Public App Logo
Jansamasya
News
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
रेलवे
Coronavirus
कांग्रेस
बीजेपी
Congress
Modi
Delhi
Viral
Dm
Rajasthan
Bollywood
Patna
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
उत्तरप्रदेश
Pmmodi
Rahulgandhi
Uttarpradesh
Haryana
Uttarakhand
जिलाधिकारी

स्वास्थ्य_विभाग

आशा भर्ती या खेल? जलालगढ़ की कई पंचायतों में चयन प्रक्रिया पर लगे बड़े आरोप भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल: क्या नियमों को दरकिनार कर हुई आशा बहाली? #Jalalgarh
#Purnia
#AshaBahali
#AshaRecruitment
#PHCJalalgarh
#PurniaNews
#BiharNews
#RecruitmentControversy
#InvestigationDemand
#Transparency
#PublicVoice
#FairSelection
#GovernmentGuidelines
#Accountability
#SocialJustice
#RuralHealth
#HealthDepartment
#BiharHealth
#JalalgarhPHC
#AshaWorker
#LocalNews
#BreakingNews
#GroundReport
#JanAawaz
#NyayKiMang
हिंदी हैशटैग:
#आशा_बहाली
#जलालगढ़
#पूर्णिया
#बिहार_समाचार
#जांच_की_मांग
#पारदर्शिता
#जनता_की_आवाज
#निष्पक्ष_जांच
#स्वास्थ्य_विभाग
#न्याय_की_मांग
#आशा_भर्ती
#गांव_की_खबर
#जनहित_का_मुद्दा
#भर्ती_विवाद
#पूर्णिया_न्यूज

आशा भर्ती या खेल? जलालगढ़ की कई पंचायतों में चयन प्रक्रिया पर लगे बड़े आरोप भर्ती प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल: क्या नियमों को दरकिनार कर हुई आशा बहाली? #Jalalgarh #Purnia #AshaBahali #AshaRecruitment #PHCJalalgarh #PurniaNews #BiharNews #RecruitmentControversy #InvestigationDemand #Transparency #PublicVoice #FairSelection #GovernmentGuidelines #Accountability #SocialJustice #RuralHealth #HealthDepartment #BiharHealth #JalalgarhPHC #AshaWorker #LocalNews #BreakingNews #GroundReport #JanAawaz #NyayKiMang हिंदी हैशटैग: #आशा_बहाली #जलालगढ़ #पूर्णिया #बिहार_समाचार #जांच_की_मांग #पारदर्शिता #जनता_की_आवाज #निष्पक्ष_जांच #स्वास्थ्य_विभाग #न्याय_की_मांग #आशा_भर्ती #गांव_की_खबर #जनहित_का_मुद्दा #भर्ती_विवाद #पूर्णिया_न्यूज

Jalalgarh, Purnia | Jul 13, 2026

बंद पड़े पीपीसी में कर दिया ट्रांसफर!

18 साल से एक ही सीएचसी में तैनाती, अब 'कागजों में' स्थानांतरण का आरोप; सीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

जनपद जालौन का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 

इस बार मामला शासन की स्थानांतरण नीति के कथित उल्लंघन और आईजीआरएस शिकायत के बाद जारी हुए स्थानांतरण आदेश को लेकर है।
 शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 18 वर्षों से सीएचसी जालौन में तैनात चीफ फार्मासिस्ट को वास्तव में हटाने के बजाय केवल कागजों में ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीपीसी) से संबद्ध दिखा दिया गया, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं संचालित ही नहीं हो रहीं।

शिकायत के अनुसार शासन का उद्देश्य वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का वास्तविक स्थानांतरण कर प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। लेकिन आरोप है कि इस मामले में आदेश की मंशा को दरकिनार करते हुए केवल औपचारिक कार्रवाई कर दी गई, जिससे संबंधित कर्मचारी उसी व्यवस्था में बने रहे।

मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या 60000260159142 से जुड़ा है। शिकायत के निस्तारण में सीएमओ कार्यालय ने बताया कि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में 1 जुलाई 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। 
लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस पीपीसी में स्थानांतरण दिखाया गया है, वहां न नियमित चिकित्सकीय व्यवस्था है और न ही प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं। 
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तविक स्थानांतरण है या केवल कागजी औपचारिकता?

