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राजधानी भोपाल में गर्जे मांझी केवट समाज के अलग अलग संगठनों के पदाधिकारी..

मोहन सरकार के खिलाफ लगाए नारे..
आरक्षण नहीं, तो वोट नहीं..

आख़िर मांझी कौन हैं..?
👆👆👆👆👆👆
*"मांझी" कोई एक जाति नहीं है, ये एक समूह है.* इसमें कई उपजातियां आती हैं. सरकारी लिस्ट और समाज में मान्यता अलग-अलग है.

*1. सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से MP में:*

*ST लिस्ट में "मांझी" के साथ ये नाम दर्ज हैं:*
`मांझी, मझवार, सौंर`
मतलब MP सरकार के कागज में *मांझी, मझवार, सौंर* को एक ही मानकर ST का दर्जा है.

*2. समाज में "मांझी/निषाद वंश" की मुख्य उपजातियां:*

ये पूरा समूह *निषाद समाज* कहलाता है. इसमें मोटे तौर पर *12 से 15 प्रमुख उपजातियां* मानी जाती हैं. नाम अलग-अलग राज्यों में बदल जाते हैं:
उपजाति मुख्य काम/पहचान MP में स्टेटस
**1. केवट** नाव चलाना, घाट पर काम OBC
**2. मल्लाह** मछली पकड़ना, नाव चलाना OBC
**3. धीमर** मछली, पानी भरना OBC
**4. भोई** पालकी ढोना, मछली OBC
**5. कहार** पानी भरना, डोली उठाना OBC
**6. मांझी** नाव चलाना  ST
**7. मझवार** मछली, नाव ST
**8. सौंर** मछली, नाव ST
**9. तुरैहा** मछली पकड़ना OBC
**10. रैकवार** नाव, मछली OBC
**11. बाथम** नाव, खेती OBC
**12. बिन्द** नाव, मजदूरी OBC
13 कश्यप..OBC
`केवट मल्लाह भोई धीमर मांझी नहीं तो मांझी कौन`. 
*3. कुल संख्या का झोल:*

*पक्की संख्या कोई नहीं बता सकता* क्योंकि:
1. *1931 के बाद जातिगत जनगणना हुई नहीं.*
2. *एक ही उपजाति को अलग-अलग राज्य में अलग नाम से जानते हैं.* जैसे MP में "धीमर", UP में "कहार".
3. *सरकार ने 200+ सरनेम को "निषाद वंश" में माना है*, पर सबको आरक्षण अलग मिला है.
*गुना-चंबल बेल्ट में कौन-कौन मिलते हैं:*
गुना, भिंड, मुरैना, श्योपुर में *केवट, मल्लाह, धीमर, भोई, कहार, रैकवार* सबसे ज्यादा हैं. ये सब OBC में हैं. "मांझी" सरनेम वाले कम मिलते हैं और वो ST में हैं.

*कागज में:* MP में मांझी = मांझी + मझवार + सौंर = ST.
*समाज में:* केवट-मल्लाह-धीमर-भोई समेत 12-15 उपजातियां खुद को एक मानती हैं और ST दर्जे की मांग कर रही हैं.
आंदोलन इसी "उपजाति" के झगड़े की वजह से है.
@highlight Collector Office Guna समाजवादी पार्टी गुना Read News Media Agency @केवट समाज #gurukonyaydo #beo_neerajshukla_chorhai #retirementparsharm #mohan #vairal #कॉकरोच #केवट #modi #ओरिजनल

राजधानी भोपाल में गर्जे मांझी केवट समाज के अलग अलग संगठनों के पदाधिकारी.. मोहन सरकार के खिलाफ लगाए नारे.. आरक्षण नहीं, तो वोट नहीं.. आख़िर मांझी कौन हैं..? 👆👆👆👆👆👆 *"मांझी" कोई एक जाति नहीं है, ये एक समूह है.* इसमें कई उपजातियां आती हैं. सरकारी लिस्ट और समाज में मान्यता अलग-अलग है. *1. सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से MP में:* *ST लिस्ट में "मांझी" के साथ ये नाम दर्ज हैं:* `मांझी, मझवार, सौंर` मतलब MP सरकार के कागज में *मांझी, मझवार, सौंर* को एक ही मानकर ST का दर्जा है. *2. समाज में "मांझी/निषाद वंश" की मुख्य उपजातियां:* ये पूरा समूह *निषाद समाज* कहलाता है. इसमें मोटे तौर पर *12 से 15 प्रमुख उपजातियां* मानी जाती हैं. नाम अलग-अलग राज्यों में बदल जाते हैं: उपजाति मुख्य काम/पहचान MP में स्टेटस **1. केवट** नाव चलाना, घाट पर काम OBC **2. मल्लाह** मछली पकड़ना, नाव चलाना OBC **3. धीमर** मछली, पानी भरना OBC **4. भोई** पालकी ढोना, मछली OBC **5. कहार** पानी भरना, डोली उठाना OBC **6. मांझी** नाव चलाना ST **7. मझवार** मछली, नाव ST **8. सौंर** मछली, नाव ST **9. तुरैहा** मछली पकड़ना OBC **10. रैकवार** नाव, मछली OBC **11. बाथम** नाव, खेती OBC **12. बिन्द** नाव, मजदूरी OBC 13 कश्यप..OBC `केवट मल्लाह भोई धीमर मांझी नहीं तो मांझी कौन`. *3. कुल संख्या का झोल:* *पक्की संख्या कोई नहीं बता सकता* क्योंकि: 1. *1931 के बाद जातिगत जनगणना हुई नहीं.* 2. *एक ही उपजाति को अलग-अलग राज्य में अलग नाम से जानते हैं.* जैसे MP में "धीमर", UP में "कहार". 3. *सरकार ने 200+ सरनेम को "निषाद वंश" में माना है*, पर सबको आरक्षण अलग मिला है. *गुना-चंबल बेल्ट में कौन-कौन मिलते हैं:* गुना, भिंड, मुरैना, श्योपुर में *केवट, मल्लाह, धीमर, भोई, कहार, रैकवार* सबसे ज्यादा हैं. ये सब OBC में हैं. "मांझी" सरनेम वाले कम मिलते हैं और वो ST में हैं. *कागज में:* MP में मांझी = मांझी + मझवार + सौंर = ST. *समाज में:* केवट-मल्लाह-धीमर-भोई समेत 12-15 उपजातियां खुद को एक मानती हैं और ST दर्जे की मांग कर रही हैं. आंदोलन इसी "उपजाति" के झगड़े की वजह से है. @highlight Collector Office Guna समाजवादी पार्टी गुना Read News Media Agency @केवट समाज #gurukonyaydo #beo_neerajshukla_chorhai #retirementparsharm #mohan #vairal #कॉकरोच #केवट #modi #ओरिजनल

