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चूरू में जमकर बरसे मेघ.. शहर की अधिकतर मुख्य सड़के पानी -पानी.. #4समाचार #letestnewshindi #churunewsupdate #fypシ゚viralシ #Manson #मेघ

Churu, Churu | Jun 18, 2026

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चूरू में श्रद्धा से याद किया डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को, राठौर, सारण सहित अनेक नेता व कार्यकर्ता रहे उपस्थित

#BJPChuru #churu #rajendrarathore #ShyamaPrasadMukherjee

चूरू में श्रद्धा से याद किया डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी को, राठौर, सारण सहित अनेक नेता व कार्यकर्ता रहे उपस्थित #BJPChuru #churu #rajendrarathore #ShyamaPrasadMukherjee

Churu, Churu | Jun 23, 2026

लाग्यो लाग्यो जेठ आषाढ़ कंवर तेजा रे, लगतो ही लाग्यो सावण भादवो...

मानूसन आगाज के साथ खेतों में जुटे अन्नदाता, अंचल में वर्षभर खाने के लिए अनाज उपजाने के लिए खरीफ की बुवाई, जुतने लगे खेत, परंपरागत तरीके से ऊंट  व हल से खेतों की बीजाई मन को लुभा रही, किसान कृषि यंत्रों से भी कर रहे बीजारोपण

चूरू। लाग्यो लाग्यो जेठ आषाढ़ कंवर तेजा रे, लगतो ही लाग्यो सावण भादवो, सुतो किस्योड़ी नींद कंवर तेजा रे, थारोड़ा साईना बीजैं बाजरौ..... हमारी संस्कृति व परंपराएं  जनमानस में इतनी रची— बसी हैं कि कोई भी इनसे अछूता नहीं है। हमारे परंपरागत लोकगीतों की धुन हमें ग्रामीण परिवेश की ओर मुड़ने के लिए मजबूर कर ही देती है। तेजा लोकगीत हमारी संस्कृति में इतना बसा हुआ है कि अंचल में इसकी मिठास अपनी अलग ही पहचान रखती है। जेठ के महीने में मानूसन आगाज के साथ हुई बरसात से जब अन्नदाता अपने खेतों में लौटते हैं तो अपनी फसल बुवाई के समय तेजा गीत गाकर अच्छे सूण (शगुन) करते हैं। अंचल में वर्षभर खाने के लिए अनाज उपजाने के लिए किसान जेठ— आषाढ़ महीने में खरीफ की फसल की बुवाई करते हैं। अभी बरसात हुई है, तो ग्रामीण अंचल में खेत जुतने लगे हैं। किसी भी रास्ते से गुजरते समय सड़क किनारे बुवाई करते किसान हमें आकर्षित करते ही हैं। नई पीढ़ी को यह दिखाना और अधिक प्रासंगिक हो जाता है, क्योंकि बदलते दौर के साथ हमारी कृषि तकनीकों में बहुत बदलाव आया है। 

परंपरागत तरीके से ऊंट  व हल से खेतों की बीजाई मन को लुभा रही

अंचल में रेगिस्तान के जहाज 'ऊंट' से फसल की बीजाई अधिक प्रचलित हैं, हालांकि कुछ इलाकों में बैल से भी जुताई किसान करते हैं। आज हम आधुनिकता के लिए इतना लालायित हो गए हैं कि हमें अपने परंपरागत तौर — तरीके सहेजने की आवश्यकता है। आधुनिक कृषि यंत्रों के कारण समय व आर्थिक लागत की बचत होने का फायदा देखकर अधिकतर किसान कृषि यंत्रों से बीजारोपण कर रहे हैं। वहीं अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हुए कुछ किसान आज भी उंट या बैल से खेती कर रहे हैं। किसान के हाथ में हल, कंधे पर बिजौलिया और तंगड़— पट्टे बांधकर पुराणी से उंट को हांकते खेतों की बीजाई मन को हर्षित करती है। तीन— चार हळाई भरने के साथ खेत में बनी चाय का भी अपना स्वाद है।  

