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शिमला शहरी: अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव 2026 का कल होगा भव्य आग़ाज़, तैयारियां शुरू

Shimla Urban, Shimla | Jun 7, 2026

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आईजीएमसी... गिरा पेड़..
#IGMCShimla #Shimla #TreeFall #HeavyRain #Monsoon #HimachalPradesh #WeatherAlert #BreakingNews #RainAlert #ShimlaNews

आईजीएमसी... गिरा पेड़.. #IGMCShimla #Shimla #TreeFall #HeavyRain #Monsoon #HimachalPradesh #WeatherAlert #BreakingNews #RainAlert #ShimlaNews

Shimla Urban, Shimla | Jul 11, 2026

*दक्षिण-पूर्व एशिया से आया मौसमी मेहमान:व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट*
*रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य को बनाया अपने पसंदीदा प्रजनन का ठिकाना*

किन्नौर: हर साल जब किन्नौर के ऊँचे पहाड़ों से बर्फ़ पिघलने लगती है, हिमालय का एक बेहद शर्मीला गीत-पक्षी चुपके से रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य की ऊँचाई वाली झाड़ियों में लौट आता है। कश्मल (बरबेरी), जूनिपर और बुरांश की घनी झाड़ियों की ओट में व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट (Luscinia phaenicuroides) अपना प्रजनन काल शुरू करता है। मई से सितम्बर तक का यह समय इस पक्षी को उसके प्रजनन काल में देखने का सबसे अच्छा मौका देता है। इन महीनों में अभयारण्य आने वाले पक्षी-प्रेमियों, प्रकृति-प्रेमियों और वन्यजीव फ़ोटोग्राफ़रों के पास इस दुर्लभ हिमालयी पक्षी को उसके अपने प्राकृतिक ठिकाने में देखने का बढ़िया अवसर रहता है।

हिमालय के कई पक्षियों की तरह यह आसानी से नज़र नहीं आता — दिखने से पहले ज़्यादातर सुनाई देता है। इसकी साफ़, घंटी-सी सीटी और उसके पीछे आती तीखी "टुक-टुक" पुकार ही बता देती है कि पक्षी आस-पास है, जबकि वह ख़ुद घनी झाड़ियों में छिपा रहता है। नर देखने में बेहद ख़ूबसूरत होता है — ऊपर से स्लेटी-नीला, नीचे सफ़ेद और पूँछ चटख़ लाल-भूरी। इसके उलट मादा भूरे रंग की होती है, जो आस-पास के परिवेश में ऐसे घुल जाती है कि नज़र आना मुश्किल हो जाता है।

डॉ. मल्यश्री भट्टाचार्य, ईबर्ड समीक्षक, बताती हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट ऊँचाई के हिसाब से मौसमी प्रवास करने वाला पक्षी है, जो मई से जून के बीच अपने प्रजनन-स्थल पर पहुँच जाता है। यह पेड़ों की ऊपरी सीमा (treeline) के पास की घनी झाड़ियाँ पसंद करता है और वहीं ज़मीन के क़रीब अच्छी तरह छिपा हुआ कटोरीनुमा घोंसला बनाकर आमतौर पर दो से तीन नीले या नीले-हरे अंडे देता है। उनका कहना है कि कम दख़ल वाली, सेहतमंद झाड़ियाँ इसके सफल प्रजनन के लिए बेहद ज़रूरी हैं, और यही बात रकछम–छितकुल अभयारण्य को पश्चिमी हिमालय में इस प्रजाति के लिए एक अहम प्रजनन-भूमि बना देती है।

अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा करते हुए श्री संतोष कुमार ठाकुर, क्षेत्रीय समन्वयक, बर्ड काउंट इंडिया एवं खंड वन अधिकारी, हिमाचल प्रदेश, कहते हैं कि यह पक्षी हर साल प्रजनन के लिए रकछम–छितकुल अभयारण्य की ऊँचाई वाली जगहों पर लौटता है और मई से सितम्बर तक यहीं रहता है। इन महीनों में यह अभयारण्य पूरे हिमाचल में इस पक्षी को उसके प्राकृतिक प्रजनन-स्थल में देखने के सबसे अच्छे ठिकानों में से एक बन जाता है। पिछले दो प्रजनन कालों के अपने अवलोकनों के आधार पर उन्होंने अभयारण्य में सात से आठ जगहों पर प्रजनन दर्ज किया है, और उनका मानना है कि व्यवस्थित सर्वेक्षण होने पर ऐसी और भी कई जगहें सामने आएँगी। वे यह भी बताते हैं कि प्रजनन काल में ये पक्षी ज़्यादातर कीड़ों के लार्वा खाते देखे गए हैं, जो इस दौरान इनके भोजन का बड़ा हिस्सा लगता है।

वन्यप्राणी विशेषज्ञ हिमांशु चौधरी स्थानीय वनस्पति के महत्व पर ज़ोर देते हुए बताते हैं कि काँटेदार कश्मल और घनी जूनिपर की झाड़ियाँ घोंसले के लिए बेहतरीन आड़ देती हैं और प्रजनन के दिनों में इन पक्षियों को शिकारियों से बचाती हैं। ये सेहतमंद झाड़ियाँ इस प्रजाति के सफल प्रजनन में बड़ी भूमिका निभाती हैं। सर्दियाँ नज़दीक आते ही रेडस्टार्ट नीचे उतरकर गरम, कम ऊँचाई वाली नदी-घाटियों और पहाड़ी ढलानों की ओर चला जाता है।

इन बातों का समर्थन करते हुए वन्यप्राणी विशेषज्ञ अंकुश ठाकुर कहते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट को देखने से पहले प्रायः सुना ही जाता है। रकछम–छितकुल अभयारण्य में प्रजनन काल के दौरान इसे दर्ज करने के साथ-साथ उन्होंने इसे रुपिन दर्रे और चांशल दर्रे के पास भी देखा है। उनका कहना है कि यह प्रजाति उत्तर-पश्चिम में लाहौल से आगे पांगी घाटी तक भी प्रजनन करती है — यानी पश्चिमी हिमालय में पेड़ों की ऊपरी सीमा के आस-पास के उपयुक्त इलाके इसकी प्रजनन-आबादी को सहारा देते हैं, और इन पर लगातार वैज्ञानिक अध्ययन तथा संरक्षण की ज़रूरत है।

इसी बात को आगे बढ़ाते हुए वन्यप्राणी विशेषज्ञ गैरी भट्टी कहते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट उन पक्षियों में से है जो धैर्य रखने वालों को इनाम देते हैं। इसका छिपा-छिपा रहने वाला स्वभाव याद दिलाता है कि हिमालय में आज भी कितने ही प्राकृतिक ख़ज़ाने ऐसे हैं जिन्हें समझा और सहेजा जाना बाक़ी है।

संरक्षण के इन प्रयासों की सराहना करते हुए श्रीमती प्रीति भंडारी, आईएफएस, अरण्यपाल शिमला  वाइल्डलाइफ ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण सबकी साझी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के वनअधिकारियों, वन्यप्राणी विशेषज्ञ और स्वयंसेवकों के समर्पण को सराहा, जिनकी लगातार मेहनत हिमाचल की समृद्ध जैव-विविधता को बचाने में मदद कर रही है।

डॉ. अमित कुमार शर्मा, आईएएस उपायुक्त, किन्नौर ने कहा कि किन्नौर की समृद्ध प्राकृतिक विरासत ज़िले की सबसे बड़ी ताक़तों में से एक है। उन्होंने कहा कि यहाँ के जंगलों और ऊँचाई वाले इलाकों की रक्षा बहुत ज़रूरी है, ताकि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट जैसी ख़ास प्रजातियाँ आने वाली पीढ़ियों तक फलती-फूलती रहें।

