Public App Logo
Jansamasya
News
पुलिस
Maharashtra
Bjp
National
Police
Bihar
India
Coronavirus
किसान
कांग्रेस
मौत
Accident
Congress
Modi
Delhi
Viral
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
Mp
Madhyapradesh
Pmmodi
Kerala
Rahulgandhi
Chhattisgarh
Uttarpradesh
Haryana

Lucknowazadari

Muharram 2026: मोहर्रम का चांद और कर्बला की वो कहानी जिसे सुन रो पड़े लोग | Imam Hussain | Karbala

🚨 नए इस्लामी साल का आग़ाज़... मोहर्रम की तैयारियां तेज़, आज देखा जाएगा चांद! 🚨

नाज़रीन, हिजरी कैलेंडर का आख़िरी महीना अब रुख़्सत हो रहा है और आज शाम मोहर्रम-उल-हराम का चांद देखा जाएगा। अगर आज चांद का दीदार होता है, तो कल से न सिर्फ़ नए इस्लामी साल का आग़ाज़ हो जाएगा, बल्कि ग़म-ए-हुसैन का वो मुक़द्दस महीना भी शुरू हो जाएगा जिसकी दास्तान सुनकर हर इंसान की आंखें नम हो जाती हैं।

🖤 बाज़ारों में अक़ीदत का मंज़र, तैयारियां उरूज पर:
मोहर्रम के चांद के इंतेज़ार के साथ ही देश भर में अज़ादारों की तैयारियां तेज़ हो चुकी हैं। यह महीना जश्न का नहीं, बल्कि ईशार, क़ुर्बानी और बेइंतहा ग़म का महीना है। यही वजह है कि लोग अपने घरों, अज़ाख़ानों और इमामबाड़ों को मातम के लिए तैयार कर रहे हैं। बाज़ारों में ताज़िया, अलम और ख़ास तौर पर मातमी काले लिबास की ख़रीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी जा रही है।

👑 कल निकलेगा लखनऊ का ऐतिहासिक 'शाही ज़री का जुलूस':
अगर आज चांद नज़र आ जाता है, तो रिवायत के मुताबिक़ कल अदब के शहर लखनऊ में तारीख़ी और रिवायती 'शाही ज़री का जुलूस' निकाला जाएगा। काले लिबास में मलबूस, नंगे पैर और 'या हुसैन, या हुसैन' की सदाओं के साथ हज़ारों-लाखों अज़ादार कर्बला के शहीदों को नज़राना-ए-अक़ीदत पेश करेंगे।

💔 क्यों रोती है पूरी दुनिया इस महीने में?
मोहर्रम महज़ एक तारीख़ या महीना नहीं है, बल्कि यह नाम है उस अज़ीम क़ुर्बानी का जो नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 जांनिसार साथियों ने कर्बला के तपते मैदान में दी थी। ज़ालिम यज़ीद के ज़ुल्म के आगे सर झुकाने से साफ़ इंकार करते हुए, तीन दिन के भूखे-प्यासे इमाम हुसैन ने अपना सर तो कटा दिया, लेकिन इंसानियत और हक़ का परचम झुकने नहीं दिया।

शायर ने क्या ख़ूब कहा है:

"क़त्ल-ए-हुसैन असल में मर्ग-ए-यज़ीद है,
इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद।"

यही वजह है कि हुसैन का ग़म किसी एक मज़हब या फ़िरक़े तक महदूद (सीमित) नहीं है। जो भी इंसानियत और इंसाफ़ को मानता है, वो हुसैन का अज़ादार है। यज़ीद इतिहास के पन्नों में दफ़्न हो गया, लेकिन मौला हुसैन आज भी दुनिया के करोड़ों दिलों पर हुकूमत कर रहे हैं।

अल्लाह पाक इस नए इस्लामी साल को पूरी इंसानियत के लिए अमन, भाईचारे और सलामती का साल बनाए। (आमीन)

इस मुक़द्दस और ग़म के महीने में मौला हुसैन के पैग़ाम-ए-अमन को दुनिया तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। 🙏

#Muharram #YaHussain #Karbala #ImamHussain #IslamicNewYear #LucknowAzadari #ShahiZariJaloos #DastakLiveNews #BreakingNews

