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पोठिया: किशनगंज पुलिस की कार्रवाई, पोठिया और पहाड़कट्टा से 5 NBW वारंटी अभियुक्त गिरफ्तार, अग्रतर कार्रवाई जारी

Pothia, Kishanganj | Jun 23, 2026

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छत्तरगाछ कर्बला मैदान में उमड़ा जनसैलाब, हजारों लोगों ने देखे अखाड़ों के हैरतअंगेज करतब

संवाद सूत्र जागरण, पहाड़कट्टा/किशनगंज: पोठिया प्रखंड के छत्तरगाछ स्थित कर्बला मैदान में शुक्रवार को मुहर्रम का पर्व शांति, सौहार्द और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। प्रखंड के सबसे बड़े कर्बला मैदान में तीन से चार पंचायतों के दर्जनों गांवों से ताजिया जुलूस और अखाड़े पहुंचे। पारंपरिक तरीके के साथ खिलाड़ियों ने ऐसे रोमांचक करतब दिखाए कि पूरा मैदान यां हुसैन की आवाज़ से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग देर शाम तक इन प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।
कर्बला मैदान के चारों ओर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। आसपास की इमारतों की छतों पर भी दर्शकों का कब्जा रहा। छत्तरगाछ बस पड़ाव के समीप जुलूस में शामिल लोगों के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था की गई थी। रास्ते के प्रमुख चौक चौराहों पर विभिन्न अखाड़ों के बीच पारंपरिक खेल और शौर्य प्रदर्शन होते रहे। कई अखाड़ों ने आकर्षक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारे और सदभाव का संदेश दिया।

छत्तरगाछ, अठ्याबाड़ी, खानका, सिंघिमारी, सातमेरी, दीघली, भोटाथाना, सतबोलिया और सोहागी समेत अनेक गांवों से निकले ताजिया जुलूस बसारतनगर पुलिया पर एकत्रित हुए। इसके बाद मियाबस्ती, बैंक चौक और मंदिर रोड पुलिस कैंप होते हुए सभी अखाड़े पूरे जोश और अनुशासन के साथ कर्बला मैदान पहुंचे। बड़े बड़े ताजियों के पहुंचने से पूरा मैदान आस्था के रंग में रंग गया।

कर्बला मैदान स्थित इमामबाड़ा में महिलाओं की विशेष भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने अपने बच्चों और परिवार की सुख, शांति और तरक्की के लिए मन्नतें मांगीं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई दुआ और मन्नत जरूर कबूल होती है। यही आस्था हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को इस ऐतिहासिक कर्बला मैदान तक खींच लाती है।
पूरे आयोजन में पुलिस प्रशासन व छत्तरगाछ कर्बला कमेटी की भूमिका सराहनीय रही। समिति के सदस्यों ने जुलूस, भीड़ प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही कारण रहा कि विशाल भीड़ के बावजूद पूरा आयोजन अनुशासन और सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था भी पूरे आयोजन की बड़ी खासियत रही। छत्तरगाछ कैंप प्रभारी शैलेश कुमार के नेतृत्व में महिला और पुरुष पुलिस बल तथा स्थानीय चौकीदार चप्पे चप्पे पर मुस्तैद रहे। पहाड़कट्टा थाना प्रभारी फुलेंद्र कुमार लगातार पूरे क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। पुलिस की सतर्कता, संयम और सक्रिय मौजूदगी से श्रद्धालुओं ने खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस किया। प्रशासन की यह तैयारी पूरे आयोजन की सफलता का मजबूत आधार बनी।
मौके पर बीडीओ मोहम्मद आसिफ, सीओ मोहित राज तथा बतौर दंडाधिकारी पंचायती राज पदाधिकारी शादाब अनवर भी लगातार क्षेत्र का जायजा लेते रहे। अधिकारियों की सक्रिय निगरानी और स्थानीय लोगों के सहयोग से मुहर्रम का यह विशाल आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भाईचारे के वातावरण में संपन्न हुआ।
छत्तरगाछ का कर्बला मैदान एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि परंपरा, आस्था और सामाजिक सौहार्द जब एक साथ चलते हैं, तब किसी भी आयोजन की भव्यता और गरिमा कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि पोठिया का यह कर्बला आज पूरे क्षेत्र में आस्था, संस्कृति और गंगा जमुनी तहजीब की जीवंत पहचान बन चुका है।

