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गरीब का दर्द या सिस्टम की नाकामी?

कागजों में पक्के मकान, हकीकत में त्रिपाल के नीचे जिंदगी! 
आखिर गरीब का हक कौन खा गया?

जनपद जालौन के महेवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अवैधेपुर से सिस्टम पर सवाल खड़े करती एक तस्वीर सामने आई है।

 यहां एक गरीब बुजुर्ग परिवार आज भी कच्ची दीवारों, खपरेल और टीन के सहारे बने जर्जर मकान में रहने को मजबूर है। 
बरसात में त्रिपाल ओढ़कर रातें काटनी पड़ती हैं, जबकि खाना आज भी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर बनाया जाता है।

परिवार का आरोप है कि कई बार सरकारी टीमों ने सर्वे किया, अधिकारी आए, कागज भरे गए, लेकिन आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। 
इतना ही नहीं, पिछली सूची में नाम होने के बावजूद बाद में काट दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।

अब सवाल यह है कि आखिर गरीब को उसका हक क्यों नहीं मिला? 
क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित हैं?
 क्या जिम्मेदारों की लापरवाही या भ्रष्टाचार गरीबों का आशियाना छीन रहा है?
 यदि पात्र परिवारों को आवास नहीं मिल रहा, तो योजनाओं का लाभ आखिर किसे मिल रहा है?

 वीडियो के आखिर तक देखिए और सुनिए गरीब परिवार की दर्दभरी कहानी।

 क्या आपके गांव में भी ऐसे गरीब परिवार हैं जिन्हें आज तक आवास नहीं मिला? 
क्या अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिला? 
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए।

#BreakingNews #Jalaun #Mhewa #Avaidhepur #PMAwasYojana #GraminNews #GroundReport #RuralIndia #VillageNews #UPNews #SonuMaharaj #PublicVoice #Corruption #Development #PoorPeople #HousingForAll #HindiNews #ViralNews #TrendingNews #RealityCheck #जनता_की_आवाज #गरीब_का_हक #आवास_योजना #भ्रष्टाचार #ग्राउंड_रिपोर्ट #जालौन #महेवा #अवैधेपुर #उत्तरप्रदेश #ब्रेकिंग_न्यूज

गरीब का दर्द या सिस्टम की नाकामी? कागजों में पक्के मकान, हकीकत में त्रिपाल के नीचे जिंदगी! आखिर गरीब का हक कौन खा गया? जनपद जालौन के महेवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत अवैधेपुर से सिस्टम पर सवाल खड़े करती एक तस्वीर सामने आई है। यहां एक गरीब बुजुर्ग परिवार आज भी कच्ची दीवारों, खपरेल और टीन के सहारे बने जर्जर मकान में रहने को मजबूर है। बरसात में त्रिपाल ओढ़कर रातें काटनी पड़ती हैं, जबकि खाना आज भी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी जलाकर बनाया जाता है। परिवार का आरोप है कि कई बार सरकारी टीमों ने सर्वे किया, अधिकारी आए, कागज भरे गए, लेकिन आज तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला। इतना ही नहीं, पिछली सूची में नाम होने के बावजूद बाद में काट दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। अब सवाल यह है कि आखिर गरीब को उसका हक क्यों नहीं मिला? क्या सरकारी योजनाएं सिर्फ फाइलों और कागजों तक सीमित हैं? क्या जिम्मेदारों की लापरवाही या भ्रष्टाचार गरीबों का आशियाना छीन रहा है? यदि पात्र परिवारों को आवास नहीं मिल रहा, तो योजनाओं का लाभ आखिर किसे मिल रहा है? वीडियो के आखिर तक देखिए और सुनिए गरीब परिवार की दर्दभरी कहानी। क्या आपके गांव में भी ऐसे गरीब परिवार हैं जिन्हें आज तक आवास नहीं मिला? क्या अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिला? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। #BreakingNews #Jalaun #Mhewa #Avaidhepur #PMAwasYojana #GraminNews #GroundReport #RuralIndia #VillageNews #UPNews #SonuMaharaj #PublicVoice #Corruption #Development #PoorPeople #HousingForAll #HindiNews #ViralNews #TrendingNews #RealityCheck #जनता_की_आवाज #गरीब_का_हक #आवास_योजना #भ्रष्टाचार #ग्राउंड_रिपोर्ट #जालौन #महेवा #अवैधेपुर #उत्तरप्रदेश #ब्रेकिंग_न्यूज

Kalpi, Jalaun | Jul 25, 2026

नमामि गंगे योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस! दो महीने बाद भी 27 घरों तक नहीं पहुंचा पानी

सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान, ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन

