खरगोन: यह कोई हरा-भरा मैदान नहीं, बल्कि घुटती हुई कुंदा नदी की चीख है! शहर के बीचों-बीच बहने वाली यह नदी आज जलकुंभी की मोटी चादर तले दफन हो चुकी है। प्रशासन की अनदेखी और सफाई के नाम पर हुई खानापूर्ति ने नदी के अस्तित्व को खतरे में डाल दिया है। हालत यह है कि पानी का प्रवाह पूरी तरह रुक चुका है और जमा गंदगी अब जहरीली सड़न में तब्दील हो गई है।