
अगर आपने कभी घर पर किसी पौधे की टहनी से नया पौधा तैयार करने की कोशिश की है और टहनी सूख गई है, जड़ नहीं बनी या पूरी मेहनत बेकार हो गई, तो इसका एक बड़ा कारण यह हो सकता है कि आपने कटिंग को सिर्फ मिट्टी में लगाकर छोड़ दिया। किसी भी टहनी से सफलतापूर्वक जड़ बनवाने के लिए केवल मिट्टी पर्याप्त नहीं होती। कटिंग को नमी, उचित वातावरण, संक्रमण से सुरक्षा और जड़ बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियों की जरूरत होती है। अच्छी बात यह है कि इसे घर पर उपलब्ध कुछ सामान्य चीजों की मदद से काफी सरल तरीके से किया जा सकता है। हालांकि यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि हर पौधे की शाखा एक जैसी आसानी से जड़ नहीं बनाती। अनार, अंजीर, अंगूर, गुलाब, बोगनवेलिया जैसे कई पौधों में कटिंग से पौधा तैयार करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, जबकि कुछ फलदार पौधों में सफलता दर कम भी हो सकती है।
सबसे पहले ऐसी शाखा का चुनाव करें जो स्वस्थ हो और जिस पौधे से आप कटिंग ले रहे हैं वह पहले से अच्छी तरह विकसित और उत्पादन देने वाला हो। यदि संभव हो तो ऐसी शाखा चुनें जिसमें बीमारी, कीट या सूखने के लक्षण न हों। शाखा की मोटाई लगभग पेंसिल के बराबर से लेकर उंगली जितनी हो सकती है। बहुत पतली, कमजोर और बिल्कुल नई हरी शाखा कई बार पर्याप्त ऊर्जा नहीं दे पाती, जबकि बहुत मोटी और अत्यधिक पुरानी लकड़ी वाली शाखा भी आसानी से जड़ नहीं बनाती। लगभग 10 से 20 सेंटीमीटर लंबी कटिंग कई पौधों में इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन वास्तविक लंबाई पौधे की प्रजाति और शाखा की स्थिति के अनुसार बदल सकती है।
कटिंग तैयार करते समय सबसे महत्वपूर्ण कामों में से एक है पत्तियों को कम करना। यदि पूरी शाखा पर बहुत सारी पत्तियां छोड़ दी जाएंगी तो कटिंग अपनी उपलब्ध ऊर्जा का बड़ा हिस्सा पत्तियों को जीवित रखने में खर्च करेगी और पानी की कमी भी तेजी से हो सकती है। इसलिए नीचे के हिस्से की अधिकांश पत्तियां हटा दें और ऊपर 1 से 3 स्वस्थ पत्तियां आवश्यकता के अनुसार रखी जा सकती हैं। अगर शाखा पर फल या फूल लगे हैं तो उन्हें भी हटा देना बेहतर होता है, क्योंकि जड़ बनने से पहले फल विकसित करने में पौधे की ऊर्जा खर्च होती है। स्रोत में अनार और एसरोल जैसी फलदार शाखाओं पर फल बने रहने का उदाहरण दिया गया है, लेकिन व्यावहारिक रूप से शुरुआती कटिंग में फल हटाने से नमी और ऊर्जा का दबाव कम किया जा सकता है।
अब कटिंग के निचले हिस्से को तैयार करना है। शाखा के निचले लगभग 2 से 5 सेंटीमीटर हिस्से की बाहरी छाल को बहुत सावधानी से थोड़ा हटाया जा सकता है ताकि अंदर का हिस्सा दिखाई देने लगे। इसका उद्देश्य कटिंग के आधार पर नमी और जड़ बनने वाले माध्यम के संपर्क को बढ़ाना है। लेकिन यहां सबसे बड़ी सावधानी जरूरी है। छाल हटाते समय शाखा को गहराई तक काटकर क्षतिग्रस्त नहीं करना चाहिए। यदि आपने पूरा संवहनी ऊतक काट दिया या शाखा को गंभीर रूप से घायल कर दिया तो जड़ बनने की बजाय कटिंग सड़ सकती है। इसलिए यह काम साफ और तेज औजार से हल्के हाथ से करें।
कटिंग तैयार करने के बाद उसे तुरंत सूखने के लिए खुला न छोड़ें। घर पर उपलब्ध सामग्री से एक सरल प्रारंभिक उपचार किया जा सकता है। दिए गए स्रोत में लगभग 250 से 500 मिलीलीटर पानी में लगभग 1 चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर कटिंग को करीब 10 मिनट रखने की विधि बताई गई है। दालचीनी में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं जिनमें फफूंदरोधी गतिविधि पाई गई है, लेकिन इसे किसी प्रमाणित फफूंदनाशी का निश्चित विकल्प नहीं मानना चाहिए। इसका इस्तेमाल घरेलू प्रयोग के रूप में किया जा सकता है, लेकिन कटिंग की सफलता केवल दालचीनी पर निर्भर नहीं करती।