रकछम–छितकुल अभयारण्य की अपनी हालिया यात्रा के दौरान श्रीमती नीरजा वी.,आईपीएस, वरिष्ठ पुलिस महानिदेशक, चंडीगढ़ को इस पक्षी को उसके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिला। उन्होंने इसे एक यादगार अनुभव बताया और कहा कि ऐसे साफ़-सुथरे, अछूते नज़ारे हमें हिमालय की अनमोल जैव-विविधता को सहेजने की हमारी साझी ज़िम्मेदारी की याद दिलाते हैं।

श्री अशोक नेगी, आईएफएस उप अरण्यपाल  सराहन ने कहा कि रकछम–छितकुल अभयारण्य असाधारण जैव-विविधता का घर है, और व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट जैसी प्रजातियों को समझने और बचाने के लिए लगातार निगरानी और आवास-संरक्षण बेहद ज़रूरी है।

श्री डी. ढडवाल, प्रभागीय वन अधिकारी ने कहा कि हर नया रिकॉर्ड हिमालयी वन्यजीवन के बारे में हमारी समझ को और पुख़्ता करता है, और वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण आगे के संरक्षण कार्यों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है।

प्रजाति की समझ में योगदान देते हुए डॉ. अभिनव चौधरी बताते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट पूरे पश्चिमी हिमालय के उपयुक्त इलाकों में प्रजनन करता है। प्रजनन काल ख़त्म होते ही ये पक्षी अपने शीतकालीन ठिकानों की ओर लौट जाते हैं और इस तरह अपना सालाना मौसमी सफ़र पूरा करते हैं। उनका कहना है कि प्रजनन-आबादी पर लगातार नज़र रखने से शोधकर्ताओं को इस प्रजाति के जीवन और प्रवास के तौर-तरीक़ों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।

भले ही व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट अभी विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजाति नहीं मानी जाती, फिर भी सेहतमंद ऊँचाई वाली झाड़ियों पर इसकी निर्भरता इसे हिमालय की पारिस्थितिक सेहत का एक अहम संकेतक बना देती है। 

रकछम–छितकुल अभयारण्य से मिल रहे प्रजनन के बढ़ते रिकॉर्ड इन नाज़ुक पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण-महत्व को उजागर करते हैं, और यह भी याद दिलाते हैं कि हिमाचल के इस दिलचस्प पक्षी को बचाए रखने के लिए लगातार शोध, आवास-संरक्षण और लोगों की भागीदारी कितनी ज़रूरी है।

फ़ील्ड नोट्स
वैज्ञानिक नाम: Luscinia phaenicuroides
कुल (Family): Muscicapidae
प्रजनन ऊँचाई: 2,800–4,000 मीटर
प्रजनन काल: मई–सितम्बर
घोंसला: कटोरीनुमा, घनी झाड़ियों के नीचे ज़मीन पर या उसके पास बना हुआ
अंडे: 2–3, नीले से नीले-हरे रंग के
पसंदीदा आवास: कश्मल, जूनिपर और बुरांश वाली treeline झाड़ियाँ
प्रवास: ऊँचाई के हिसाब से मौसमी प्रवासी
हिमाचल में देखने की सबसे अच्छी जगह: रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य, किन्नौर

