज्य बनाने का लक्ष्य अवश्य प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने सभी सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं स्वयंसेवी संगठनों से आह्वान किया कि नशामुक्ति को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में अपनाएं। "शराब नहीं संस्कार" मुहिम इसी उद्देश्य के साथ वर्षों से समाज में जनजागरण का कार्य कर रही है और भविष्य में भी जनभागीदारी के माध्यम से नशामुक्त एवं संस्कारित समाज के निर्माण के लिए निरंतर प्रयास करती रहेगी।