Guna Nagar, Guna | Jun 15, 2026

आख़िर मांझी कौन हैं..?

एक ही जाति को दो भागों में बाटना..?
यह दोहरी राजनीति आख़िर क्यों..?
कब मिलेगा मांझी आरक्षण..
भोपाल के शाहजहानी पार्क 🏞️ से मांझी केवट समाज के लोगों ने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा... #gurukonyaydo #कॉकरोच #केवट #संजय #mohan #retirementparsharm #beo_neerajshukla_chorhai #vairal #डॉक्टर #ओरिजनल #निषाद समाजवादी पार्टी गुना# #narndra #modi#

आख़िर मांझी कौन हैं..? एक ही जाति को दो भागों में बाटना..? यह दोहरी राजनीति आख़िर क्यों..? कब मिलेगा मांझी आरक्षण.. भोपाल के शाहजहानी पार्क 🏞️ से मांझी केवट समाज के लोगों ने सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा... #gurukonyaydo #कॉकरोच #केवट #संजय #mohan #retirementparsharm #beo_neerajshukla_chorhai #vairal #डॉक्टर #ओरिजनल #निषाद समाजवादी पार्टी गुना# #narndra #modi#

Guna Nagar, Guna | Jun 15, 2026

*गुना 'गुलाब गुनिया' देखेंगी दुनिया,,| गुना DM खुद खेतों में, किसानों को सिखा रहे जैविक खेती के गुर* 

'गुना गुलाब गुनिया, देखेगी दुनिया'... अब ये सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बनने जा रहा है.

गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल का अनोखा अभियान शुरू हो चुका है. DM साहब खुद गांव-गांव चौपाल लगाकर किसानों को जैविक खेती और गुलाब की खेती के लिए जागरूक कर रहे हैं.
कलेक्टर कन्याल का मकसद है कि गुना जिला गुलाबों की खुशबू और गुनिया नदी की स्वच्छता से पहचाना जाए. चौपाल में किसानों को गौ माता के गोबर और मूत्र से खाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है, ताकि जहरीली सब्जियों से छुटकारा मिले.
कलेक्टर का दावा है कि गुलाब की खेती से किसानों की आय दोगुनी होगी. साथ ही सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की पूरी जानकारी भी मौके पर दी जा रही है.
रीड न्यूज की DM साहब से एक्सक्लूसिव बातचीत. पूरी खबर देखिए.
*गुना ज़िले से किशन कश्यप के सात*

*आपको क्या लगता है, क्या गुना वाकई 'गुलाबों का शहर' बन पाएगा..?* कमेंट में जरूर बताएं...#sp #gurukonyaydo #beo_neerajshukla_chorhai #retirementparsharm #mohan #vairal #Guna #कॉकरोच #ओरिजनल #पार्टी guna# Part 3

*गुना 'गुलाब गुनिया' देखेंगी दुनिया,,| गुना DM खुद खेतों में, किसानों को सिखा रहे जैविक खेती के गुर* 'गुना गुलाब गुनिया, देखेगी दुनिया'... अब ये सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बनने जा रहा है. गुना कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल का अनोखा अभियान शुरू हो चुका है. DM साहब खुद गांव-गांव चौपाल लगाकर किसानों को जैविक खेती और गुलाब की खेती के लिए जागरूक कर रहे हैं. कलेक्टर कन्याल का मकसद है कि गुना जिला गुलाबों की खुशबू और गुनिया नदी की स्वच्छता से पहचाना जाए. चौपाल में किसानों को गौ माता के गोबर और मूत्र से खाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है, ताकि जहरीली सब्जियों से छुटकारा मिले. कलेक्टर का दावा है कि गुलाब की खेती से किसानों की आय दोगुनी होगी. साथ ही सरकारी योजनाओं और सब्सिडी की पूरी जानकारी भी मौके पर दी जा रही है. रीड न्यूज की DM साहब से एक्सक्लूसिव बातचीत. पूरी खबर देखिए. *गुना ज़िले से किशन कश्यप के सात* *आपको क्या लगता है, क्या गुना वाकई 'गुलाबों का शहर' बन पाएगा..?* कमेंट में जरूर बताएं...#sp #gurukonyaydo #beo_neerajshukla_chorhai #retirementparsharm #mohan #vairal #Guna #कॉकरोच #ओरिजनल #पार्टी guna# Part 3

Guna Nagar, Guna | Jun 12, 2026

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