घांघू के किसान मुकेश कुमार आज भी करते हैं परंपरागत हल से बुवाई
 
अंचल में बरसात हुई है और किसानों ने खेतों की ओर रूख किया है। ऐसे ही टहलते — टहलते जब गांव की ओर निकले तो खेतों में बुवाई चल ही रही थी। जेठ के महीने में बरसात से अधिकांश किसान मूंग व बाजरे की बुवाई कर रहे हैं। सड़क किनारे के सभी खेतों में नजरें दौड़ाने पर सिवाय ट्रैक्टर की बुवाई के कुछ नहीं। लेकिन चूरू जिले में अपनी ऐतिहासिक व धार्मिक पहचान रखने वाले घांघू गांव के किसान मुकेश कुमार मेघवाल आज भी परंपरागत हल से बुवाई करते हैं। मुकेश बताते हैं कि यह बात सच है कि आज के समय ट्रैक्टर आदि से बुवाई किसान की आर्थिक लागत के हिसाब से अधिक किफायती है, लेकिन खेतों की स्थिति और उपज के दृष्टिकोण से आज भी हल की बुवाई का कोई विकल्प नहीं है। मुकेश बताते हैं कि ट्रैक्टर आदि से बुवाई में खेत की उंची जमीन पर बुवाई संभव नहीं हैं, वहीं बीज भी किसान की इच्छानुरूप गहराई व अंतराल पर नहीं उपजाए जा सकते। जबकि हल से बुवाई में किसान की जमीन पर 100 प्रतिशत जोती जा सकती है और बीज भी अपनी इच्छानुरूप व एकसार उपजाए जा सकते हैं। हालांकि हल से बुवाई समय जरूर लगता है, लेकिन बीज की भी बचत होती है और खेतों में पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होता। इसी के साथ निनाण (खरपतवार की कटाई) भी आसान होता है और बरसात कम हो तो भी फसल ज्यादा दिन ठहर सकती है। वह बताते हैं हमें अपनी परंपरागत खेती की ओर ही रूख करना चाहिए। उनका कहना है कि जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। हमारी संस्कृति ही हमें उन्नयन की ओर लेकर जाती है।  

मूंग और बाजरा प्रमुख फसल

खरीफ की फसल में अंचल में  प्रमुखतया मूंग और बाजरे की फसलें उगाई जाती हैं। वहीं खरीफ में मोठ, मूंगफली, ग्वार, चंवला, उड़द की फसलें भी किसान उगाते हैं। वहीं स्थानीयता के आधार पर खरीफ फसल के साथ उगाई जाने वाली सब्जियां भी राजस्थानी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग हैं। इन सब्जियों में टिण्डसी, काचर, मतीरा, तुरई भी उगाई जाती है। चंवला और काचर, ग्वारफली, टिण्डसी व लोया की सब्जी अपने स्वाद के लिए राजस्थानी थाली में अनूठी पहचान रखते हैं।