छत्तरगाछ कर्बला मैदान में उमड़ा जनसैलाब, हजारों लोगों ने देखे अखाड़ों के हैरतअंगेज करतब संवाद सूत्र जागरण, पहाड़कट्टा/किशनगंज: पोठिया प्रखंड के छत्तरगाछ स्थित कर्बला मैदान में शुक्रवार को मुहर्रम का पर्व शांति, सौहार्द और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। प्रखंड के सबसे बड़े कर्बला मैदान में तीन से चार पंचायतों के दर्जनों गांवों से ताजिया जुलूस और अखाड़े पहुंचे। पारंपरिक तरीके के साथ खिलाड़ियों ने ऐसे रोमांचक करतब दिखाए कि पूरा मैदान यां हुसैन की आवाज़ से गूंज उठा। हजारों की संख्या में पहुंचे महिला, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग देर शाम तक इन प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे। कर्बला मैदान के चारों ओर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। आसपास की इमारतों की छतों पर भी दर्शकों का कब्जा रहा। छत्तरगाछ बस पड़ाव के समीप जुलूस में शामिल लोगों के लिए पानी और शरबत की व्यवस्था की गई थी। रास्ते के प्रमुख चौक चौराहों पर विभिन्न अखाड़ों के बीच पारंपरिक खेल और शौर्य प्रदर्शन होते रहे। कई अखाड़ों ने आकर्षक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारे और सदभाव का संदेश दिया। छत्तरगाछ, अठ्याबाड़ी, खानका, सिंघिमारी, सातमेरी, दीघली, भोटाथाना, सतबोलिया और सोहागी समेत अनेक गांवों से निकले ताजिया जुलूस बसारतनगर पुलिया पर एकत्रित हुए। इसके बाद मियाबस्ती, बैंक चौक और मंदिर रोड पुलिस कैंप होते हुए सभी अखाड़े पूरे जोश और अनुशासन के साथ कर्बला मैदान पहुंचे। बड़े बड़े ताजियों के पहुंचने से पूरा मैदान आस्था के रंग में रंग गया। कर्बला मैदान स्थित इमामबाड़ा में महिलाओं की विशेष भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने अपने बच्चों और परिवार की सुख, शांति और तरक्की के लिए मन्नतें मांगीं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई दुआ और मन्नत जरूर कबूल होती है। यही आस्था हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को इस ऐतिहासिक कर्बला मैदान तक खींच लाती है। पूरे आयोजन में पुलिस प्रशासन व छत्तरगाछ कर्बला कमेटी की भूमिका सराहनीय रही। समिति के सदस्यों ने जुलूस, भीड़ प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। यही कारण रहा कि विशाल भीड़ के बावजूद पूरा आयोजन अनुशासन और सौहार्द के वातावरण में संपन्न हुआ। सुरक्षा व्यवस्था भी पूरे आयोजन की बड़ी खासियत रही। छत्तरगाछ कैंप प्रभारी शैलेश कुमार के नेतृत्व में महिला और पुरुष पुलिस बल तथा स्थानीय चौकीदार चप्पे चप्पे पर मुस्तैद रहे। पहाड़कट्टा थाना प्रभारी फुलेंद्र कुमार लगातार पूरे क्षेत्र का भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। पुलिस की सतर्कता, संयम और सक्रिय मौजूदगी से श्रद्धालुओं ने खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस किया। प्रशासन की यह तैयारी पूरे आयोजन की सफलता का मजबूत आधार बनी। मौके पर बीडीओ मोहम्मद आसिफ, सीओ मोहित राज तथा बतौर दंडाधिकारी पंचायती राज पदाधिकारी शादाब अनवर भी लगातार क्षेत्र का जायजा लेते रहे। अधिकारियों की सक्रिय निगरानी और स्थानीय लोगों के सहयोग से मुहर्रम का यह विशाल आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भाईचारे के वातावरण में संपन्न हुआ। छत्तरगाछ का कर्बला मैदान एक बार फिर यह संदेश देने में सफल रहा कि परंपरा, आस्था और सामाजिक सौहार्द जब एक साथ चलते हैं, तब किसी भी आयोजन की भव्यता और गरिमा कई गुना बढ़ जाती है। यही वजह है कि पोठिया का यह कर्बला आज पूरे क्षेत्र में आस्था, संस्कृति और गंगा जमुनी तहजीब की जीवंत पहचान बन चुका है।