इसके बाद एलोवेरा जेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। ताजा एलोवेरा की पत्ती काटकर उसमें से निकलने वाले पीले लेटेक्स को अलग होने दें और फिर अंदर का साफ जेल लें। कटिंग के निचले हिस्से पर हल्की परत लगाई जा सकती है। एलोवेरा नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि इसमें मौजूद प्राकृतिक हार्मोन हर पौधे में निश्चित रूप से जड़ बना देंगे। यदि किसी पौधे की जड़ बनने की क्षमता कम है तो केवल एलोवेरा लगाने से परिणाम की गारंटी नहीं मिलती।
अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आता है सुघड़ और जल निकास वाला माध्यम तैयार करना। कटिंग के लिए ऐसी मिट्टी या माध्यम चाहिए जो नमी बनाए रखे लेकिन पानी जमा करके न रखे। स्रोत में जैविक पदार्थ वाली मिट्टी इस्तेमाल करने की बात कही गई है। आप अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी में कोकोपीट, रेत या अन्य उपयुक्त rooting medium मिलाकर ऐसा मिश्रण तैयार कर सकते हैं जिसमें हवा और नमी दोनों का संतुलन रहे। उदाहरण के लिए एक छोटा कंटेनर लेते समय उसमें जल निकासी के लिए नीचे कई छेद होना जरूरी है। यदि नीचे छेद नहीं होंगे और पानी जमा रहेगा तो कटिंग के आधार पर सड़न की संभावना बढ़ जाएगी।
कटिंग को लगभग 2 से 5 सेंटीमीटर तक माध्यम में लगाएं और आसपास की मिट्टी को हल्के हाथ से दबाएं ताकि शाखा हिले नहीं। कटिंग का स्थिर रहना बहुत जरूरी है। बार-बार हिलने से बनने वाली शुरुआती जड़ें टूट सकती हैं और जड़ बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। एक छोटे गमले या प्लास्टिक कप में एक से तीन कटिंग लगाई जा सकती हैं, लेकिन बहुत ज्यादा कटिंग एक ही कंटेनर में लगाने से हवा का आवागमन और नमी प्रबंधन कठिन हो सकता है।
पहली सिंचाई के समय पूरे माध्यम को समान रूप से नम करें और नीचे के छेदों से अतिरिक्त पानी निकलने दें। इसके बाद सबसे बड़ी गलती यह होती है कि लोग रोज बहुत अधिक पानी डालते रहते हैं। कटिंग को लगातार पानी में डुबोकर रखना जड़ बनने की गारंटी नहीं है। इसका उल्टा असर हो सकता है और कटिंग सड़ सकती है। इसलिए माध्यम नम रहे, लेकिन उसमें पानी खड़ा न हो। पानी देने से पहले ऊपरी सतह और कंटेनर के वजन या नमी की स्थिति देखकर निर्णय लें। गर्म और सूखे मौसम में नमी तेजी से खत्म हो सकती है, जबकि बरसात या ठंडे वातावरण में बार-बार पानी देने की जरूरत कम हो सकती है।
कटिंग को सीधे तेज धूप में रखने से बचें। जड़ बनने तक ऐसी जगह बेहतर रहती है जहां पर्याप्त रोशनी हो लेकिन दोपहर की तेज सीधी धूप न पड़े। इसका कारण यह है कि बिना जड़ों वाली कटिंग पानी का अवशोषण बहुत कम कर पाती है। अगर पत्तियों से पानी तेजी से बाहर निकलता रहा तो शाखा जल्दी मुरझा सकती है। दूसरी तरफ पूरी तरह अंधेरे में रखने से भी पौधे की सामान्य जैविक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए उजली लेकिन अप्रत्यक्ष रोशनी वाला स्थान अधिक उपयुक्त हो सकता है।
अब सवाल आता है कि जड़ कितने दिन में बनेगी? इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। कुछ पौधों में 15 से 20 दिन के आसपास शुरुआती जड़ें दिखाई दे सकती हैं, जबकि दूसरे पौधों में 30, 45, 60 दिन या उससे भी अधिक समय लग सकता है। स्रोत में 20 से 30 दिन में शुरुआती जड़ और लगभग 60 दिन में अच्छी जड़ बनने का उदाहरण दिया गया है तथा कुछ मामलों में 90 दिन तक कटिंग को मजबूत करने की बात कही गई है। लेकिन इसे हर पौधे के लिए निश्चित समय न मानें। तापमान, नमी, शाखा की उम्र, पौधे की प्रजाति, माध्यम और कटिंग लेने का मौसम सभी परिणाम को प्रभावित करते हैं।