आलेख - मनीष कुमार, सहायक जनसंपर्क अधिकारी चूरू

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लाग्यो लाग्यो जेठ आषाढ़ कंवर तेजा रे, लगतो ही लाग्यो सावण भादवो... मानूसन आगाज के साथ खेतों में जुटे अन्नदाता, अंचल में वर्षभर खाने के लिए अनाज उपजाने के लिए खरीफ की बुवाई, जुतने लगे खेत, परंपरागत तरीके से ऊंट व हल से खेतों की बीजाई मन को लुभा रही, किसान कृषि यंत्रों से भी कर रहे बीजारोपण चूरू। लाग्यो लाग्यो जेठ आषाढ़ कंवर तेजा रे, लगतो ही लाग्यो सावण भादवो, सुतो किस्योड़ी नींद कंवर तेजा रे, थारोड़ा साईना बीजैं बाजरौ..... हमारी संस्कृति व परंपराएं जनमानस में इतनी रची— बसी हैं कि कोई भी इनसे अछूता नहीं है। हमारे परंपरागत लोकगीतों की धुन हमें ग्रामीण परिवेश की ओर मुड़ने के लिए मजबूर कर ही देती है। तेजा लोकगीत हमारी संस्कृति में इतना बसा हुआ है कि अंचल में इसकी मिठास अपनी अलग ही पहचान रखती है। जेठ के महीने में मानूसन आगाज के साथ हुई बरसात से जब अन्नदाता अपने खेतों में लौटते हैं तो अपनी फसल बुवाई के समय तेजा गीत गाकर अच्छे सूण (शगुन) करते हैं। अंचल में वर्षभर खाने के लिए अनाज उपजाने के लिए किसान जेठ— आषाढ़ महीने में खरीफ की फसल की बुवाई करते हैं। अभी बरसात हुई है, तो ग्रामीण अंचल में खेत जुतने लगे हैं। किसी भी रास्ते से गुजरते समय सड़क किनारे बुवाई करते किसान हमें आकर्षित करते ही हैं। नई पीढ़ी को यह दिखाना और अधिक प्रासंगिक हो जाता है, क्योंकि बदलते दौर के साथ हमारी कृषि तकनीकों में बहुत बदलाव आया है। परंपरागत तरीके से ऊंट व हल से खेतों की बीजाई मन को लुभा रही अंचल में रेगिस्तान के जहाज 'ऊंट' से फसल की बीजाई अधिक प्रचलित हैं, हालांकि कुछ इलाकों में बैल से भी जुताई किसान करते हैं। आज हम आधुनिकता के लिए इतना लालायित हो गए हैं कि हमें अपने परंपरागत तौर — तरीके सहेजने की आवश्यकता है। आधुनिक कृषि यंत्रों के कारण समय व आर्थिक लागत की बचत होने का फायदा देखकर अधिकतर किसान कृषि यंत्रों से बीजारोपण कर रहे हैं। वहीं अपनी परंपराओं का निर्वहन करते हुए कुछ किसान आज भी उंट या बैल से खेती कर रहे हैं। किसान के हाथ में हल, कंधे पर बिजौलिया और तंगड़— पट्टे बांधकर पुराणी से उंट को हांकते खेतों की बीजाई मन को हर्षित करती है। तीन— चार हळाई भरने के साथ खेत में बनी चाय का भी अपना स्वाद है। घांघू के किसान मुकेश कुमार आज भी करते हैं परंपरागत हल से बुवाई अंचल में बरसात हुई है और किसानों ने खेतों की ओर रूख किया है। ऐसे ही टहलते — टहलते जब गांव की ओर निकले तो खेतों में बुवाई चल ही रही थी। जेठ के महीने में बरसात से अधिकांश किसान मूंग व बाजरे की बुवाई कर रहे हैं। सड़क किनारे के सभी खेतों में नजरें दौड़ाने पर सिवाय ट्रैक्टर की बुवाई के कुछ नहीं। लेकिन चूरू जिले में अपनी ऐतिहासिक व धार्मिक पहचान रखने वाले घांघू गांव के किसान मुकेश कुमार मेघवाल आज भी परंपरागत हल से बुवाई करते हैं। मुकेश बताते हैं कि यह बात सच है कि आज के समय ट्रैक्टर आदि से बुवाई किसान की आर्थिक लागत के हिसाब से अधिक किफायती है, लेकिन खेतों की स्थिति और उपज के दृष्टिकोण से आज भी हल की बुवाई का कोई विकल्प नहीं है। मुकेश बताते हैं कि ट्रैक्टर आदि से बुवाई में खेत की उंची जमीन पर बुवाई संभव नहीं हैं, वहीं बीज भी किसान की इच्छानुरूप गहराई व अंतराल पर नहीं उपजाए जा सकते। जबकि हल से बुवाई में किसान की जमीन पर 100 प्रतिशत जोती जा सकती है और बीज भी अपनी इच्छानुरूप व एकसार उपजाए जा सकते हैं। हालांकि हल से बुवाई समय जरूर लगता है, लेकिन बीज की भी बचत होती है और खेतों में पर्यावरण प्रदूषण भी नहीं होता। इसी के साथ निनाण (खरपतवार की कटाई) भी आसान होता है और बरसात कम हो तो भी फसल ज्यादा दिन ठहर सकती है। वह बताते हैं हमें अपनी परंपरागत खेती की ओर ही रूख करना चाहिए। उनका कहना है कि जड़ों से जुड़े रहना चाहिए। हमारी संस्कृति ही हमें उन्नयन की ओर लेकर जाती है। मूंग और बाजरा प्रमुख फसल खरीफ की फसल में अंचल में प्रमुखतया मूंग और बाजरे की फसलें उगाई जाती हैं। वहीं खरीफ में मोठ, मूंगफली, ग्वार, चंवला, उड़द की फसलें भी किसान उगाते हैं। वहीं स्थानीयता के आधार पर खरीफ फसल के साथ उगाई जाने वाली सब्जियां भी राजस्थानी संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग हैं। इन सब्जियों में टिण्डसी, काचर, मतीरा, तुरई भी उगाई जाती है। चंवला और काचर, ग्वारफली, टिण्डसी व लोया की सब्जी अपने स्वाद के लिए राजस्थानी थाली में अनूठी पहचान रखते हैं। आलेख - मनीष कुमार, सहायक जनसंपर्क अधिकारी चूरू #किसान #kisan #farming #farmers #churu

Churu, Churu | Jun 23, 2026

चूरू में बारिश से मौसम हुआ सुहाना

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Churu, Churu | Jun 23, 2026

चूरू में जमकर बरसे मेघ.. शहर की अधिकतर मुख्य सड़के पानी -पानी.. #4समाचार #letestnewshindi #churunewsupdate #fypシ゚viralシ #Manson #मेघ - Churu News