*दक्षिण-पूर्व एशिया से आया मौसमी मेहमान:व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट* *रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य को बनाया अपने पसंदीदा प्रजनन का ठिकाना* किन्नौर: हर साल जब किन्नौर के ऊँचे पहाड़ों से बर्फ़ पिघलने लगती है, हिमालय का एक बेहद शर्मीला गीत-पक्षी चुपके से रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य की ऊँचाई वाली झाड़ियों में लौट आता है। कश्मल (बरबेरी), जूनिपर और बुरांश की घनी झाड़ियों की ओट में व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट (Luscinia phaenicuroides) अपना प्रजनन काल शुरू करता है। मई से सितम्बर तक का यह समय इस पक्षी को उसके प्रजनन काल में देखने का सबसे अच्छा मौका देता है। इन महीनों में अभयारण्य आने वाले पक्षी-प्रेमियों, प्रकृति-प्रेमियों और वन्यजीव फ़ोटोग्राफ़रों के पास इस दुर्लभ हिमालयी पक्षी को उसके अपने प्राकृतिक ठिकाने में देखने का बढ़िया अवसर रहता है। हिमालय के कई पक्षियों की तरह यह आसानी से नज़र नहीं आता — दिखने से पहले ज़्यादातर सुनाई देता है। इसकी साफ़, घंटी-सी सीटी और उसके पीछे आती तीखी "टुक-टुक" पुकार ही बता देती है कि पक्षी आस-पास है, जबकि वह ख़ुद घनी झाड़ियों में छिपा रहता है। नर देखने में बेहद ख़ूबसूरत होता है — ऊपर से स्लेटी-नीला, नीचे सफ़ेद और पूँछ चटख़ लाल-भूरी। इसके उलट मादा भूरे रंग की होती है, जो आस-पास के परिवेश में ऐसे घुल जाती है कि नज़र आना मुश्किल हो जाता है। डॉ. मल्यश्री भट्टाचार्य, ईबर्ड समीक्षक, बताती हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट ऊँचाई के हिसाब से मौसमी प्रवास करने वाला पक्षी है, जो मई से जून के बीच अपने प्रजनन-स्थल पर पहुँच जाता है। यह पेड़ों की ऊपरी सीमा (treeline) के पास की घनी झाड़ियाँ पसंद करता है और वहीं ज़मीन के क़रीब अच्छी तरह छिपा हुआ कटोरीनुमा घोंसला बनाकर आमतौर पर दो से तीन नीले या नीले-हरे अंडे देता है। उनका कहना है कि कम दख़ल वाली, सेहतमंद झाड़ियाँ इसके सफल प्रजनन के लिए बेहद ज़रूरी हैं, और यही बात रकछम–छितकुल अभयारण्य को पश्चिमी हिमालय में इस प्रजाति के लिए एक अहम प्रजनन-भूमि बना देती है। अपने क्षेत्रीय अनुभव साझा करते हुए श्री संतोष कुमार ठाकुर, क्षेत्रीय समन्वयक, बर्ड काउंट इंडिया एवं खंड वन अधिकारी, हिमाचल प्रदेश, कहते हैं कि यह पक्षी हर साल प्रजनन के लिए रकछम–छितकुल अभयारण्य की ऊँचाई वाली जगहों पर लौटता है और मई से सितम्बर तक यहीं रहता है। इन महीनों में यह अभयारण्य पूरे हिमाचल में इस पक्षी को उसके प्राकृतिक प्रजनन-स्थल में देखने के सबसे अच्छे ठिकानों में से एक बन जाता है। पिछले दो प्रजनन कालों के अपने अवलोकनों के आधार पर उन्होंने अभयारण्य में सात से आठ जगहों पर प्रजनन दर्ज किया है, और उनका मानना है कि व्यवस्थित सर्वेक्षण होने पर ऐसी और भी कई जगहें सामने आएँगी। वे यह भी बताते हैं कि प्रजनन काल में ये पक्षी ज़्यादातर कीड़ों के लार्वा खाते देखे गए हैं, जो इस दौरान इनके भोजन का बड़ा हिस्सा लगता है। वन्यप्राणी विशेषज्ञ हिमांशु चौधरी स्थानीय वनस्पति के महत्व पर ज़ोर देते हुए बताते हैं कि काँटेदार कश्मल और घनी जूनिपर की झाड़ियाँ घोंसले के लिए बेहतरीन आड़ देती हैं और प्रजनन के दिनों में इन पक्षियों को शिकारियों से बचाती हैं। ये सेहतमंद झाड़ियाँ इस प्रजाति के सफल प्रजनन में बड़ी भूमिका निभाती हैं। सर्दियाँ नज़दीक आते ही रेडस्टार्ट नीचे उतरकर गरम, कम ऊँचाई वाली नदी-घाटियों और पहाड़ी ढलानों की ओर चला जाता है। इन बातों का समर्थन करते हुए वन्यप्राणी विशेषज्ञ अंकुश ठाकुर कहते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट को देखने से पहले प्रायः सुना ही जाता है। रकछम–छितकुल अभयारण्य में प्रजनन काल के दौरान इसे दर्ज करने के साथ-साथ उन्होंने इसे रुपिन दर्रे और चांशल दर्रे के पास भी देखा है। उनका कहना है कि यह प्रजाति उत्तर-पश्चिम में लाहौल से आगे पांगी घाटी तक भी