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नाथद्वारा के श्री द्वारकाधीश मन्दिर में पुष्प वितान मनोरथ की अलौकिक झाँकी 
#rajsamandnews #dwarkadhish 
श्री पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास – कांकरोली द्वारा संचालित श्री द्वारकाधीश मन्दिर – नाथद्वारा में तृतीय पीठाधीश श्री वागीशकुमारजी महाराजश्री के निर्देशन में अधिक मास के मनोरथों का दौर चल रहा है। प्रत्येक मनोरथ में जनसैलाब उमड़ रहा है और श्री द्वारकधीश प्रभु एवं श्री लालन के दर्शन कर धन्यता प्राप्त कर रहे है। आज शयन में पुष्प वितान के मनोरथ का दिव्य आयोजन किया गया। 
कहते है कि पुष्टिमार्ग में सेवा को बोझ या कर्मकांड नहीं माना जाता। यह विशुद्ध रूप से प्रेम का मार्ग है। पुष्पवितान मनोरथ इसी प्रेम-रस का एक सुंदर उदाहरण है जहाँ हर एक फूल भक्त के प्रेम का प्रतीक बनकर प्रभु को रिझाता है। पुष्प वितान मनोरथ में निज मन्दिर के भीतर दिव्य कुंज एवं फूल की छतरी का निर्माण किया गया। इसमें विविध प्रकार के सुगंधित और ताज़ा फूलों (गुलाब, मोगरा, कमल, चमेली) का उपयोग करके एक भव्य मंडप बनाया गया। समग्र मन्दिर परिसर को भी फूलों से सजाया गया। इसका उद्देश्य ठाकुरजी को साक्षात् प्राकृतिक वातावरण और निकुंज की अनुभूति कराना है। 
अधिक ज्येष्ठ मास की गर्मी में फूलों की शीतलता प्रभु को गर्मी से राहत और आनंद देने का भाव प्रकट करती है। यह मनोरथ एक भक्त के सर्वस्व न्योछावर करने की भावना को दर्शाता है। भक्त इन फूलों के माध्यम से अपनी सभी सांसारिक वासनाओं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। जब भक्त पुष्पवितान के नीचे बिराजे ठाकुरजी के दर्शन करते हैं, तो उन्हें ब्रज के वृंदावन और कुंजों में होने वाली रासलीला का अहसास होता है। इस मनोरथ का एक उद्देश्य प्रभु को ठंडक और सुगंध प्रदान करना होता है जो भक्तों के मन को भी शांति और शीतलता देता है। यदि सब कुछ शीतल करना है तो सितोपचार के विविध मनोरथों से श्री प्रभु की कृपा भक्तजनों पर बनी रहती है। यह अद्भुत दर्शन करीब दो घण्टे चले। मनोरथ दर्शन करने के लिए दुर दुर से भक्तजन उमड़े।

नाथद्वारा के श्री द्वारकाधीश मन्दिर में पुष्प वितान मनोरथ की अलौकिक झाँकी #rajsamandnews #dwarkadhish श्री पुष्टिमार्गीय तृतीय पीठ प्रन्यास – कांकरोली द्वारा संचालित श्री द्वारकाधीश मन्दिर – नाथद्वारा में तृतीय पीठाधीश श्री वागीशकुमारजी महाराजश्री के निर्देशन में अधिक मास के मनोरथों का दौर चल रहा है। प्रत्येक मनोरथ में जनसैलाब उमड़ रहा है और श्री द्वारकधीश प्रभु एवं श्री लालन के दर्शन कर धन्यता प्राप्त कर रहे है। आज शयन में पुष्प वितान के मनोरथ का दिव्य आयोजन किया गया। कहते है कि पुष्टिमार्ग में सेवा को बोझ या कर्मकांड नहीं माना जाता। यह विशुद्ध रूप से प्रेम का मार्ग है। पुष्पवितान मनोरथ इसी प्रेम-रस का एक सुंदर उदाहरण है जहाँ हर एक फूल भक्त के प्रेम का प्रतीक बनकर प्रभु को रिझाता है। पुष्प वितान मनोरथ में निज मन्दिर के भीतर दिव्य कुंज एवं फूल की छतरी का निर्माण किया गया। इसमें विविध प्रकार के सुगंधित और ताज़ा फूलों (गुलाब, मोगरा, कमल, चमेली) का उपयोग करके एक भव्य मंडप बनाया गया। समग्र मन्दिर परिसर को भी फूलों से सजाया गया। इसका उद्देश्य ठाकुरजी को साक्षात् प्राकृतिक वातावरण और निकुंज की अनुभूति कराना है। अधिक ज्येष्ठ मास की गर्मी में फूलों की शीतलता प्रभु को गर्मी से राहत और आनंद देने का भाव प्रकट करती है। यह मनोरथ एक भक्त के सर्वस्व न्योछावर करने की भावना को दर्शाता है। भक्त इन फूलों के माध्यम से अपनी सभी सांसारिक वासनाओं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देता है। जब भक्त पुष्पवितान के नीचे बिराजे ठाकुरजी के दर्शन करते हैं, तो उन्हें ब्रज के वृंदावन और कुंजों में होने वाली रासलीला का अहसास होता है। इस मनोरथ का एक उद्देश्य प्रभु को ठंडक और सुगंध प्रदान करना होता है जो भक्तों के मन को भी शांति और शीतलता देता है। यदि सब कुछ शीतल करना है तो सितोपचार के विविध मनोरथों से श्री प्रभु की कृपा भक्तजनों पर बनी रहती है। यह अद्भुत दर्शन करीब दो घण्टे चले। मनोरथ दर्शन करने के लिए दुर दुर से भक्तजन उमड़े।

Nathdwara, Rajsamand | Jun 12, 2026

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#Mathura #Dwarkadhish

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