Pothia, Kishanganj | Jun 26, 2026

पोठिया प्रखंड के छत्तरगाछ स्थित कर्बला मैदान में शुक्रवार को मुहर्रम का पर्व शांति, सौहार्द और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। प्रखंड के सबसे बड़े कर्बला मैदान में तीन से चार पंचायतों के दर्जनों गांवों से ताजिया जुलूस और अखाड़े पहुंचे।  पुलिस की सतर्कता, संयम और सक्रिय मौजूदगी से श्रद्धालुओं ने खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस किया। प्रशासन की यह तैयारी पूरे आयोजन की सफलता का मजबूत आधार बनी।

पोठिया प्रखंड के छत्तरगाछ स्थित कर्बला मैदान में शुक्रवार को मुहर्रम का पर्व शांति, सौहार्द और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। प्रखंड के सबसे बड़े कर्बला मैदान में तीन से चार पंचायतों के दर्जनों गांवों से ताजिया जुलूस और अखाड़े पहुंचे। पुलिस की सतर्कता, संयम और सक्रिय मौजूदगी से श्रद्धालुओं ने खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस किया। प्रशासन की यह तैयारी पूरे आयोजन की सफलता का मजबूत आधार बनी।

Pothia, Kishanganj | Jun 26, 2026

नफरत की दीवारों को तोड़ती किशनगंज की खूबसूरत तस्वीर

 यहां मोहर्रम का ताजिया हिन्दू हाथों से होता है तैयार, मुस्लिम समाज मन्नत पूरी होने पर चढ़ाता है ताजिया

कलियागंज गांव की वर्षों पुरानी परंपरा आज भी कायम, पीढ़ियां बदलीं लेकिन नहीं बदला भाईचारे का रिश्ता

राज कुमार | पोठिया/किशनगंज 

 देश में जहां कभी-कभी धर्म और समुदाय के नाम पर दूरियां देखने को मिलती हैं, किशनगंज जिले  के पोठिया का एक छोटा सा गांव आपसी मोहब्बत और भाईचारे की ऐसी कहानी लिख रहा है, जो समाज को बड़ा संदेश देता है। यहां मोहर्रम केवल एक समुदाय का पर्व नहीं, बल्कि आपसी रिश्तों, विश्वास और वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक बन चुका है।

पोठिया प्रखंड क्षेत्र के कस्बा कलियागंज पंचायत स्थित कलियागंज चकबंदी गांव में मोहर्रम के मौके पर एक अनोखी तस्वीर देखने को मिलती है। यहां मुस्लिम समुदाय द्वारा चढ़ाए जाने वाला ताजिया हिन्दू परिवारों के हाथों से तैयार किया जाता है। गांव के हिन्दू कारीगर पूरी मेहनत और लगन के साथ ताजिया को अंतिम रूप देते हैं, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धा के साथ इसे कर्बला मैदान तक लेकर जाते हैं।

गांव के लोगों की मानें तो यह सिलसिला कोई नया नहीं है। कई पीढ़ियों से यहां यही परंपरा चली आ रही है। बुजुर्गों ने जिस भाईचारे की नींव रखी थी, उसे आज की नई पीढ़ी भी उसी सम्मान के साथ आगे बढ़ा रही है।

घर के आंगन में तैयार होता है ताजिया, रंग-बिरंगे कागजों में छिपी है रिश्तों की मिठास

मोहर्रम से कई दिन पहले ही गांव में ताजिया बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। बांस, कागज और सजावट के सामान से धीरे-धीरे ताजिया को आकार दिया जाता है। इसमें पुरुषों के साथ घर की महिलाएं भी बराबर सहयोग करती हैं।

कारीगरों का कहना है कि उनके लिए यह केवल कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि वर्षों से निभाया जा रहा एक रिश्ता है। जिस तरह उनके पूर्वज इस काम को करते आए, उसी तरह आज वे लोग भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

यहां हिन्दू-मुस्लिम नहीं, हम सब एक परिवार की तरह रहते हैं

ताजिया बनाने वाले गंगा मालाकार बताते हैं कि कलियागंज गांव की पहचान ही आपसी प्रेम है।
उन्होंने कहा, हमारे यहां कभी कोई भेदभाव नहीं रहा। हिन्दू समाज के लोग ताजिया बनाते हैं और मुस्लिम समाज के लोग मन्नत पूरी होने पर उसे चढ़ाते हैं। ईद हो या पूजा, मोहर्रम हो या कोई दूसरा त्योहार, हम सभी एक दूसरे की खुशी और दुख में साथ खड़े रहते हैं। यही हमारे गांव की असली ताकत है।

