"बसद खुलूस और अदब! कल की तकरीब में शिरकत फरमाकर आप तमाम ने हमारी खुशी को मुकम्मल बना दिया। जो दोस्त या अजीज किसी वजह से नहीं आ सके, उनकी कमी जरूर खली है, मगर उनकी नेक दुआएं साथ रहीं। और अगर जाने-अनजाने में मुझसे किसी को मुतवज्जे करना या दावत देना रह गया हो, तो मुझे छोटा समझकर दरगुज़र कीजिएगा। आप सबका प्यार ही हमारी असल सरमाया है।"