प्रजनन करती है — यानी पश्चिमी हिमालय में पेड़ों की ऊपरी सीमा के आस-पास के उपयुक्त इलाके इसकी प्रजनन-आबादी को सहारा देते हैं, और इन पर लगातार वैज्ञानिक अध्ययन तथा संरक्षण की ज़रूरत है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए वन्यप्राणी विशेषज्ञ गैरी भट्टी कहते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट उन पक्षियों में से है जो धैर्य रखने वालों को इनाम देते हैं। इसका छिपा-छिपा रहने वाला स्वभाव याद दिलाता है कि हिमालय में आज भी कितने ही प्राकृतिक ख़ज़ाने ऐसे हैं जिन्हें समझा और सहेजा जाना बाक़ी है। संरक्षण के इन प्रयासों की सराहना करते हुए श्रीमती प्रीति भंडारी, आईएफएस, अरण्यपाल शिमला वाइल्डलाइफ ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण सबकी साझी ज़िम्मेदारी है। उन्होंने अग्रिम पंक्ति के वनअधिकारियों, वन्यप्राणी विशेषज्ञ और स्वयंसेवकों के समर्पण को सराहा, जिनकी लगातार मेहनत हिमाचल की समृद्ध जैव-विविधता को बचाने में मदद कर रही है। डॉ. अमित कुमार शर्मा, आईएएस उपायुक्त, किन्नौर ने कहा कि किन्नौर की समृद्ध प्राकृतिक विरासत ज़िले की सबसे बड़ी ताक़तों में से एक है। उन्होंने कहा कि यहाँ के जंगलों और ऊँचाई वाले इलाकों की रक्षा बहुत ज़रूरी है, ताकि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट जैसी ख़ास प्रजातियाँ आने वाली पीढ़ियों तक फलती-फूलती रहें। रकछम–छितकुल अभयारण्य की अपनी हालिया यात्रा के दौरान श्रीमती नीरजा वी.,आईपीएस, वरिष्ठ पुलिस महानिदेशक, चंडीगढ़ को इस पक्षी को उसके प्राकृतिक आवास में देखने का मौका मिला। उन्होंने इसे एक यादगार अनुभव बताया और कहा कि ऐसे साफ़-सुथरे, अछूते नज़ारे हमें हिमालय की अनमोल जैव-विविधता को सहेजने की हमारी साझी ज़िम्मेदारी की याद दिलाते हैं। श्री अशोक नेगी, आईएफएस उप अरण्यपाल सराहन ने कहा कि रकछम–छितकुल अभयारण्य असाधारण जैव-विविधता का घर है, और व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट जैसी प्रजातियों को समझने और बचाने के लिए लगातार निगरानी और आवास-संरक्षण बेहद ज़रूरी है। श्री डी. ढडवाल, प्रभागीय वन अधिकारी ने कहा कि हर नया रिकॉर्ड हिमालयी वन्यजीवन के बारे में हमारी समझ को और पुख़्ता करता है, और वैज्ञानिक दस्तावेज़ीकरण आगे के संरक्षण कार्यों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाता है। प्रजाति की समझ में योगदान देते हुए डॉ. अभिनव चौधरी बताते हैं कि व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट पूरे पश्चिमी हिमालय के उपयुक्त इलाकों में प्रजनन करता है। प्रजनन काल ख़त्म होते ही ये पक्षी अपने शीतकालीन ठिकानों की ओर लौट जाते हैं और इस तरह अपना सालाना मौसमी सफ़र पूरा करते हैं। उनका कहना है कि प्रजनन-आबादी पर लगातार नज़र रखने से शोधकर्ताओं को इस प्रजाति के जीवन और प्रवास के तौर-तरीक़ों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। भले ही व्हाइट-बेलिड रेडस्टार्ट अभी विश्व स्तर पर संकटग्रस्त प्रजाति नहीं मानी जाती, फिर भी सेहतमंद ऊँचाई वाली झाड़ियों पर इसकी निर्भरता इसे हिमालय की पारिस्थितिक सेहत का एक अहम संकेतक बना देती है। रकछम–छितकुल अभयारण्य से मिल रहे प्रजनन के बढ़ते रिकॉर्ड इन नाज़ुक पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण-महत्व को उजागर करते हैं, और यह भी याद दिलाते हैं कि हिमाचल के इस दिलचस्प पक्षी को बचाए रखने के लिए लगातार शोध, आवास-संरक्षण और लोगों की भागीदारी कितनी ज़रूरी है। फ़ील्ड नोट्स वैज्ञानिक नाम: Luscinia phaenicuroides कुल (Family): Muscicapidae प्रजनन ऊँचाई: 2,800–4,000 मीटर प्रजनन काल: मई–सितम्बर घोंसला: कटोरीनुमा, घनी झाड़ियों के नीचे ज़मीन पर या उसके पास बना हुआ अंडे: 2–3, नीले से नीले-हरे रंग के पसंदीदा आवास: कश्मल, जूनिपर और बुरांश वाली treeline झाड़ियाँ प्रवास: ऊँचाई के हिसाब से मौसमी प्रवासी हिमाचल में देखने की सबसे अच्छी जगह: रकछम–छितकुल वन्यजीव अभयारण्य, किन्नौर