बचपन से देखी परंपरा, अब खुद ताजिया बना रही महिलाएं

ताजिया निर्माण में जुटी महिला रीना देवी बताती हैं कि उनके परिवार में यह काम कई वर्षों से होता आ रहा है। पहले उनके ससुर और बुजुर्ग ताजिया बनाया करते थे, अब परिवार की महिलाएं भी इसमें हाथ बंटाती हैं।
उन्होंने कहा कि हम शादी के बाद से देखते आए हैं कि हमारे घर में ताजिया बनता है। इसमें हमें खुशी मिलती है। मुस्लिम परिवार हमारे बनाए ताजिया को सम्मान से लेकर जाते हैं। गांव में सभी लोग भाई की तरह रहते हैं।

वहीं दूसरी महिला कारीगर पुकता देवी ने बताया कि जब से वह इस परिवार में आईं, तब से वह भी ताजिया बनाने में सहयोग कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक काम नहीं है, यह हमारे बुजुर्गों की दी हुई परंपरा है। जब तक हमसे होगा, इसे आगे बढ़ाते रहेंगे।

मन्नत पूरी होने पर चढ़ाया जाता है ताजिया

ग्रामीण बताते हैं कि मोहर्रम के दौरान कई लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर ताजिया चढ़ाते हैं। ताजिया तैयार होने के बाद उसे पूरे सम्मान के साथ कर्बला मैदान ले जाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

गांव के लोगों का कहना है कि यहां त्योहारों को धर्म से ज्यादा इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि हर साल मोहर्रम के समय गांव में अलग ही माहौल देखने को मिलता है।

कलियागंज की मिट्टी में ही भाईचारा बसा है

स्थानीय निवासी कृष्णा ठाकुर कहते हैं कि यह परंपरा पूरे इलाके के लिए गर्व की बात है।
मैं बचपन से देख रहा हूं कि यहां हिन्दू परिवार ताजिया बनाते हैं और मुस्लिम भाई उसे लेकर जाते हैं। कभी किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ। होली हो, ईद हो, पूजा हो या मोहर्रम, यहां सभी मिलकर त्योहार मनाते हैं। कलियागंज की मिट्टी में ही भाईचारा बसा है।

किशनगंज की पहचान है गंगा-जमुनी संस्कृति

गौरतलब है कि किशनगंज जिला मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है, लेकिन यहां की पहचान हमेशा से आपसी सौहार्द और भाईचारे की रही है। पोठिया प्रखंड का कलियागंज गांव की यह परंपरा इस बात का उदाहरण है कि रिश्ते धर्म से नहीं, बल्कि भरोसे और इंसानियत से मजबूत होते हैं।
शुक्रवार यानि आज जब मोहर्रम का ताजिया निकलेगा, तो कलियागंज गांव एक बार फिर पूरे इलाके को अमन और एकता का संदेश देता नजर आएगा।