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी संबंधित कर्मचारी ने सीएचसी का कार्यभार पूरी तरह नहीं छोड़ा।
 यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो विभागीय आदेशों के पालन और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं।

अब शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। 
उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित पीपीसी की वास्तविक स्थिति क्या है, वहां स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं या नहीं, कर्मचारी ने वास्तव में कार्यभार ग्रहण किया या नहीं, और स्थानांतरण केवल अभिलेखों तक सीमित रहा या धरातल पर भी लागू हुआ।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, आदेशों की अवहेलना या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाए। 
उनका कहना है कि यदि इस प्रकार केवल कागजों में स्थानांतरण कर शासन के आदेशों को निष्प्रभावी बनाया जाता रहा तो स्थानांतरण नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे।

नोट: इस समाचार में प्रकाशित आरोप शिकायतकर्ता एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। 
मामले की आधिकारिक पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

 अब आपकी बारी...

क्या अगर कोई पीपीसी वास्तव में बंद या निष्क्रिय है, तो वहां किया गया स्थानांतरण प्रभावी माना जाना चाहिए?

क्या वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों के मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है?

 आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

#BreakingNews #Jalaun #Urai #CMOJalaun #HealthDepartment #TransferPolicy #IGRS #CHCJalaun #PPCJalaun #ChiefPharmacist #UttarPradesh #HealthSystem #AdministrativeTransparency #Investigation #Accountability #PublicInterest #GovernmentOrders #JalaunNews #HindiNews #LatestNews #GroundReport #SonuMaharaj #NewsUpdate #स्वास्थ्य_विभाग #सीएमओ #स्थानांतरण_विवाद #आईजीआरएस #जालौन #उरई #जनहित

बंद पड़े पीपीसी में कर दिया ट्रांसफर! 18 साल से एक ही सीएचसी में तैनाती, अब 'कागजों में' स्थानांतरण का आरोप; सीएमओ कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल जनपद जालौन का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। इस बार मामला शासन की स्थानांतरण नीति के कथित उल्लंघन और आईजीआरएस शिकायत के बाद जारी हुए स्थानांतरण आदेश को लेकर है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि करीब 18 वर्षों से सीएचसी जालौन में तैनात चीफ फार्मासिस्ट को वास्तव में हटाने के बजाय केवल कागजों में ऐसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीपीसी) से संबद्ध दिखा दिया गया, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाएं संचालित ही नहीं हो रहीं। शिकायत के अनुसार शासन का उद्देश्य वर्षों से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का वास्तविक स्थानांतरण कर प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। लेकिन आरोप है कि इस मामले में आदेश की मंशा को दरकिनार करते हुए केवल औपचारिक कार्रवाई कर दी गई, जिससे संबंधित कर्मचारी उसी व्यवस्था में बने रहे। मामला आईजीआरएस शिकायत संख्या 60000260159142 से जुड़ा है। शिकायत के निस्तारण में सीएमओ कार्यालय ने बताया कि महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में 1 जुलाई 2026 को स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। लेकिन शिकायतकर्ता का दावा है कि जिस पीपीसी में स्थानांतरण दिखाया गया है, वहां न नियमित चिकित्सकीय व्यवस्था है और न ही प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं संचालित हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यह वास्तविक स्थानांतरण है या केवल कागजी औपचारिकता? शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थानांतरण आदेश के बाद भी संबंधित कर्मचारी ने सीएचसी का कार्यभार पूरी तरह नहीं छोड़ा। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो विभागीय आदेशों के पालन और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं। अब शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट किया जाए कि संबंधित पीपीसी की वास्तविक स्थिति क्या है, वहां स्वास्थ्य सेवाएं चल रही हैं या नहीं, कर्मचारी ने वास्तव में कार्यभार ग्रहण किया या नहीं, और स्थानांतरण केवल अभिलेखों तक सीमित रहा या धरातल पर भी लागू हुआ। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी, आदेशों की अवहेलना या अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध सख्त विभागीय और विधिक कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि इस प्रकार केवल कागजों में स्थानांतरण कर शासन के आदेशों को निष्प्रभावी बनाया जाता रहा तो स्थानांतरण नीति की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगेंगे। नोट: इस समाचार में प्रकाशित आरोप शिकायतकर्ता एवं उपलब्ध दस्तावेजों पर आधारित हैं। मामले की आधिकारिक पुष्टि सक्षम प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अब आपकी बारी... क्या अगर कोई पीपीसी वास्तव में बंद या निष्क्रिय है, तो वहां किया गया स्थानांतरण प्रभावी माना जाना चाहिए? क्या वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात कर्मचारियों के मामलों में पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई जरूरी है? आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। #BreakingNews #Jalaun #Urai #CMOJalaun #HealthDepartment #TransferPolicy #IGRS #CHCJalaun #PPCJalaun #ChiefPharmacist #UttarPradesh #HealthSystem #AdministrativeTransparency #Investigation #Accountability #PublicInterest #GovernmentOrders #JalaunNews #HindiNews #LatestNews #GroundReport #SonuMaharaj #NewsUpdate #स्वास्थ्य_विभाग #सीएमओ #स्थानांतरण_विवाद #आईजीआरएस #जालौन #उरई #जनहित