Shimla Urban, Shimla | Jul 11, 2026

मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई मशीन का किया शुभारंभ
आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के अटल इंस्टीच्यूूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज़, चमियाना (एआईएमएसएस) में अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई सुविधा का शुभारंभ किया। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला के बाद एआईएमएसएस प्रदेश का दूसरा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान बन गया है, जहां यह उन्नत इमेजिंग तकनीक उपलब्ध करवाई गई है। लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई मशीन बेहतर गुणवत्ता की इमेजिंग, कम समय में जांच तथा अधिक सटीक निदान की सुविधा प्रदान करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से सुसज्जित करना वर्तमान राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस उन्नत एमआरआई सुविधा के शुरू होने से विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों की निदान क्षमता अत्यधिक सुदृढ़ होगी, जिससे चिकित्सकों को जटिल बीमारियों का अधिक प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनका उपचार करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब मरीजों को एमआरआई जांच के लिए संस्थान से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी। 
मुख्यमंत्री ने मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताएं हैं तथा इन दोनों महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्सकों से व्यापक विचार-विमर्श के पश्चात् पूरे प्रदेश में चिकित्सा तकनीक को उन्नत बनाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के लोगों को सस्ती, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में सरकार जहां एक ओर चिकित्सकों के रिक्त पद भर रही है, वहीं दूसरी ओर सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक और आधुनिक निदान उपकरणों से लैस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग्य चिकित्सकों को सरकारी सेवाओं में बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतनमान भी प्रदान किया जा रहा है। 
मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की उपेक्षा के कारण वर्षों तक पुराने चिकित्सा उपकरणों का उपयोग होता रहा। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला में 19 वर्ष पुरानी एमआरआई मशीन को हटाकर आधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई प्रणाली स्थापित की गई है तथा आने वाले वर्षों में प्रदेश के अन्य सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में भी इसी प्रकार की उन्नत मशीनें स्थापित कर दी जाएंगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में 125 करोड़ रुपये की लागत से स्वचालित (ऑटोमेटेड) प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जहां अत्याधुनिक और पूरी तरह स्वचालित जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे जांच की सटीकता बढ़ेगी और मरीजों के उपचार में उल्लेखनीय सुधार होगा।
श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एआईएमएसएस को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी यहीं शुरू की गई थी, जिसके पश्चात् डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा, आईजीएमसी शिमला तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नेरचौक में भी रोबोटिक सर्जरी सुविधा आरम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार मरीजों को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा रियायती दरों पर उपलब्ध करवा रही है, जबकि निजी अस्पतालों में यह उपचार अत्यंत महंगा होता है। इसी प्रकार एमआरआई और पैट स्कैन जैसी जांच भी प्रदेश में न्यूनतम दरों पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधारों के माध्यम से सभी जांचों के लिए शून्य प्रतीक्षा अवधि सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने एआईएमएसएस चमियाना में चिकित्सकों के साथ बैठक कर संस्थान की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि चमियाना संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसके लिए आवश्यक धनराशि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवा दी गई है। संस्थान तक बेहतर आवागमन सुनिश्चित करने के लिए ई-बस सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि संस्थान में सीनियर रेजिडेंट के पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही सरकार 800 नर्सिंग पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है तथा दिसंबर तक 200 एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एआईएमएसएस मोबाइल एप्लीकेशन का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से मरीज संस्थान और उसकी विभिन्न सेवाओं से संबंधित समस्त जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान की स्वच्छता निगरानी प्रणाली का भी शुभारंभ किया, जिससे अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और स्वच्छता प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।
इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला महापौर सुरेन्द्र चौहान, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, एआईएमएसएस के प्रधानाचार्य डॉ. बृज शर्मा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे।