Muharram 2026: मोहर्रम का चांद और कर्बला की वो कहानी जिसे सुन रो पड़े लोग | Imam Hussain | Karbala 🚨 नए इस्लामी साल का आग़ाज़... मोहर्रम की तैयारियां तेज़, आज देखा जाएगा चांद! 🚨 नाज़रीन, हिजरी कैलेंडर का आख़िरी महीना अब रुख़्सत हो रहा है और आज शाम मोहर्रम-उल-हराम का चांद देखा जाएगा। अगर आज चांद का दीदार होता है, तो कल से न सिर्फ़ नए इस्लामी साल का आग़ाज़ हो जाएगा, बल्कि ग़म-ए-हुसैन का वो मुक़द्दस महीना भी शुरू हो जाएगा जिसकी दास्तान सुनकर हर इंसान की आंखें नम हो जाती हैं। 🖤 बाज़ारों में अक़ीदत का मंज़र, तैयारियां उरूज पर: मोहर्रम के चांद के इंतेज़ार के साथ ही देश भर में अज़ादारों की तैयारियां तेज़ हो चुकी हैं। यह महीना जश्न का नहीं, बल्कि ईशार, क़ुर्बानी और बेइंतहा ग़म का महीना है। यही वजह है कि लोग अपने घरों, अज़ाख़ानों और इमामबाड़ों को मातम के लिए तैयार कर रहे हैं। बाज़ारों में ताज़िया, अलम और ख़ास तौर पर मातमी काले लिबास की ख़रीदारी के लिए लोगों की भीड़ देखी जा रही है। 👑 कल निकलेगा लखनऊ का ऐतिहासिक 'शाही ज़री का जुलूस': अगर आज चांद नज़र आ जाता है, तो रिवायत के मुताबिक़ कल अदब के शहर लखनऊ में तारीख़ी और रिवायती 'शाही ज़री का जुलूस' निकाला जाएगा। काले लिबास में मलबूस, नंगे पैर और 'या हुसैन, या हुसैन' की सदाओं के साथ हज़ारों-लाखों अज़ादार कर्बला के शहीदों को नज़राना-ए-अक़ीदत पेश करेंगे। 💔 क्यों रोती है पूरी दुनिया इस महीने में? मोहर्रम महज़ एक तारीख़ या महीना नहीं है, बल्कि यह नाम है उस अज़ीम क़ुर्बानी का जो नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके 72 जांनिसार साथियों ने कर्बला के तपते मैदान में दी थी। ज़ालिम यज़ीद के ज़ुल्म के आगे सर झुकाने से साफ़ इंकार करते हुए, तीन दिन के भूखे-प्यासे इमाम हुसैन ने अपना सर तो कटा दिया, लेकिन इंसानियत और हक़ का परचम झुकने नहीं दिया। शायर ने क्या ख़ूब कहा है: "क़त्ल-ए-हुसैन असल में मर्ग-ए-यज़ीद है, इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद।" यही वजह है कि हुसैन का ग़म किसी एक मज़हब या फ़िरक़े तक महदूद (सीमित) नहीं है। जो भी इंसानियत और इंसाफ़ को मानता है, वो हुसैन का अज़ादार है। यज़ीद इतिहास के पन्नों में दफ़्न हो गया, लेकिन मौला हुसैन आज भी दुनिया के करोड़ों दिलों पर हुकूमत कर रहे हैं। अल्लाह पाक इस नए इस्लामी साल को पूरी इंसानियत के लिए अमन, भाईचारे और सलामती का साल बनाए। (आमीन) इस मुक़द्दस और ग़म के महीने में मौला हुसैन के पैग़ाम-ए-अमन को दुनिया तक पहुंचाने के लिए इस पोस्ट को ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करें। 🙏 #Muharram #YaHussain #Karbala #ImamHussain #IslamicNewYear #LucknowAzadari #ShahiZariJaloos #DastakLiveNews #BreakingNews

Parliament Street, New Delhi | Jun 16, 2026

Latest Lucknowazadari News Videos - Watch the Latest News of July 14, 2026 | Public App