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रायगढ़: रायगढ़ जिले में रोजगार मेले में युवाओं की भीड़ उमड़ी, निजी कंपनियों ने किए साक्षात्कार

Raigarh, Raigarh | Jun 25, 2026
रायगढ़ जिले में रोजगार मेले में उमड़ी युवाओं की भीड़,निजी कंपनियों ने किए साक्षात्कार।

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धान छोड़ रागी अपनाई, अब समृद्धि की नई फसल काट रहे लैलूंगा के आदिवासी किसान

डीएमएफ के सहयोग और कृषि विभाग के मार्गदर्शन से ग्रीष्मकालीन रागी उत्पादन बना आय बढ़ाने का नया मॉडल

गोसाई राम राठिया के नेतृत्व में किसानों ने 45 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले रागी बीज की पहली खेप बीज निगम को बेची

बदलाव की शुरुआत अक्सर एक छोटे कदम से होती है। लैलूंगा विकासखंड के वनांचल ग्राम फुठामुड़ा में यही बदलाव आज किसानों की नई पहचान बन चुका है। कभी ग्रीष्मकाल में अधिक पानी और अधिक लागत वाली धान की खेती करने वाले यहां के आदिवासी किसानों ने अब रागी (मड़ुआ) की खेती अपनाकर न केवल अपनी आय का नया रास्ता खोला है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।
 इस परिवर्तन की अगुवाई प्रगतिशील किसान गोसाई राम राठिया ने की। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) के सहयोग से उन्होंने गांव के किसानों को संगठित किया और ग्रीष्मकाल में धान के स्थान पर कम पानी में तैयार होने वाली पोषक फसल रागी की सामुदायिक खेती शुरू कराई। वैज्ञानिक पद्धति, सामूहिक मेहनत और विभागीय सहयोग का परिणाम यह रहा कि पहली ही फसल में किसानों को उत्कृष्ट गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त हुआ। बेहतर बाजार और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए किसानों ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के बीज उत्पादन कार्यक्रम में पंजीयन कराया। घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त रागी सुरक्षित रखने के बाद किसानों ने 45 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले रागी बीज की पहली खेप निगम को विक्रय की। यह उपलब्धि न केवल किसानों की अतिरिक्त आय का माध्यम बनी, बल्कि फुठामुड़ा को रागी बीज उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में नई पहचान भी दिला रही है।
 आज गोसाई राम राठिया की पहल से गांव के अनेक किसान रागी उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कम पानी, कम लागत और बेहतर लाभ देने वाली यह खेती प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है। पोषण से भरपूर मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में यह प्रयास शासन की मंशा को भी साकार कर रहा है। फुठामुड़ा की यह सफलता बताती है कि जब किसानों को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और योजनाओं का लाभ समय पर मिले, तो खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का मजबूत आधार बन जाती है। लैलूंगा के आदिवासी किसानों की यह कहानी आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा और कृषि नवाचार की नई मिसाल है।

