वैसे तो शहर में अधिकांश स्थानों पर होलिका दहन वाले दिन ही दंड लगाया जाता है , इसके बाद उसे जलाया जाता है। लेकिन शहर में कुछ स्थान ऐसे भी हैं जहां पर बरसों से होली के एक माह पहले होलिका दहन का डंडा लगा दिया जाता है। इसके पीछे मान्यता है कि पुराने समय में लोग इस डंडे के आधार पर ही मौसम के मिजाज का पता लगते थे।