नफरत की दीवारों को तोड़ती किशनगंज की खूबसूरत तस्वीर यहां मोहर्रम का ताजिया हिन्दू हाथों से होता है तैयार, मुस्लिम समाज मन्नत पूरी होने पर चढ़ाता है ताजिया कलियागंज गांव की वर्षों पुरानी परंपरा आज भी कायम, पीढ़ियां बदलीं लेकिन नहीं बदला भाईचारे का रिश्ता राज कुमार | पोठिया/किशनगंज देश में जहां कभी-कभी धर्म और समुदाय के नाम पर दूरियां देखने को मिलती हैं, किशनगंज जिले के पोठिया का एक छोटा सा गांव आपसी मोहब्बत और भाईचारे की ऐसी कहानी लिख रहा है, जो समाज को बड़ा संदेश देता है। यहां मोहर्रम केवल एक समुदाय का पर्व नहीं, बल्कि आपसी रिश्तों, विश्वास और वर्षों पुरानी परंपरा का प्रतीक बन चुका है। पोठिया प्रखंड क्षेत्र के कस्बा कलियागंज पंचायत स्थित कलियागंज चकबंदी गांव में मोहर्रम के मौके पर एक अनोखी तस्वीर देखने को मिलती है। यहां मुस्लिम समुदाय द्वारा चढ़ाए जाने वाला ताजिया हिन्दू परिवारों के हाथों से तैयार किया जाता है। गांव के हिन्दू कारीगर पूरी मेहनत और लगन के साथ ताजिया को अंतिम रूप देते हैं, वहीं मुस्लिम समुदाय के लोग मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धा के साथ इसे कर्बला मैदान तक लेकर जाते हैं। गांव के लोगों की मानें तो यह सिलसिला कोई नया नहीं है। कई पीढ़ियों से यहां यही परंपरा चली आ रही है। बुजुर्गों ने जिस भाईचारे की नींव रखी थी, उसे आज की नई पीढ़ी भी उसी सम्मान के साथ आगे बढ़ा रही है। घर के आंगन में तैयार होता है ताजिया, रंग-बिरंगे कागजों में छिपी है रिश्तों की मिठास मोहर्रम से कई दिन पहले ही गांव में ताजिया बनाने की तैयारी शुरू हो जाती है। बांस, कागज और सजावट के सामान से धीरे-धीरे ताजिया को आकार दिया जाता है। इसमें पुरुषों के साथ घर की महिलाएं भी बराबर सहयोग करती हैं। कारीगरों का कहना है कि उनके लिए यह केवल कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि वर्षों से निभाया जा रहा एक रिश्ता है। जिस तरह उनके पूर्वज इस काम को करते आए, उसी तरह आज वे लोग भी इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। यहां हिन्दू-मुस्लिम नहीं, हम सब एक परिवार की तरह रहते हैं ताजिया बनाने वाले गंगा मालाकार बताते हैं कि कलियागंज गांव की पहचान ही आपसी प्रेम है। उन्होंने कहा, हमारे यहां कभी कोई भेदभाव नहीं रहा। हिन्दू समाज के लोग ताजिया बनाते हैं और मुस्लिम समाज के लोग मन्नत पूरी होने पर उसे चढ़ाते हैं। ईद हो या पूजा, मोहर्रम हो या कोई दूसरा त्योहार, हम सभी एक दूसरे की खुशी और दुख में साथ खड़े रहते हैं। यही हमारे गांव की असली ताकत है। बचपन से देखी परंपरा, अब खुद ताजिया बना रही महिलाएं ताजिया निर्माण में जुटी महिला रीना देवी बताती हैं कि उनके परिवार में यह काम कई वर्षों से होता आ रहा है। पहले उनके ससुर और बुजुर्ग ताजिया बनाया करते थे, अब परिवार की महिलाएं भी इसमें हाथ बंटाती हैं। उन्होंने कहा कि हम शादी के बाद से देखते आए हैं कि हमारे घर में ताजिया बनता है। इसमें हमें खुशी मिलती है। मुस्लिम परिवार हमारे बनाए ताजिया को सम्मान से लेकर जाते हैं। गांव में सभी लोग भाई की तरह रहते हैं। वहीं दूसरी महिला कारीगर पुकता देवी ने बताया कि जब से वह इस परिवार में आईं, तब से वह भी ताजिया बनाने में सहयोग कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक काम नहीं है, यह हमारे बुजुर्गों की दी हुई परंपरा है। जब तक हमसे होगा, इसे आगे बढ़ाते रहेंगे। मन्नत पूरी होने पर चढ़ाया जाता है ताजिया ग्रामीण बताते हैं कि मोहर्रम के दौरान कई लोग अपनी मन्नत पूरी होने पर ताजिया चढ़ाते हैं। ताजिया तैयार होने के बाद उसे पूरे सम्मान के साथ कर्बला मैदान ले जाया जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि यहां त्योहारों को धर्म से ज्यादा इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है। यही कारण है कि हर साल मोहर्रम के समय गांव में अलग ही माहौल देखने को मिलता है। कलियागंज की मिट्टी में ही भाईचारा बसा है स्थानीय निवासी कृष्णा ठाकुर कहते हैं कि यह परंपरा पूरे इलाके के लिए गर्व की बात है। मैं बचपन से देख रहा हूं कि यहां हिन्दू परिवार ताजिया बनाते हैं और मुस्लिम भाई उसे लेकर जाते हैं। कभी किसी तरह का भेदभाव नहीं हुआ। होली हो, ईद हो, पूजा हो या मोहर्रम, यहां सभी मिलकर त्योहार मनाते हैं। कलियागंज की मिट्टी में ही भाईचारा बसा है। किशनगंज की पहचान है गंगा-जमुनी संस्कृति गौरतलब है कि किशनगंज जिला मुस्लिम बहुल इलाका माना जाता है, लेकिन यहां की पहचान हमेशा से आपसी सौहार्द और भाईचारे की रही है। पोठिया प्रखंड का कलियागंज गांव की यह परंपरा इस बात का उदाहरण है कि रिश्ते धर्म से नहीं, बल्कि भरोसे और इंसानियत से मजबूत होते हैं। शुक्रवार यानि आज जब मोहर्रम का ताजिया निकलेगा, तो कलियागंज गांव एक बार फिर पूरे इलाके को अमन और एकता का संदेश देता नजर आएगा।

Pothia, Kishanganj | Jun 26, 2026