Kalpi, Jalaun | Jul 8, 2026

मानदेय और EPF में गड़बड़ी का आरोप, स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कलेक्टर से लगाई गुहार
छह माह से भुगतान लंबित होने का आरोप, आउटसोर्स कर्मचारियों ने उठाई जांच की मांग
वेतन और ईपीएफ को लेकर नाराज स्वास्थ्य कर्मी, जनसुनवाई में दोबारा पहुंची शिकायत
रीवा स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों का आरोप, मानदेय भुगतान में अनियमितता
सामाजिक सुरक्षा और बकाया भुगतान की मांग, आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रशासन से मांगा न्याय#रीवा #RewaNews #MPNews #मध्यप्रदेश_न्यूज #स्वास्थ्य_विभाग #HealthDepartment #OutsourceEmployees #आउटसोर्स_कर्मचारी #मानदेय_की_मांग #EPF #कर्मचारी_समस्या #जनसुनवाई #कलेक्टर_रीवा #श्रमिक_अधिकार

मानदेय और EPF में गड़बड़ी का आरोप, स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कलेक्टर से लगाई गुहार छह माह से भुगतान लंबित होने का आरोप, आउटसोर्स कर्मचारियों ने उठाई जांच की मांग वेतन और ईपीएफ को लेकर नाराज स्वास्थ्य कर्मी, जनसुनवाई में दोबारा पहुंची शिकायत रीवा स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्स कर्मचारियों का आरोप, मानदेय भुगतान में अनियमितता सामाजिक सुरक्षा और बकाया भुगतान की मांग, आउटसोर्स कर्मचारियों ने प्रशासन से मांगा न्याय#रीवा #RewaNews #MPNews #मध्यप्रदेश_न्यूज #स्वास्थ्य_विभाग #HealthDepartment #OutsourceEmployees #आउटसोर्स_कर्मचारी #मानदेय_की_मांग #EPF #कर्मचारी_समस्या #जनसुनवाई #कलेक्टर_रीवा #श्रमिक_अधिकार

Madhya Pradesh, India | Jun 16, 2026

Latest स्वास्थ्य_विभाग News Videos - Watch the Latest News of July 22, 2026 | Public App