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मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई मशीन का किया शुभारंभ आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के अटल इंस्टीच्यूूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज़, चमियाना (एआईएमएसएस) में अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई सुविधा का शुभारंभ किया। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला के बाद एआईएमएसएस प्रदेश का दूसरा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान बन गया है, जहां यह उन्नत इमेजिंग तकनीक उपलब्ध करवाई गई है। लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई मशीन बेहतर गुणवत्ता की इमेजिंग, कम समय में जांच तथा अधिक सटीक निदान की सुविधा प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से सुसज्जित करना वर्तमान राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस उन्नत एमआरआई सुविधा के शुरू होने से विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों की निदान क्षमता अत्यधिक सुदृढ़ होगी, जिससे चिकित्सकों को जटिल बीमारियों का अधिक प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनका उपचार करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब मरीजों को एमआरआई जांच के लिए संस्थान से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री ने मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताएं हैं तथा इन दोनों महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्सकों से व्यापक विचार-विमर्श के पश्चात् पूरे प्रदेश में चिकित्सा तकनीक को उन्नत बनाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के लोगों को सस्ती, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में सरकार जहां एक ओर चिकित्सकों के रिक्त पद भर रही है, वहीं दूसरी ओर सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक और आधुनिक निदान उपकरणों से लैस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग्य चिकित्सकों को सरकारी सेवाओं में बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतनमान भी प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की उपेक्षा के कारण वर्षों तक पुराने चिकित्सा उपकरणों का उपयोग होता रहा। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी शिमला में 19 वर्ष पुरानी एमआरआई मशीन को हटाकर आधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई प्रणाली स्थापित की गई है तथा आने वाले वर्षों में प्रदेश के अन्य सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में भी इसी प्रकार की उन्नत मशीनें स्थापित कर दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में 125 करोड़ रुपये की लागत से स्वचालित (ऑटोमेटेड) प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जहां अत्याधुनिक और पूरी तरह स्वचालित जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे जांच की सटीकता बढ़ेगी और मरीजों के उपचार में उल्लेखनीय सुधार होगा। श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एआईएमएसएस को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी यहीं शुरू की गई थी, जिसके पश्चात् डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा, आईजीएमसी शिमला तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नेरचौक में भी रोबोटिक सर्जरी सुविधा आरम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार मरीजों को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा रियायती दरों पर उपलब्ध करवा रही है, जबकि निजी अस्पतालों में यह उपचार अत्यंत महंगा होता है। इसी प्रकार एमआरआई और पैट स्कैन जैसी जांच भी प्रदेश में न्यूनतम दरों पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधारों के माध्यम से सभी जांचों के लिए शून्य प्रतीक्षा अवधि सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने एआईएमएसएस चमियाना में चिकित्सकों के साथ बैठक कर संस्थान की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि चमियाना संपर्क मार्ग का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसके लिए आवश्यक धनराशि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवा दी गई है। संस्थान तक बेहतर आवागमन सुनिश्चित करने के लिए ई-बस सेवाएं भी शुरू की जाएंगी। उन्होंने कहा कि संस्थान में सीनियर रेजिडेंट के पदों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही सरकार 800 नर्सिंग पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है तथा दिसंबर तक 200 एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति की जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एआईएमएसएस मोबाइल एप्लीकेशन का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से मरीज संस्थान और उसकी विभिन्न सेवाओं से संबंधित समस्त जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान की स्वच्छता निगरानी प्रणाली का भी शुभारंभ किया, जिससे अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और स्वच्छता प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला महापौर सुरेन्द्र चौहान, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, एआईएमएसएस के प्रधानाचार्य डॉ. बृज शर्मा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे। .0.