सबसे बड़ी गलती यह होगी कि 10 या 15 दिन बाद कटिंग को निकालकर जड़ देखने लगें। इससे नई बनी जड़ें टूट सकती हैं। शुरुआत में ऊपर से पौधा बिल्कुल सामान्य दिखाई दे सकता है और कई दिनों तक कोई नई वृद्धि नहीं दिखाई देगी। धैर्य रखना जरूरी है। यदि शाखा पूरी तरह काली होकर सड़ने लगे, बदबू आए या आधार नरम हो जाए तो यह खराब संकेत है। ऐसी स्थिति में सड़न के कारण को पहचानकर उस कटिंग को अलग कर देना चाहिए।
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि कटिंग से तैयार पौधा हमेशा मूल पौधे जैसा ही प्रदर्शन करेगा, इसकी भी गारंटी नहीं होती। यदि आप ऐसी शाखा लेते हैं जो किसी अच्छे फल देने वाले पौधे से है, तो उस पौधे के आनुवंशिक गुण उसी पौधे से जुड़े रहते हैं। यही कारण है कि कई बागवान अपनी पसंदीदा किस्मों को कटिंग या अन्य vegetative propagation methods से बढ़ाना पसंद करते हैं। लेकिन फलदार पौधों में हर प्रजाति कटिंग से समान सफलता नहीं देती। इसलिए पहले अपने पौधे की propagation क्षमता को समझना जरूरी है।
अगर कटिंग सफल हो जाती है और नई पत्तियां निकलने लगती हैं, तो उसे तुरंत तेज धूप में न रखें। धीरे-धीरे प्रकाश बढ़ाएं। जब जड़ प्रणाली कंटेनर में पर्याप्त विकसित हो जाए तभी उसे बड़े गमले, ग्रो बैग या जमीन में स्थानांतरित करें। स्थानांतरण के बाद शुरुआती कुछ दिनों तक नमी का विशेष ध्यान रखें। बहुत ज्यादा खाद, यूरिया या तेज रासायनिक उर्वरक तुरंत डालने से बचें, क्योंकि नई जड़ें संवेदनशील होती हैं।
इस पूरी प्रक्रिया से एक बात स्पष्ट होती है कि पौधे की कटिंग से नया पौधा तैयार करना कोई जादुई तरीका नहीं है। सफलता तीन चीजों के संतुलन पर बहुत निर्भर करती है—स्वस्थ कटिंग, नियंत्रित नमी और अच्छा rooting environment। दालचीनी या एलोवेरा जैसे घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं, लेकिन इन्हें चमत्कारी जड़ बनाने वाला समाधान समझना सही नहीं है। यदि किसी प्रजाति में प्राकृतिक रूप से rooting कम होती है, तो प्रमाणित rooting hormone जैसे IBA आधारित उत्पाद का इस्तेमाल लेबल के अनुसार किया जा सकता है। यहां भी मात्रा पौधे और उत्पाद के अनुसार अलग होती है, इसलिए बिना लेबल देखे कोई निश्चित डोज देना उचित नहीं है।
अगर आपके घर में अनार, गुलाब, बोगनवेलिया, अंगूर या कोई दूसरा पौधा है जिसे आप कटिंग से बढ़ाना चाहते हैं, तो पहले एक साथ बहुत सारी शाखाएं न लगाएं। 5 से 10 स्वस्थ कटिंग से छोटा परीक्षण करें। यदि उनमें से अच्छी संख्या में जड़ बनती है तो उसी विधि को आगे बढ़ाएं। इससे समय, मेहनत और पौधों का नुकसान कम होगा। और सबसे जरूरी बात, किसी भी एक वीडियो में बताए गए तरीके को हर पौधे पर 100 प्रतिशत सफल मानकर न चलें। खेती और बागवानी में पौधे की प्रजाति, मौसम और स्थानीय परिस्थितियां परिणाम बदल देती हैं।
अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी हो तो इसे उन लोगों तक जरूर पहुंचाएं जो घर पर बिना ज्यादा खर्च के पौधों की नई पौध तैयार करना चाहते हैं। खासकर ऐसे किसान और बागवान जो अपने अच्छे फल देने वाले पौधों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए कटिंग propagation एक उपयोगी तकनीक हो सकती है, बशर्ते सही पौधे का चयन, साफ कटिंग, संतुलित नमी और उचित वातावरण रखा जाए।
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