उरई/कालपी (जालौन) केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे पेयजल योजना ग्राम आटा में सवालों के घेरे में है। 
कालपी तहसील के कदौरा विकासखंड स्थित ग्राम आटा में करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन और लगाए गए नल कनेक्शन फिलहाल ग्रामीणों के लिए केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। 
आरोप है कि करीब दो महीने पहले कनेक्शन दिए जाने के बावजूद 27 घरों में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा, जिससे लोगों को रोजाना पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव के केवल आधे हिस्से में ही जलापूर्ति हो रही है, जबकि शेष 27 परिवार योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। 
कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया। 
मजबूर होकर ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार संजय को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल जलापूर्ति बहाल कराने की मांग की।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत का समाधान आज तक धरातल पर दिखाई नहीं दिया। 
यदि शिकायत के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिलती, तो फिर जनसुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

बरसात और उमस के बीच पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में योजना पूरी दिखाई जा सकती है, लेकिन हकीकत में दर्जनों परिवार अब भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं।
 लोगों का सवाल है कि जब पाइपलाइन बिछ चुकी है और कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, तो आखिर जलापूर्ति शुरू क्यों नहीं की जा रही? 
जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेगा?

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन 27 घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है, वहां तत्काल नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए।

ज्ञापन देने वालों में रानी विश्वकर्मा, गौरव कुमार, अवधेश कुमार, राममोहन, लखन कुमार, नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

अब सवाल उठते हैं…

- आखिर दो महीने बाद भी 27 घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंचा?
- क्या नमामि गंगे योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है?
- सीएम पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?
- क्या ग्रामीणों को उनका मूल अधिकार समय पर मिल पाएगा?

आपकी क्या राय है?
 क्या सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए? 
अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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नमामि गंगे योजना की पाइपलाइन बनी शोपीस! दो महीने बाद भी 27 घरों तक नहीं पहुंचा पानी सीएम पोर्टल पर शिकायत के बाद भी नहीं हुआ समाधान, ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन उरई/कालपी (जालौन) केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी नमामि गंगे पेयजल योजना ग्राम आटा में सवालों के घेरे में है। कालपी तहसील के कदौरा विकासखंड स्थित ग्राम आटा में करोड़ों रुपये की लागत से बिछाई गई पाइपलाइन और लगाए गए नल कनेक्शन फिलहाल ग्रामीणों के लिए केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। आरोप है कि करीब दो महीने पहले कनेक्शन दिए जाने के बावजूद 27 घरों में आज तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचा, जिससे लोगों को रोजाना पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के केवल आधे हिस्से में ही जलापूर्ति हो रही है, जबकि शेष 27 परिवार योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। कई बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से शिकायत की गई, लेकिन किसी ने भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया। मजबूर होकर ग्रामीणों ने अतिरिक्त मजिस्ट्रेट कुमार संजय को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल जलापूर्ति बहाल कराने की मांग की। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने इस गंभीर समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर भी दर्ज कराई थी, लेकिन शिकायत का समाधान आज तक धरातल पर दिखाई नहीं दिया। यदि शिकायत के बाद भी लोगों को राहत नहीं मिलती, तो फिर जनसुनवाई व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। बरसात और उमस के बीच पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में योजना पूरी दिखाई जा सकती है, लेकिन हकीकत में दर्जनों परिवार अब भी पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। लोगों का सवाल है कि जब पाइपलाइन बिछ चुकी है और कनेक्शन भी दे दिए गए हैं, तो आखिर जलापूर्ति शुरू क्यों नहीं की जा रही? जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेगा? ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और जिन 27 घरों तक अब तक पानी नहीं पहुंचा है, वहां तत्काल नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन देने वालों में रानी विश्वकर्मा, गौरव कुमार, अवधेश कुमार, राममोहन, लखन कुमार, नरेश कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अब सवाल उठते हैं… - आखिर दो महीने बाद भी 27 घरों तक पानी क्यों नहीं पहुंचा? - क्या नमामि गंगे योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है? - सीएम पोर्टल पर शिकायत के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? - जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी? - क्या ग्रामीणों को उनका मूल अधिकार समय पर मिल पाएगा? आपकी क्या राय है? क्या सरकारी योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। #BreakingNews #Jalaun #Kalpi #Kadaura #GramAata #NamamiGange #WaterCrisis #DrinkingWater #UPNews #CMPortal #IGRS #GraminNews #GroundReport #PublicIssue #VillageNews #Urai #SonuMaharaj #CrimeReporter #JalaunNews #UPGovernment #NalJalYojana #WaterSupply #ViralNews #HindiNews #LocalNews #Journalism #JanSamasya #PublicVoice #Bundelkhand

Kalpi, Jalaun | Jul 24, 2026

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