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*38 को फांसी, 11 को उम्रकैद, अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषियों की सजा बरकरार, गुजरात HC का बड़ा फैसला* गुजरात हाई कोर्ट का फैसला ​सजा बरकरार: जस्टिस ए. वाई. कोगजे और जस्टिस समीर दवे की डिवीजन बेंच ने सभी 49 दोषियों की सजा को ज्यों का त्यों रखा है। ​38 को फांसी: इनमें से 38 दोषियों को मौत की सजा (फांसी) सुनाई गई है। ​11 को उम्रकैद: बाकी 11 दोषियों को उनके अंतिम सांस तक के लिए आजीवन कारावास की सजा मिली है। ​मुआवजे का आदेश: हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को पीड़ितों को मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है। इसके तहत मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों को 5 लाख रुपये और मामूली रूप से घायलों को 1 लाख रुपये देने को कहा गया है। ​2008 अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट: क्या हुआ था? ​कब और कैसे: 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर में महज 70 मिनट के भीतर अलग-अलग जगहों पर 21 बम धमाके हुए थे। ​निशाने पर अस्पताल: आतंकियों ने सिविल अस्पताल, एलजी अस्पताल, बसों और भीड़भाड़ वाले बाजारों को निशाना बनाया था। यह पहली बार था जब आतंकियों ने अस्पतालों को भी बम धमाकों का टारगेट बनाया था। ​मौतें और घायल: इन धमाकों में 56 मासूम लोगों की जान चली गई थी और 200 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। ​आतंकी संगठन: पुलिस जांच में सामने आया था कि यह हमला प्रतिबंधित संगठन 'सिमी' (SIMI) से जुड़े आतंकी गुट इंडियन मुजाहिदीन (IM) ने 2002 के गुजरात दंगों का बदला लेने की नीयत से किया था। ​लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने 49 लोगों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और IPC की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। दोषियों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब अदालत ने खारिज कर दिया है।

Ballah, Karnal | Jul 7, 2026

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