धान छोड़ रागी अपनाई, अब समृद्धि की नई फसल काट रहे लैलूंगा के आदिवासी किसान डीएमएफ के सहयोग और कृषि विभाग के मार्गदर्शन से ग्रीष्मकालीन रागी उत्पादन बना आय बढ़ाने का नया मॉडल गोसाई राम राठिया के नेतृत्व में किसानों ने 45 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले रागी बीज की पहली खेप बीज निगम को बेची बदलाव की शुरुआत अक्सर एक छोटे कदम से होती है। लैलूंगा विकासखंड के वनांचल ग्राम फुठामुड़ा में यही बदलाव आज किसानों की नई पहचान बन चुका है। कभी ग्रीष्मकाल में अधिक पानी और अधिक लागत वाली धान की खेती करने वाले यहां के आदिवासी किसानों ने अब रागी (मड़ुआ) की खेती अपनाकर न केवल अपनी आय का नया रास्ता खोला है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी उदाहरण भी प्रस्तुत किया है। इस परिवर्तन की अगुवाई प्रगतिशील किसान गोसाई राम राठिया ने की। कृषि विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन और जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) के सहयोग से उन्होंने गांव के किसानों को संगठित किया और ग्रीष्मकाल में धान के स्थान पर कम पानी में तैयार होने वाली पोषक फसल रागी की सामुदायिक खेती शुरू कराई। वैज्ञानिक पद्धति, सामूहिक मेहनत और विभागीय सहयोग का परिणाम यह रहा कि पहली ही फसल में किसानों को उत्कृष्ट गुणवत्ता का उत्पादन प्राप्त हुआ। बेहतर बाजार और उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए किसानों ने छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के बीज उत्पादन कार्यक्रम में पंजीयन कराया। घरेलू उपयोग के लिए पर्याप्त रागी सुरक्षित रखने के बाद किसानों ने 45 क्विंटल उच्च गुणवत्ता वाले रागी बीज की पहली खेप निगम को विक्रय की। यह उपलब्धि न केवल किसानों की अतिरिक्त आय का माध्यम बनी, बल्कि फुठामुड़ा को रागी बीज उत्पादन के उभरते केंद्र के रूप में नई पहचान भी दिला रही है। आज गोसाई राम राठिया की पहल से गांव के अनेक किसान रागी उत्पादन की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कम पानी, कम लागत और बेहतर लाभ देने वाली यह खेती प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ किसानों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत कर रही है। पोषण से भरपूर मोटे अनाज को बढ़ावा देने की दिशा में यह प्रयास शासन की मंशा को भी साकार कर रहा है। फुठामुड़ा की यह सफलता बताती है कि जब किसानों को सही मार्गदर्शन, तकनीकी सहयोग और योजनाओं का लाभ समय पर मिले, तो खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि समृद्धि का मजबूत आधार बन जाती है। लैलूंगा के आदिवासी किसानों की यह कहानी आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा और कृषि नवाचार की नई मिसाल है।

Raigarh, Chhattisgarh | Jun 27, 2026

नशा मुक्त भारत अभियान को मिला जनसहभागिता का संबल

जिला जेल में बंदियों ने ली नशामुक्त जीवन की शपथ, गीत-संगीत के माध्यम से दिया जागरूकता का संदेश

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशन तथा छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले में नशामुक्त भारत सप्ताह एवं नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी विरोधी सप्ताह के अवसर पर विभिन्न  जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के समापन अवसर पर जिला जेल रायगढ़ में विशेष नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों को नशे से दूर रहकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन अपनाने का संकल्प दिलाया गया।
 कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी बंदियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई तथा नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों, उनके सामाजिक एवं पारिवारिक प्रभावों तथा नशे से दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। गीत-संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी नशामुक्ति का प्रभावी संदेश दिया गया, जिसे उपस्थित सभी लोगों ने सराहा।
 उपसंचालक समाज कल्याण श्री शिवशंकर पाण्डेय ने बताया कि नशा व्यक्ति की क्षमता, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। युवाओं को नशे की लत से बचाने तथा समाज में व्यापक जनजागरूकता लाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना तथा जनसहभागिता के माध्यम से नशामुक्त एवं स्वस्थ भारत के निर्माण को गति देना है। समाज कल्याण विभाग ने आमजन से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करें, ताकि स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध समाज के निर्माण में सभी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
 कार्यक्रम में जिला जेल अधीक्षक श्री जी.एस.सोरी, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, नशा मुक्ति केंद्र के प्रबंधक श्री सुमंत आचार्य, रंजना यादव, डे-केयर सेंटर सियान गुड़ी के संगीत प्रशिक्षक श्री कुबेर चरण चौहान सहित जेल प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में बंदियों ने सहभागिता की।

