
मलवां विस्फोट की गुत्थी बरकरार, चार दिन बाद भी जांच बेनतीजा
80 प्रतिशत मलबा हटाया गया, सिलेंडर समेत हर संभावित कारण की जांच जारी
पांच मौतों के बाद फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार, पुलिस हर एंगल से कर रही पड़ताल
फतेहपुर। मलवां थाना क्षेत्र के बनियन मोहल्ले में हुए भीषण विस्फोट के चार दिन बाद भी हादसे की असली वजह सामने नहीं आ सकी है। पांच लोगों की दर्दनाक मौत और पूरे परिवार को उजाड़ देने वाली इस घटना की जांच लगातार जारी है। पुलिस, फोरेंसिक विशेषज्ञों और राहत-बचाव दल की टीम घटनास्थल से मिले हर साक्ष्य को वैज्ञानिक तरीके से परख रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने और फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही विस्फोट के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा।
सोमवार देर रात हुए इस भीषण विस्फोट ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। हादसे में फल व्यवसायी सुरेश गुप्ता के मकान की दूसरी मंजिल पूरी तरह ध्वस्त हो गई। चार कमरे, रसोई और शौचालय मलबे में तब्दील हो गए। इस दर्दनाक हादसे में अनूप गुप्ता, उनकी पत्नी अर्चना, भतीजे अनिकेत, नीशू और वेद की मौत हो गई, जबकि पूजा गंभीर रूप से घायल हो गई, जिनका इलाज कानपुर के हैलट अस्पताल में चल रहा है।
जांच में अब तक लगभग 80 प्रतिशत मलबा हटाया जा चुका है। पुलिस की प्राथमिक पड़ताल में दूसरी मंजिल पर बने करीब 10×12 फीट के हॉल के समीप स्थित रसोई वाले हिस्से को विस्फोट का संभावित केंद्र माना जा रहा है। मलबे से बर्तन और घरेलू सामान के अवशेष मिले हैं, जिससे आशंका है कि धमाका इसी क्षेत्र में हुआ होगा। हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है कि विस्फोट एलपीजी सिलेंडर के कारण हुआ या किसी अन्य ज्वलनशील अथवा विस्फोटक सामग्री के कारण।
पुलिस की टीम फोरेंसिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में मलबे की एक-एक परत हटाकर जांच कर रही है। विशेष रूप से गैस सिलेंडर, रेगुलेटर, पाइप और अन्य ऐसे अवशेष तलाशे जा रहे हैं जो विस्फोट की असली वजह तक पहुंचने में मदद कर सकें। साथ ही पुलिस आतिशबाजी सामग्री या अन्य संभावित पदार्थों के भंडारण संबंधी सभी पहलुओं की भी गंभीरता से जांच कर रही है।
घटनास्थल पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। जेसीबी और मजदूरों की मदद से लगातार मलबा हटाया जा रहा है। चार दिनों तक बंद रही गली में मलबा हटने के बाद आवागमन भी बहाल कर दिया गया है, लेकिन पूरे इलाके में अभी भी मातम और दहशत का माहौल बना हुआ है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर तकनीकी और वैज्ञानिक पहलू की गहन जांच की जा रही है। सभी संभावित कारणों की पुष्टि साक्ष्यों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर ही की जाएगी ताकि घटना की वास्तविक वजह सामने आ सके।
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं बल्कि सुरक्षा मानकों, ज्वलनशील पदार्थों के सुरक्षित भंडारण और आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय वैज्ञानिक जांच और निष्पक्ष कार्रवाई ही पीड़ित परिवार को न्याय दिला सकती है।
ND NEWS की अपील:यदि आपके घर या प्रतिष्ठान में एलपीजी सिलेंडर, ज्वलनशील रसायन या अन्य संवेदनशील सामग्री रखी जाती है तो निर्धारित सुरक्षा मानकों का अनिवार्य रूप से पालन करें। किसी भी संदिग्ध स्थिति की तत्काल सूचना प्रशासन और पुलिस को दें। प्रशासन से अपेक्षा है कि जांच को निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरा कर दोषियों या वास्तविक कारणों को सार्वजनिक करे, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
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