Shimla Urban, Shimla | Jul 11, 2026

दुकानदारी दुकान में करो...आप का क्या कहना हैं..
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Shimla Urban, Shimla | Jul 11, 2026

लो जी, विदेशी पर्यटक थ्री व्हीलर लेकर पहुंच गए मॉलरोड
शिमला, 11 जुलाई, 2026 — शिमला पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा आम जनता और पर्यटकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि मॉल रोड और रिज (The Ridge) पूरी तरह से "नो व्हीकल ज़ोन" (वाहन निषेध क्षेत्र / सील्ड रोड) हैं।
​यह सूचना हाल ही में माल रोड पर हुई एक घटना के बाद जारी की गई है, जहाँ 'रिक्शा रन' एडवेंचर रैली में भाग ले रहे विदेशी पर्यटकों ने एक ऑटो-रिक्शा (केरल रजिस्ट्रेशन नंबर (  KL07D E2685 )और यूनाइटेड किंगडम के झंडे की ब्रांडिंग वाला) लेकर इस प्रतिबंधित हेरिटेज वॉकवे पर प्रवेश कर लिया था। मौके पर तैनात स्थानीय पुलिस कर्मियों ने तुरंत वाहन को रोका, नियमों की जानकारी दी और कानूनन कार्रवाई की।
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लो जी, विदेशी पर्यटक थ्री व्हीलर लेकर पहुंच गए मॉलरोड शिमला, 11 जुलाई, 2026 — शिमला पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा आम जनता और पर्यटकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि मॉल रोड और रिज (The Ridge) पूरी तरह से "नो व्हीकल ज़ोन" (वाहन निषेध क्षेत्र / सील्ड रोड) हैं। ​यह सूचना हाल ही में माल रोड पर हुई एक घटना के बाद जारी की गई है, जहाँ 'रिक्शा रन' एडवेंचर रैली में भाग ले रहे विदेशी पर्यटकों ने एक ऑटो-रिक्शा (केरल रजिस्ट्रेशन नंबर ( KL07D E2685 )और यूनाइटेड किंगडम के झंडे की ब्रांडिंग वाला) लेकर इस प्रतिबंधित हेरिटेज वॉकवे पर प्रवेश कर लिया था। मौके पर तैनात स्थानीय पुलिस कर्मियों ने तुरंत वाहन को रोका, नियमों की जानकारी दी और कानूनन कार्रवाई की। #Shimla #MallRoad #ForeignTourists #ThreeWheeler #ShimlaTourism #TouristAttraction #HimachalPradesh #TravelHimachal #MallRoadShimla #ViralVideo #TourismNews #HimachalNow ।

Shimla Urban, Shimla | Jul 11, 2026

शिमला शहरी: अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव 2026 का कल होगा भव्य आग़ाज़, तैयारियां शुरू - Shimla Urban News