नशा मुक्त भारत अभियान को मिला जनसहभागिता का संबल जिला जेल में बंदियों ने ली नशामुक्त जीवन की शपथ, गीत-संगीत के माध्यम से दिया जागरूकता का संदेश सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशन तथा छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिले में नशामुक्त भारत सप्ताह एवं नशीले पदार्थों की अवैध तस्करी विरोधी सप्ताह के अवसर पर विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के समापन अवसर पर जिला जेल रायगढ़ में विशेष नशामुक्ति जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बंदियों को नशे से दूर रहकर स्वस्थ एवं सकारात्मक जीवन अपनाने का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी बंदियों को नशामुक्ति की शपथ दिलाई गई तथा नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों, उनके सामाजिक एवं पारिवारिक प्रभावों तथा नशे से दूर रहकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। गीत-संगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भी नशामुक्ति का प्रभावी संदेश दिया गया, जिसे उपस्थित सभी लोगों ने सराहा। उपसंचालक समाज कल्याण श्री शिवशंकर पाण्डेय ने बताया कि नशा व्यक्ति की क्षमता, परिवार की खुशहाली और समाज की प्रगति में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। युवाओं को नशे की लत से बचाने तथा समाज में व्यापक जनजागरूकता लाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि नशा मुक्त भारत अभियान का उद्देश्य लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, उपचार एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ना तथा जनसहभागिता के माध्यम से नशामुक्त एवं स्वस्थ भारत के निर्माण को गति देना है। समाज कल्याण विभाग ने आमजन से अपील की कि वे स्वयं नशे से दूर रहें तथा अपने परिवार, मित्रों और समाज को भी नशामुक्त जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करें, ताकि स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध समाज के निर्माण में सभी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में जिला जेल अधीक्षक श्री जी.एस.सोरी, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, नशा मुक्ति केंद्र के प्रबंधक श्री सुमंत आचार्य, रंजना यादव, डे-केयर सेंटर सियान गुड़ी के संगीत प्रशिक्षक श्री कुबेर चरण चौहान सहित जेल प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में बंदियों ने सहभागिता की।

Raigarh, Chhattisgarh | Jun 27, 2026

सीएम सर तो दिल के अच्छे हैं” - UPSC prelims उत्तीर्ण अभ्यर्थी मुख्यमंत्री जी से मिलकर उनकी सरलता के हुए मुरीद। 

छत्तीसगढ़ ट्रायबल यूथ हॉस्टल में अध्ययनरत अभ्यर्थियों ने UPSC प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। बेहतर आवास, अध्ययन सुविधाओं और मार्गदर्शन के लिए अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया।

#UPSC #UPSCPrelims #TribalYouthHostel #ट्रायबल_यूथ_हॉस्टल #विकसित_छत्तीसगढ़ सुशासन_सरकार

सीएम सर तो दिल के अच्छे हैं” - UPSC prelims उत्तीर्ण अभ्यर्थी मुख्यमंत्री जी से मिलकर उनकी सरलता के हुए मुरीद। छत्तीसगढ़ ट्रायबल यूथ हॉस्टल में अध्ययनरत अभ्यर्थियों ने UPSC प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की है। बेहतर आवास, अध्ययन सुविधाओं और मार्गदर्शन के लिए अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का आभार व्यक्त किया। #UPSC #UPSCPrelims #TribalYouthHostel #ट्रायबल_यूथ_हॉस्टल #विकसित_छत्तीसगढ़ सुशासन_सरकार

Raigarh, Chhattisgarh | Jun 27, 2026

रेडक्रॉस व मेडिकल कॉलेज के सहयोग से विशाल रक्तदान शिविर संपन्न, 716 यूनिट रक्त संग्रह

भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा रायगढ़ द्वारा किरोड़ीमल जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के सहयोग से जिले के विभिन्न इकाइयों में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रक्तदान शिविर का आयोजन अदानी कोल माइन्स गारे पेलमा, अम्बूजा सीमेंट लिमिटेड गारे पेलमा कोल माइन्स, अदानी पावर लिमिटेड छोटे भंडार तथा अदानी प्रोजेक्ट लिमिटेड छोटे भंडार में किया गया। शिविर का शुभारंभ संबंधित अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
 शिविर में कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। अम्बूजा सीमेंट लिमिटेड में 61 यूनिट, अदानी कोल माइन्स गारे पेलमा-में 135 यूनिट, अदानी पावर लिमिटेड में 251 यूनिट तथा अदानी प्रोजेक्ट लिमिटेड में 269 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। इस प्रकार कुल 716 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा रायगढ़ ने शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी संस्थाओं, रक्तदाताओं एवं सहयोगी चिकित्सकीय दलों का आभार व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी रक्तदान शिविरों के आयोजन में सहयोग देने का आग्रह किया गया। शिविर को सफल बनाने में रेडक्रॉस सोसायटी के कर्मचारियों, किरोड़ीमल जिला चिकित्सालय तथा संत बाबा गुरु घासीदास स्मृति चिकित्सालय रायगढ़ के चिकित्सकीय दल का विशेष योगदान रहा।

रेडक्रॉस व मेडिकल कॉलेज के सहयोग से विशाल रक्तदान शिविर संपन्न, 716 यूनिट रक्त संग्रह भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा रायगढ़ द्वारा किरोड़ीमल जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के सहयोग से जिले के विभिन्न इकाइयों में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रक्तदान शिविर का आयोजन अदानी कोल माइन्स गारे पेलमा, अम्बूजा सीमेंट लिमिटेड गारे पेलमा कोल माइन्स, अदानी पावर लिमिटेड छोटे भंडार तथा अदानी प्रोजेक्ट लिमिटेड छोटे भंडार में किया गया। शिविर का शुभारंभ संबंधित अधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। शिविर में कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया। अम्बूजा सीमेंट लिमिटेड में 61 यूनिट, अदानी कोल माइन्स गारे पेलमा-में 135 यूनिट, अदानी पावर लिमिटेड में 251 यूनिट तथा अदानी प्रोजेक्ट लिमिटेड में 269 यूनिट रक्त संग्रहित किया गया। इस प्रकार कुल 716 यूनिट रक्त एकत्रित हुआ। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी जिला शाखा रायगढ़ ने शिविर के सफल आयोजन के लिए सभी संस्थाओं, रक्तदाताओं एवं सहयोगी चिकित्सकीय दलों का आभार व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी रक्तदान शिविरों के आयोजन में सहयोग देने का आग्रह किया गया। शिविर को सफल बनाने में रेडक्रॉस सोसायटी के कर्मचारियों, किरोड़ीमल जिला चिकित्सालय तथा संत बाबा गुरु घासीदास स्मृति चिकित्सालय रायगढ़ के चिकित्सकीय दल का विशेष योगदान रहा।

Raigarh, Chhattisgarh | Jun 26, 2026

50 दिन तक मौत से लड़ता रहा नवजात, मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के डॉक्टरों ने बचाई जिंदगी

उम्मीद छोड़ चुके माता-पिता को स्वस्थ शिशु सौंपा, चिकित्सकों की सेवा भावना बनी मिसाल

33 सप्ताह में जन्मे 1.7 किलो के गंभीर नवजात का निःशुल्क हुआ सफल उपचार

स्व.श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ के चिकित्सकों ने सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने एक नन्ही जिंदगी को नया जीवनदान दिया। जूटमिल निवासी दंपति श्री ललित एवं श्रीमती सुगंधी के समयपूर्व जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों तक चले जटिल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उनके परिजनों को सौंप दिया गया। गर्भावस्था के मात्र 33वें सप्ताह में जन्मा यह शिशु केवल 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म के तुरंत बाद उसे गंभीर श्वसन संबंधी परेशानी होने लगी और पहले ही दिन से बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) और निमोनिया जैसी जटिल बीमारियों का पता चला। स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण नवजात को तत्काल नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया।
 उपचार के दौरान चिकित्सकों ने शिशु को कई बार रक्त और प्लाज्मा चढ़ाया। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक स्तर पर एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का उपयोग किया गया। लगातार चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद शिशु की स्थिति में सुधार होने लगा। इसके बाद उसे वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (एनआईव्ही) पर लाया गया। भर्ती अवधि के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफलतापूर्वक उपचार किया गया। बाल्य एवं शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शिशु की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। परिस्थितियां इतनी चुनौतीपूर्ण थीं कि माता-पिता ने भी उम्मीद लगभग छोड़ दी थी और अस्पताल आना बंद कर दिया था। लेकिन एनआईसीयू की टीम ने हार नहीं मानी और पूरे समर्पण के साथ उपचार जारी रखा। धीरे-धीरे शिशु ने दूध लेना शुरू किया, उसका वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित होने लगीं। पूरे उपचार के दौरान शिशु 23 दिन वेंटिलेटर और 17 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा। करीब 50 दिनों तक चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ ने दिन-रात उसकी निगरानी कर उपचार किया। अंततः शिशु पूरी तरह स्थिर, दौरे-मुक्त और सामान्य ऑक्सीजन स्तर के साथ स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया। 
#RaigarhDistt

