बस्तर का गोंचा पर्व केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी आस्था, लोक परंपरा और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है।
भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा से जुड़े इस महापर्व की सबसे अनूठी परंपरा है ‘तुपकी सलामी’। बाँस से बनी पारंपरिक तुपकी और वन में मिलने वाले गोंचा (या स्थानीय रूप से प्रयुक्त फल/बीज) के माध्यम से प्रभु श्री जगन्नाथ को प्रतीकात्मक सलामी दी जाती है। यह परंपरा बस्तर की लोक आस्था, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक पहचान का अद्वितीय प्रतीक है, जो इसे देश के अन्य रथयात्रा उत्सवों से विशिष्ट बनाती है। यह पर्व वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।
जय जगन्नाथ! 🙏
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Bastar, Chhattisgarh | Jul 29, 2026