मध्य प्रदेश की टांडा गैंग पहले गूगल पर पॉश कॉलोनियों को सर्च करती थी, फिर रेकी करके चोरी की योजना बनाती और वारदात को अंजाम देती थी। यह गैंग दो गुटों में बंटी हुई थी। पहला गुट चोरी की घटनाओं को अंजाम देता था, जबकि दूसरा गुट चोरी के माल को ठिकाने लगाता था।