50 दिन तक मौत से लड़ता रहा नवजात, मेडिकल कॉलेज रायगढ़ के डॉक्टरों ने बचाई जिंदगी उम्मीद छोड़ चुके माता-पिता को स्वस्थ शिशु सौंपा, चिकित्सकों की सेवा भावना बनी मिसाल 33 सप्ताह में जन्मे 1.7 किलो के गंभीर नवजात का निःशुल्क हुआ सफल उपचार स्व.श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय, रायगढ़ के चिकित्सकों ने सेवा, समर्पण और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने एक नन्ही जिंदगी को नया जीवनदान दिया। जूटमिल निवासी दंपति श्री ललित एवं श्रीमती सुगंधी के समयपूर्व जन्मे गंभीर रूप से बीमार नवजात को 50 दिनों तक चले जटिल उपचार के बाद स्वस्थ अवस्था में उनके परिजनों को सौंप दिया गया। गर्भावस्था के मात्र 33वें सप्ताह में जन्मा यह शिशु केवल 1.7 किलोग्राम वजन का था। जन्म के तुरंत बाद उसे गंभीर श्वसन संबंधी परेशानी होने लगी और पहले ही दिन से बार-बार दौरे पड़ने लगे। जांच में फेफड़ों में रक्तस्राव, गंभीर संक्रमण (सेप्सिस) और निमोनिया जैसी जटिल बीमारियों का पता चला। स्थिति अत्यंत गंभीर होने के कारण नवजात को तत्काल नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। उपचार के दौरान चिकित्सकों ने शिशु को कई बार रक्त और प्लाज्मा चढ़ाया। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक स्तर पर एंटीबायोटिक और एंटीफंगल दवाओं का उपयोग किया गया। लगातार चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद शिशु की स्थिति में सुधार होने लगा। इसके बाद उसे वेंटिलेटर से हटाकर नॉन-इनवेसिव वेंटिलेशन (एनआईव्ही) पर लाया गया। भर्ती अवधि के दौरान हुए कोलेस्टेटिक पीलिया का भी सफलतापूर्वक उपचार किया गया। बाल्य एवं शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणेश्वर कुमार सोनी ने बताया कि उपचार के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब शिशु की हालत अत्यंत गंभीर हो गई थी। परिस्थितियां इतनी चुनौतीपूर्ण थीं कि माता-पिता ने भी उम्मीद लगभग छोड़ दी थी और अस्पताल आना बंद कर दिया था। लेकिन एनआईसीयू की टीम ने हार नहीं मानी और पूरे समर्पण के साथ उपचार जारी रखा। धीरे-धीरे शिशु ने दूध लेना शुरू किया, उसका वजन बढ़ा और सामान्य गतिविधियां विकसित होने लगीं। पूरे उपचार के दौरान शिशु 23 दिन वेंटिलेटर और 17 दिन ऑक्सीजन सपोर्ट पर रहा। करीब 50 दिनों तक चिकित्सकों, नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ ने दिन-रात उसकी निगरानी कर उपचार किया। अंततः शिशु पूरी तरह स्थिर, दौरे-मुक्त और सामान्य ऑक्सीजन स्तर के साथ स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज किया गया। #RaigarhDistt

Raigarh, Chhattisgarh | Jun 26, 2026