नगर परिषद की गोचर भूमि पर दिन-दहाड़े कब्जे का प्रयास: करोड़ों की सरकारी जमीन पर भरी नींव, काम रुकवाया
"सरकारी जमीन देखी नहीं कि भूमाफियाओं का GPS चालू!"
"गोचर भूमि भी बोली — मेरा भी कोई रखवाला है या नहीं?"
मुख्य प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुँचा मामला — क्या प्रशासन बचा पाएगा गोचर भूमि?
न्यूज़ ब्यूरो।
शहर के बरडिया बालाजी के सामने मेन रोड स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की कथित सरकारी गोचर/चरागाह भूमि पर एक रसूखदार नेता द्वारा पत्थरों की भरवाई कर नींव तैयार करने का कार्य कराया जा रहा था।
सूचना मिलने पर नगर परिषद की टीम तुरंत मौके पर पहुँची और चल रहे अवैध निर्माण कार्य को रुकवाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान मौके पर परिषद की टीम और निर्माण करवा रहे पक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। आरोप है कि कार्रवाई को प्रभावित करने के लिए राजनीतिक रसूख और ऊँचे संपर्कों की धौंस दिखाने का प्रयास किया गया।
दबाव बनाने की कोशिश, मशीन हटाने की रही चर्चा
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, जब नगर परिषद द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी, तो पहले संबंधित विभाग के बड़े अधिकारियों का हवाला दिया गया। इसके बाद कथित रूप से राजस्व अधिकारियों से 'बात कर लेने' का दावा भी किया गया। मौके पर स्थिति को प्रभावित करने और नगर परिषद की मशीन को वहाँ से हटाने को लेकर भी कथित तौर पर दबाव बनाने की चर्चाएँ गर्म रहीं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
अब यह पूरा मामला उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आ चुका है। शहर में अब यही बड़ा सवाल उठ रहा है कि यदि यह भूमि वास्तव में गोचर/चरागाह श्रेणी की है, तो क्या जिला प्रशासन और जिला कलेक्टर इस कथित अतिक्रमण को पूरी तरह रुकवाकर सरकारी भूमि को भूमाफियाओं से मुक्त करा पाएंगे या नहीं।
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Ladpura, Kota | Jun 4, 2026